The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Offensive Hashtag for Shaheen Bagh Women Tops Twitter Trend After BJP IT Cell Chief Amit Malviya Shares a Video

'शाहीन बाग की बिकाऊ औरते' ट्रेंड करवाने वालों ने नीचता की ऊंचाई छुई है

शाहीन बाग की औरतें दिल्ली की सर्दी में घर का आराम छोड़ सड़कों पर रात बिता रही हैं.

Advertisement
pic
16 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 17 जनवरी 2020, 09:31 AM IST)
Img The Lallantop
शाहीन बाग में 15 दिसंबर से प्रदर्शन चल रहा है. फोटो- PTI
Quick AI Highlights
Click here to view more
अमित मालवीय. BJP IT सेल के मुखिया हैं. इन्होंने एक वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया. वीडियो में दिख रहा है एक लड़का. उससे बात कर रहा है कोई ‘रिपोर्टर टाइप’ आदमी. माइक ID नहीं है इसलिए हम कह नहीं सकते हैं कि वो आदमी रिपोर्टर ही है. रिपोर्टर टाइप जनाब उस लड़के से शाहीन बाग में चल रहे प्रोटेस्ट को लेकर सवाल पूछ रहे हैं. और लड़का बता रहा है,
‘मकान मालिकों ने किराया माफ कर दिया. दुकानों का डेढ़-डेढ़ लाख का किराया माफ कर दिया.’
फिर रिपोर्टर टाइप जनाब उससे पूछते हैं कि जो लेडीज़ बैठ रही हैं वे पांच-पांच सौ ले रही हैं. इस पर लड़का कहता है,
‘500-700 रुपये बंट रहे हैं. शिफ्ट चेंज होती है इनकी. 12 से इतने टाइम का है, गिनती पूरी होनी चाहिए इनकी. मतलब 1000 बंदों के पैसे हैं तो 1000 बंदे पूरे होने चाहिए. एक गई तो दूसरी उनके जगह पर आकर बैठेंगी.’
इस पर रिपोर्टर टाइप शख्स बिरयानी बंटने का तुर्रा छोड़ते हैं, तो लड़का कहता है,
‘बस खाना चल रहा है. चाय बिरयानी सब चल रहा है, पैसा मिल रहा है. घर पे जाओ खाना बनाकर आ जाओ, जो घर पे न सोओ यहां आकर बैठ जाओ, 500 रुपये मिल रहे हैं, क्या जा रहा है. कालिंदी कुंज की बात है. पैसा कमा रहे हैं, और कुछ नहीं हो रहा है ये. एक-एक साल के बच्चे को लेकर बैठे हैं, पैसे मिल रहे हैं पांच-पांच सौ इन्हें.’
इतने में रिपोर्टर बने भाईसाब कहते हैं कांग्रेस का खेल है सब. और वीडियो बंद हो जाता है.
आप वीडियो देख लीजिए. मालवीय के बाद इस वीडियो को तेजिंदर पाल सिंह बग्गा, कपिल मिश्रा समेत कई बीजेपी नेताओं ने ट्वीट किया. इसके बाद ट्विटर पर #बिकाऊ_औरते_शाहीनबागकी ट्रेंड करने लगा. औरतें नहीं 'औरते'. टॉप पर. यह आर्टिकल लिखते वक्त इस हैशटैग के साथ करीब 19 हज़ार ट्वीट किये जा चुके थे.
#आगे बढ़ने से पहले थोड़ा बैकग्राउंड में चलते हैं.
CAB. नागरिकता संशोधन बिल. 10 दिसंबर, 2019 को लोकसभा में पास हुआ. अगले दिन राज्यसभा में भी यह पास हो गया. 12 दिसंबर को राष्ट्रपति के हस्ताक्षर के बाद बिल ने कानून की शक्ल ले ली. नागरिकता संशोधन कानून यानी CAA बन गया. CAA में पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक आधार पर सताए गए अल्पसंख्यकों को भारत की नागरिकता देने का प्रावधान है. इसे लेकर विवाद शुरू हुआ कि सरकार ने केवल तीन मुस्लिम देश चुने और वहां की माइनॉरिटी जो कि मुख्य रूप से हिंदू हैं उन्हें भारत की नागरिकता देने का प्रावधान कानून में किया. सरकार ने श्रीलंका के तमिल या म्यांमार के रोहिंग्या मुसलमानों को इसमें शामिल नहीं किया. इसे बीजेपी के हिंदू वोटबैंक को मजबूत करने के कदम के रूप में देखा गया. इसके साथ ही सरकार ने देशभर में NRC कराने का ऐलान किया था. सवाल उठे कि NRC के बाद जो मुस्लिम दस्तावेज नहीं दिखा पाएंगे उन्हें देश से बाहर कर दिया जाएगा, जबकि बाकि धर्मों के लोगों को CAA के जरिए जीवनदान मिल जाएगा. यह एक धर्म विशेष के लिए भेदभावपूर्ण है और संविधान की मूल भावना के खिलाफ है.
इसी को लेकर प्रदर्शन शुरू हुआ. पहले असम में. फिर दिल्ली और उसके बाद देश के अलग-अलग शहरों में. जामिया मिल्लिया इस्लामिया में दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के बाद देशभर के विश्वविद्यालयों में इसे लेकर प्रदर्शन हुआ. उसी दौरान दिल्ली के शाहीन बाग इलाके में प्रदर्शन शुरू हुआ. दिनभर घर के कामों में व्यस्त रहने वाली औरतें रात सड़कों पर बिताने लगीं. एक महीने से ज्यादा वक्त बीत चुका है. दिसंबर-जनवरी की कड़ाके की ठंड में शाहीन बाग में लोग पूरी रात प्रोटेस्ट करते हैं. इस प्रोटेस्ट को लीड करती हैं शाहीन बाग की औरतें. वही जिनके नाम पर ट्रेंड चल रहा है.
शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन में हर रोज़ हज़ारों लोग जुट रहे हैं. फोटो- PTI शाहीन बाग में हो रहे प्रदर्शन में हर रोज़ हज़ारों लोग जुट रहे हैं. फोटो- PTI

ट्रेंड है, ट्रेंड चलते रहते हैं, इसमें दिक्कत क्या है?
तीन दिक्कतें हैं. एक-एक कर उनपर बात करेंगे.
# वीडियो की ऑथेंसिटी
जो वीडियो अमित मालवीय ने पोस्ट किया है उसमें एक लड़का बात कर रहा है. वो लड़का कौन है यह साफ नहीं है. कोई भी रैंडम लड़का हो सकता है. इस वीडियो में प्रोटेस्ट में शामिल किसी महिला या किसी और शख्स से बातचीत नहीं की गई है. न ही ये कोई स्टिंग वीडियो है जिसमें कोई महिला खुद पैसे लेने की बात स्वीकार कर रही हो. वीडियो के आखिर में वीडियो बनाने वाला शख्स कह रहा है कि ये सब कांग्रेस करवा रही है. एक रैंडम वीडियो के आधार पर उस पूरे प्रोटेस्ट को ये कहकर खारिज नहीं किया जा सकता है कि वो कांग्रेस प्रायोजित है. वीडियो में उस लड़के के रैंट के अलावा ऐसा कुछ नहीं है जो अमित मालवीय के दावे की पुष्टि करता हो कि प्रोटेस्ट में बैठने वाली महिलाओं को पैसे दिये जा रहे हैं.
# प्रोटेस्ट करने में गलत क्या है
बीते दिनों एक दोस्त के घर एक कार्यक्रम में जाना हुआ. लौटते हुए आस-पड़ोस में रहने वाले हम चार-पांच लोगों ने एक कैब कर ली. इनमें से दो शाहीन बाग में रहे थे. कुछ साल पहले. एक ने कहा- यार पतली गलियां थीं, खाना बहुत बेकार मिलता था. इतने में ड्राइवर साब बोल पड़े- अब मिनी पाकिस्तान में रहेंगे तो यही होगा न.
मिनी पाकिस्तान से उनका मतलब था वो इलाका जहां बहुत सारे मुसलमान रहते हैं. जब से सीएए के खिलाफ शाहीन बाग में प्रदर्शन शुरू हुआ है तब से सोशल मीडिया पर एक धड़ा उसे मिनी पाकिस्तान का प्रोटेस्ट साबित करने पर अड़ा हुआ है. प्रदर्शनकारियों को एंटी नेशनल साबित करने पर तुला हुआ है.
15 जनवरी की रात महिलाओं ने जामा मस्जिद में CAA, NRC और जामिया छात्रों पर हुआ कार्रवाई के खिलाफ प्रोटेस्ट किया. फोटो- PTI 15 जनवरी की रात महिलाओं ने जामा मस्जिद में CAA, NRC और जामिया छात्रों पर हुआ कार्रवाई के खिलाफ प्रोटेस्ट किया. फोटो- PTI

एक कानून बना है, जिसके खिलाफ करोड़ों लोग आवाज़ उठा रहे हैं, सड़क पर उतरे हैं, सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं. ये आवाज़ उठाना, सड़क पर आना और सोशल मीडिया पर लिखा जाना कानून के सपोर्ट में भी हो रहा है. लेकिन विरोध और समर्थन में बड़ा अंतर किसी को टैग कर दिये जाने का है. सपोर्ट में निकलने वाली रैलियों में सरकार के बड़े-बड़े चेहरे शामिल हो रहे हैं, जो शामिल नहीं हो रहे वो सोशल मीडिया पर उसके सपोर्ट में लिख रहे हैं. रैलियों की फोटो शेयर कर रहे हैं. सपोर्ट में निकलने वाली रैलियों को पुलिस प्रोटेक्शन मिल रहा है और विरोध करने वालों पर पुलिस लाठीचार्ज कर रही है, यूपी में 19 से ज्यादा लोग मारे गए हैं, जामिया में कई छात्र घायल हुए हैं.
#और बिकाऊ औरतें?
सामाजिक तानेबाने के आधार पर देखें तो ‘बिकाऊ औरत’ शब्द का इस्तेमाल उन औरतों के लिए किया जाता है जो पैसों के लिए अपना शरीर बेचती हैं. यानी सेक्स वर्कर्स. सेक्स वर्कर होना किसी की चॉइस हो सकती है या मजबूरी. लेकिन इस पेशे को समाज का एक बड़ा तबका अच्छी नज़र से नहीं देखता. यह कानूनी भी नहीं है. ऐसे में प्रदर्शन में बैठी शाहीन बाग की औरतों को, जो हिम्मत का परिचय दे रही हैं, दिल्ली की सर्दी में घर का आराम छोड़ सड़क पर रात बिता रही हैं, उस कॉज़ के लिए जिसपर उन्हें विश्वास है, उन्हें ‘बिकाऊ औरतों’ का टैग दे दिया गया.
#आखिर में
शाहीन बाग में औरतें शांति से प्रदर्शन कर रही हैं. वहां पहुंचने वाले हर शख्स को खाना पूछा जा रहा है, चाय पूछी जा रही है. लोगों के लिए अलाव जलाए जा रहे हैं, उन्हें शॉल ओढ़ाई जा रही है. हवन भी हो रहे हैं, नमाज़ें पढ़ी जा रही हैं. दिल्ली पुलिस ने कह दिया है कि वो प्रोटेस्टर्स को हटाने के लिए बल का इस्तेमाल नहीं कर सकती है. बल का इस्तेमाल तब होता है जब प्रदर्शन हिंसक हो जाए. शाहीन बाग में हिंसा नहीं हो रही, लोग जमा हो रहे हैं, हंस-बता रहे हैं, खा-पी रहे हैं, गाने गा रहे हैं और शांति से अपना विरोध दर्ज कर अपने घर लौट रहे हैं. तो पुलिस भी चुप है, बस देख रही है. लेकिन कुछ लोगों की कोशिशें जारी हैं, प्रोटेस्ट को रोकने की. उसे बंद करने की. काफी पुरानी ‘टेक्नीक’ है. जब सामने वाला किसी भी हाल में न झुके, तो उसे बदनाम कर दो. वही टेक्नीक इन लोगों ने अपनाई है.


वीडियोः साबरमती ही नहीं पेरियार हॉस्टल में भी हुई थी इतनी भयंकर मारपीट

Advertisement

Advertisement

()