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नूह हिंसा पर अपनी ही सरकार पर हमलावर हुए दुष्यंत चौटाला, क्या CM खट्टर इन सवालों के जवाब दे पाएंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने VHP की रैलियों पर रोक नहीं लगाई. बल्कि प्रशासन को ये आदेश दिया कि किसी भी रैली में हिंसा नहीं होनी चाहिए.

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2 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 2 अगस्त 2023, 12:00 AM IST)
nuh violence
सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि राज्य सरकार और प्रशासन इस बात को पुख्ता करें कि किसी भी रैली में हिंसा ना हो.
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स्क्रीन पर आपको एक तस्वीर दिख रही होगी. आपको दिख रहे होंगे...जले हुए गद्दों के चीथड़े.... और उनकी राख. आपको टूटे हुए शेल्फ भी दिख रहे होंगे. जिनमें गद्दे रखे जाते थे. आपको इस तस्वीर में सफेद कुर्ता-पजामा भी दिखेगा. दिख तो आपको दाढ़ी भी सकती है. लेकिन आंखों से धर्म का चश्मा हटाकर देखेंगे तो आपको इन बूढ़ी आंखों में बेबसी दिखेगी. लाचारी भी दिखेगी. मदद की टूटती आस दिखेगी. दिखेगी कुछ ना कर पाने की हताशा. और एक सवाल दिखा कि मेरी दुकान क्यों जलाई गई?

गुरुग्राम के सेक्टर 66 की तस्वीर बताती है कि धार्मिक उन्माद जब फैलता है तो क्या होता है. 31 जुलाई को जो नूह में हुआ वो भी और उसके बाद से जो गुरुग्राम में दिखा वो भी. आप ये कह सकते हैं कि बवाल करने वालों का मजहब अलग-अलग है. लेकिन असल बात ये है कि इनका मजहब सिर्फ नफरत है. उन्माद है. कट्टरता है.

नूह में हिंसा रुकी तो गुरुग्राम जलाया गया. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक़, गुरुग्राम के बादशाहपुर में कम से कम 14 दुकानें जला दी गईं. कथित तौर पर मोटरसाइकिलों-गाड़ियों से क़रीब 200 लोग, मेन बाज़ार में आए और चुन-चुनकर इन दुकानों को निशाना बनाया. ज़्यादातर दुक़ानें मुस्लिम समाज के लोगों की थीं. अखबार ने बताया कि दंगाइयों ने दुकानों में बिकती से पहचान कर इन्हें निशाना बनाया.

तोड़-फोड़ के दौरान भीड़ ने धार्मिक नारे लगाए. हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक़, बादशाहपुर में ही भीड़ ने मस्जिद के सामने भी धार्मिक नारे लगाए. पुलिस ने बताया है कि बादशाहपुर बाज़ार बंद करा दिया गया. शहर में दुकानों और झुग्गियों में आग लगाए जाने के बाद गुरुग्राम प्रशासन ने धारा 144 लागू कर दी. आगज़नी की घटनाओं को रोकने के लिए खुले पेट्रोल या डीजल की बिक्री पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया.

सोहना इलाके में पड़ने वाले सभी स्कूल-कॉलेज हिंसा के बाद से ही बंद हैं. आज भी बंद रहे. दिल्ली के कई स्कूलों ने भी अपनी स्कूल बसें गुरुग्राम नहीं भेजीं. कॉर्पोरेट दफ़्तरों ने भी अपने कर्मचारियों को समय से पहले घर भेज दिया और कइयों को work-from-home करने के लिए कह दिया. हालांकि पुलिस का कहना है कि हालात काबू में हैं.

आपने नूह देखा. गुरुग्राम देखा. अब दिल्ली चलिए. नूह की बृज मंडल यात्रा विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल ने निकाली थी. आरोप है कि यात्रा पर दूसरे समुदाय के लोगों ने हमला किया. VHP ने आज दिल्ली-NCR में यात्रा पर हुए हमले के विरोध में 23 जगहों पर प्रदर्शन का ऐलान किया. सुबह से दिल्ली के बदरपुर, उत्तमनगर, समेत कई जगहों पर प्रदर्शन किया गया.

प्रदर्शन दिन भर चलने थे. लेकिन आज VHP की रैलियों पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई. मामले की सुनवाई दोपहर 2 बजे शुरू हुई. दो जजों की बेंच ने रैलियों पर रोक तो नहीं लगाई. लेकिन प्रशासन को ये आदेश दिया कि किसी भी रैली में हिंसा नहीं होनी चाहिए और ना ही भड़काऊ बयान आने चाहिए. कोर्ट ने आदेश दिया कि राज्य सरकार और प्रशासन इस बात को पुख्ता करें कि  

रैली में किसी तरह की हिंसा ना हो.
कभी भी भड़काऊ बयान ना दिए जाए.
सीसीटीवी लगाए जाएं ताकि उत्पात मचाने वालों को रिकॉर्ड किया जा सके.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर सरकारें कितना अमल करेंगी ये हमें आने वाले वक्त में पता लग ही जाएगा. लेकिन नूह में हुई हिंसा पर राजनीति जरूर शुरू हो गई है. बाहर से तो खट्टर सरकार पर सवाल उठ ही रहे हैं, भीतर भी उठने लगे हैं. डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने अपनी ही सरकार को घेर लिया. सबके बयान सुनाएंगे, लेकिन उससे पहले नूह चलते हैं. 31 जुलाई को हुई हिंसा के बाद पुलिस ने जो FIR दर्ज की हैं उनकी डिटेल्स जानना जरूरी है. क्योंकि इन FIR में जो बातें   लिखी गई हैं वो हैरान  करने वाली हैं.

पहली FIR आबिद की. आबिद सरकारी कर्मचारी हैं. बवाल के समय ड्यूटी पर नैतात थे. उन्होंने FIR में आरोप लगाया है,

- जब बृज यात्रा निकल रही थी उसी दौरान दूसरे समुदाय के 700 से 800 लोगों की भीड़ ने पथराव किया. गाड़ियों में आग लगाई.
- जब वो बस अड्डे पर तैनात थे तब उनको जानकारी मिली कि करीब 500 लोगों की भीड़ ने धार्मिक यात्रा में शामिल 35-40 लोगों को मंदिर में बंधक बना लिया है.
- जब वो मंदिर पहुंचे तो दंगाइयों ने उन पर पहले लाठी-डंडों और पत्थरों से हमला किया. उसके बाद फायरिंग शुरू कर दी.

दूसरी FIR ASI धर्मेंद्र की. धर्मेंद्र ने अपनी FIR में कहा है,
- 800 से 900 लोगों की भीड़ ने मंडल यात्रा में बाधा डालने की कोशिश की. नल्हड़ मंदिर के जलाभिषेक में बाधा पहुंचाने की कोशिश की.
- पुलिस के समझाने के बावजूद भीड़ ने धार्मिक नारे लगाते हुए हमला किया और फायरिंग की.
- भीड़ में कुछ लोगों ने पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाए.
- मैंने अपनी सरकारी पिस्टल से हवा में तीन राउंड फायर किए तो दंगाइयों ने पेट्रोल बम से हमला कर दिया. धार्मिक यात्रा में शामिल लोगों की गाड़ियों में तोड़फोड़ की जाने लगी.

तीसरी  FIR नूह के एक प्रशासनिक अधिकारी मुकुल कुथारिया की. मुकुल ने आरोप लगाया है कि
- विशेष समुदाय की भीड़ ने बृज यात्रा में शामिल लोगों और पुलिस पर फायरिंग की.
- दंगाइयों ने अंधाधुन्ध गोलियां चलाईं. मंदिर को भी क्षतिग्रस्त किया.

चौथी FIR रामेंद्र सिंह की. रामेंद्र पुलिस की गाड़ी चला रहे थे. उनका कहना है कि
- जब वो बस अड्डे पर थे तब भीड़ ने उन्हें घेर लिया.
- उन पर जान से मारने की नीयत से हमला किया गया. पत्थर मारे गए. और फायरिंग की गई. एक पत्थर उनके कंधे पर लगा.
- उन्होंने जैसे-तैसे जान बचाई लेकिन दंगाइयों ने उनकी गाड़ी में आग लगा दी.

पांचवीं FIR. साइबर थाने के SI सूरज ने ये FIR दर्ज कराई है. इसके मुताबिक
- हजारों लोगों की भीड़ ने पुलिस थाने को घेर लिया. थाने पर पत्थरबाजी की गई. गाड़ियों में आग लगा दी गई, फायरिंग की गई.
- उस दौरान पुलिस स्टेशन के अंदर SI सूरज के साथ 8 पुलिसकर्मी और मौजूद थे. और बाहर से दंगाई कह रहे थे कि उन्हें जिंदा जला देंगे.
- एक बस से पुलिस स्टेशन के मेन गेट को तोड़ने की कोशिश की गई.
- दंगाई ने छत पर चढ़ कर अवैध हथियारों से पुलिसवालों पर फायरिंग की.

FIR में आरोप पुलिस और प्रशासन के लोग लगा रहे हैं. उनसे एक बात तो साफ है कि भीड़ ने दंगे की तैयारी पहले से ही कर ली थी. यहां कटघरे में मनोहर लाल खट्टर सरकार और गृहमंत्री अनिल विज का महकमा है. इतना बड़ा बवाल हुआ. बवाल की तैयारी पहले से थी और सरकार और प्रशासन को जरा भी भनक नहीं लगी. क्या कोई भी इटेंलिजेंस इनपुट नहीं दिया गया था?

एक बात और. मोनू मानेसर का वीडियो सोशल मीडिया पर धार्मिक यात्रा से दो दिन पहले आया. बृजमंडल जलाभिषेक यात्रा तीन साल से चली आ रही है, पर इस बार माहौल गर्म था. कारण, फरवरी महीने में नासिर और जुनैद की हत्या. इस घटना के बाद सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था. इसीलिए 27 जुलाई को एक बैठक हुई. मोनू के वीडियो से दो दिन पहले. बैठक में नूंह पुलिस और ज़िला अधिकारियों और विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रतिनिधि थे. क्षेत्र के निवासी भी थे. डिप्टी कमिशनर प्रशांत पंवार ने बताया कि जब पुलिस ने यात्रा की अनुमति दी, तो सख़्ती से कहा गया था कि यात्रा के दौरान एक भी हथियार नहीं होना चाहिए. माने इलाक़े के तनाव की आशंका पुलिस को भी था. तो क्या हिंसा की आशंका के बावजूद सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं किए ताकि माहौल खराब ना हो. नतीजा ये हुआ कि अलग-अलग जगहों पर हुई हिंसा में 6 लोगों की मौत हो गई.

दंगों में मरने वाले अक्सर आंकड़े बनकर रह जाते हैं. लेकिन ये महज संख्या नहीं है. इनकी कहानी भी सुनिए. ये कहानी रिपोर्ट की है इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े धीरज मिश्रा ने. रिपोर्ट के मुताबिक़, 22 साल के अभिषेक चौहान पानीपत के नूरवाला गांव से नूह आए थे. बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के जुलूस में भाग लेने के लिए. कुछ घंटों बाद हिंसा भड़क गई और हिंसा में उनकी हत्या कर दी गई. अभिषेक के साथ उनका भाई महेश भी आया था. महेश ने बताया कि नल्हड़ मंदिर के सामने हथियारों से लैस भीड़ ने उनपर हमला कर दिया. वो गाड़ियों में आग लगा रहे थे, लोगों को पीट रहे थे, गोलियां चला रहे थे. एक गोली अभिषेक को लगी और वो वहीं चित हो गए. महेश मदद के लिए चीखता रहे. उन्होंने एक्सप्रेस को बताया, "मैं अभिषेक को कहीं सुरक्षित ले जाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन एक आदमी ने धारदार हथियार से उसकी हत्या कर दी और भाग गया... मुझे उसे वहीं छोड़कर जाना पड़ा. एक घंटे के बाद, पुलिसकर्मी आए और उसे अस्पताल ले गए. वहीं उसे मृत घोषित कर दिया गया."

जो दो होम-गार्ड्स हैं, उनकी कहानी क्या है? सोमवार, 31 जुलाई को 37 साल का नीरज अपने घर से निकले. परिवार को ये बता कर कि नूह में बलवा हो गया है. शाम को परिवार को बताया गया कि नीरज की हत्या कर दी गई है. परिवार वालों ने बताया कि उन्हें अंदाज़ा ही नहीं था कि नूह का बलवा इतना बढ़ जाएगा. नीरज के भाई सुखदेव ने मीडिया को बताया, चिंता परिवार के भविष्य की है. नीरज के दो बच्चे हैं: एक 7 साल का लड़का और 5 साल की एक लड़की. घर में कमाने वाला वो इकलौता था.

होम गार्ड गुरसेव सिंह के परिवार ने कहा कि उन्हें पता तो था कि क्षेत्र में हिंसा फैल रही है. लेकिन इस बात का अंदाज़ा कतई नहीं था कि गुरसेव इसका शिकार हो जाएंगे. गुरसेव के एक भतीजे ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, "गुरसेव के पिता सैसी सिंह ने हिंसा वाले दिन दोपहर करीब 3 बजे उनसे बात की थी. गुरसेव ने कभी भी स्थिति की गंभीरता के बारे में बहुत खुल कर नहीं बताया." गुरसेव और उनकी पत्नी के दो बच्चे हैं: छह साल की बेटी और चार साल का बेटा. मां-बाप उनके गांव में है, जो यूपी के फ़तेहपुर में है. हिंसा से मात्र हफ़्ते भर पहले ही गुरसेव की फतेहाबाद में तैनाती हुई थी. परिजनों का कहना है कि वो परिवार में अकेले कमाने वाले थे और जो कुछ भी कमाते थे, उसका आधा हिस्सा अपने गांव भेजते थे.

टीवी चैनलों पर मरने वालों के रोते-बिलखते परिजनों का मोंटाज चलेगा. सरकार, परिवारों के लिए मुआवजों का ऐलान करती ही है. लेकिन क्या जो बेवक्त-बेवजह मारे गए, वो वापस आ पाएंगे. पैसों दिए जा सकते हैं. लेकिन परिवार पूरा नहीं किया जा सकता.

नूह की हिंसा पर हरियाणा के डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला अपनी ही सरकार पर सवाल उठा दिए. इंडियन एक्सप्रेस के एक कार्यक्रम में चौटाला ने कहा कि ये यात्रा चौथे साल निकल रही थी तो पुलिस के और बेहतर इंतजाम होने चाहिए थे.

पर चौटाला से एक कदम आगे बढ़ते हुए केंद्रीय मंत्री और गुरुग्राम से बीजेपी सांसद राव इंद्रजीत सिंह ने तो प्रशासन की बखिया ही उधेड़ दी. इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए राव इंद्रजीत ने कहा- "किसने हथियार दिये उनको इस जुलूस में ले जाने के लिए? जुलूस में कोई तलवार लेके जाता है? लाठी-डंडे लेके जाता है."

खट्टर साहब कह रहे हैं कि जिन्होंने दंगे करे, नुकसान की भरपाई भी उन्हीं से की जाएगी. लेकिन मुख्यमंत्री जी आपकी सरकार और पुलिस की जिम्मेदारी तो ये थी कि ऐसी स्थिति को पैदा ही ना होने दिया जाए. नूह में अगर पर्याप्त पुलिसबल तैनात किया जाता तो इतने बड़े स्तर पर दंगे होने से रोका जा सकता था. हिंसा का पैटर्न देखने से पता चलता है कि सब कुछ प्लैन्ड था. तो इतना बड़ा प्लैन बन गया और पुलिस प्रशासन को भनक तक नहीं लगी.

27 जुलाई की बैठक के बाद डिप्टी कमिशनर प्रशांत पंवार ने सख़्ती से कहा था कि यात्रा के दौरान एक भी हथियार नहीं होना चाहिए. लेकिन कल आई तस्वीरों से दिख रहा है कि यात्रा में शामिल लोगों के पास हथियार थे. और इसी बात पर सवाल केंद्रीय मंत्री इंद्रजीत राव भी उठा रहे हैं. लेकिन इन सवालों से भी बड़ा सवाल ये कि जब 31 जुलाई को नूह में बड़े स्तर पर हिंसा हुई तो जाहिर था कि दूसरे शहरों में भी ऐसा घटनाएं हो सकती हैं. ऐसे में गुरुग्राम में पर्याप्त सुरक्षा के इंतजाम क्यों नहीं किए गए. 31 जुलाई की रात गुरुग्राम के सेक्टर 57 में हिंसा हुई थी. लेकिन इससे भी सबक नहीं लिया गया. 1 जुलाई को दिन भर गुरुग्राम में दंगाई उत्पात मचाते रहे. और पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा. इन सवालों के जवाब भी तो खट्टर सरकार को ही देने होंगे.

अंत में आप कुछ तस्वीरें देखिए. और सोचिए कि धार्मिक कट्टरता और उन्माद को जब प्रोत्साहित किया जाता है तो हश्र क्या होता है. और क्या वाकई इस दंगे के जिम्मेदार सिर्फ वो 25-30 साल के वे युवा हैं जो मारने काटने को आतुर थे. या इस नफरत के बीच को कहीं और से सींचा जा रहा है.

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