जेब में 100 रुपये हों तो 62,000 रुपये किलो के भाव वाली चांदी खरीदने की सोच सकतेहैं क्या? बेशक 100 रुपये में डेढ़ ग्राम चांदी तो आ ही जाएगी. लेकिन सर्राफा बाजारमें शायद ही कोई आपको इतनी चांदी दे. अब देश में एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) के तहतचांदी की खरीद-बिक्री शुरू होने के साथ ही यह संभव हो सकेगा. यहां आप 100 रुपये सेलेकर हजार या लाखों रुपये की चांदी खरीद सकते हैं और जब चाहें बाजार भाव पर बेच भीसकते हैं. न लॉकर में रखने का खर्चा और न घर में खोने का डर. पेपर या डिजिटल सिल्वरकहा जाने वाला ईटीएफ आपको कई अन्य सहूलियतें भी देता है.आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड ने बुधवार 5 जनवरी को देश का पहला सिल्वरईटीएफ (Silver ETF) लॉन्च किया. किसी भी न्यू फंड ऑफरिंग्स (NFO) की तरह यह भी एकखास अवधि (5-19 जनवरी ) तक खुला रहेगा. यानी इस डेट के दरम्यान आप चाहें तो चांदीख़रीद सकते हैं. फिर एक्सचेंज से जुड़ जाने के बाद इसमें आम म्यूचुअल फंडों याशेयरों की तरह खरीद-बिक्री हो सकेगी. ऐसा माना जा रहा है कि जल्द ही एचडीएफसीम्यूचुअल फंड, निप्पॉन इंडिया म्यूचुअल फंड, मिराए एसेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स,आदित्य बिड़ला सन लाइफ एसेट मैनेजमेंट कंपनी और डीएसपी म्यूचुअल फंड भी अपनी सिल्वरईटीएफ स्कीमों के साथ मार्केट में उतर सकते हैं. क्या है ये चांदी का ETF? आपकहेंगे कि साहब हमको पहिले समझाओ कि ETF होता क्या है? मतलब ऐसे समझिए कि आप चांदीख़रीदेंगे लेकिन आपके हाथ में चांदी नहीं आएगी. आपके हाथ में आएगी रसीद. रसीद इसबात की कि आपने अलाना-फ़लाना रुपए की चांदी ख़रीद ली है.फिर आप पूछेंगे कि ये क्या बात हुई? चांदी में पैसा भी लगा दें और चांदी हाथ में भीन आए? तो जानिए# सबसे बड़ा फायदा यही है कि यह फिजिकल फॉर्म में न होकर डिजिटल फॉर्म में होता है,जिसे कहीं रखने, ढोने या संभालने की जरूरत नहीं. ना ही इसकी सेफ्टी को कोई खतराहोता है.# फिजिकल चांदी के मुकाबले इसे खरीदना और बेचना ज्यादा आसान है. यह काम ऑनलाइन घरबैठे या राह चलते हो सकता है. कीमतों में सर्राफा बाजार के मुकाबले ज्यादापारदर्शिता होती है.# फिजिकल सिल्वर में आपको शुद्धता की चिंता सताती है, लेकिन यहां ऐसी कोई टेंशननहीं. सबसे बड़ी बात कि फिजिकल सिल्वर को बेचने में शायद पूरी मार्केट प्राइस नमिले, लेकिन यहां आप रियल टाइम में मार्केट प्राइस पर ही खरीद या बिक्री करते हैं.कैसे खरीद सकते हैं ETF ? जैसे आप कोई अन्य म्यूचुअल फंड या शेयर खरीदते हैं.सिल्वर ईटीएफ के लिए भी आपके पास डीमैट अकाउंट होना जरूरी है. इसके साथ ही पैन,आधार जैसे केवाईसी डॉक्युमेंट तो होने ही चाहिए. अगर डीमैट अकाउंट नहीं है, तो भीयहां निवेश के रास्ते बंद नहीं होते. एक विकल्प 'फंड ऑफ फंड्स' का भी है, जोनिवेशकों का पैसा किसी म्यूचुअल फंड विशेष में लगाते हैं. लेकिन सरल और किफायतीरास्ता पहला ही है. अभी लॉन्च हुआ सिल्वर ईटीएफ एक एनएफओ (NFO) है, जिसे आपम्यूचुअल फंडों का आईपीओ भी कह सकते हैं. अभी एक निश्चित प्राइस पर आपको डिजिटलसिल्वर मिल जाएगा, जो लिस्टिंग के बाद के रेट के मुकाबले थोड़ा किफायती हो सकता है.लेकिन आप चाहें तो इस फंड के बीएसई और एनएसई पर ट्रेडिंग के लिए लिस्ट हो जाने केबाद भी निवेश कर सकते हैं. 100 रु. में कितना मिलेगा ? सर्राफा बाजार मेंसोना-चांदी ग्राम या किलो के हिसाब से मिलते हैं. लेकिन ईटीएफ में यूनिट्स बिकतीहैं. एक यूनिट एक ग्राम के बराबर होती है. अभी चांदी का रेट 62,300 रुपये किलोमानकर चलें तो 1 ग्राम चांदी की कीमत हुई 62.30 रुपये. ऐसे में इस ईटीएफ की एकयूनिट लगभग इसी रेट पर बिकेगी. ऐसे में अगर कोई 100 रुपये निवेश करना चाहता है तोउसे 1.62 यूनिटें मिलेगी. अगर आप एक किलो चांदी के बराबर निवेश करना चाहते हैं, तोआपको 62,300 रुपये के हिसाब से करीब 1000 यूनिटें मिलेंगी. इस कीमत में सर्राफाबाजार या स्पॉट मार्केट के मुकाबले मामूली अंतर हो सकता है. लेकिन ट्रेडिंग शुरूहोने के बाद कीमतों में उतार-चढ़ाव लगभग उसी तरह का होगा, जैसा स्पॉट या फ्यूचरमार्केट में होता है. रियल टाइम कीमत पर ही आप जब चाहें जितनी यूनिटें खरीद या बेचसकते हैं.फिजिकल सिल्वर की सांकेतिक तस्वीर (साभार: बिजनेस टुडे)ETF का दाम बाजार भाव के बराबर है? आम तौर पर ऐसा ही होगा. लेकिन मार्केट पर नज़ररखने वाली एजेंसी Securities Exchange Board of India (SEBI) ने बीते सितंबर मेंभारत में सिल्वर ईटीएफ की ट्रेडिंग को मंजूरी देते हुए कुछ नियम भी जारी किए थे.इसके मुताबिक सिल्वर ईटीएफ वाले फंडों को अपने नेट एसेट का 95 फीसदी चांदी सेसंबंधित निवेश जरियों में ही लगाना होगा. यानी चांदी का पैसा चांदी में ही. पैसाइधर उधर न जाए. ये फंड वायदा बाजार की चांदी यानी Exchange-Traded CommodityDerivatives (ETCDs) में भी पैसा लगा सकते हैं. ऐसे में फंड की ओर से लगाया गयापैसा अगर रिटर्न कमाएगा तो जाहिर है आपके सिल्वर ईटीएफ की यूनिटों के दाम भीबढ़ेंगे. यानी आपकी चांदी का दाम बढ़ेगा. यही कारण है कि यहां यूनिटें बेचने परआपको चांदी के मार्केट भाव से ज्यादा दाम मिल सकते हैं. इसी वजह से एक्सचेंजों परट्रेड होने वाले अलग-अलग ईटीएफ के दाम में भी अंतर देखा जाता है. लेकिन फिर भीसिल्वर में यह अंतर एक सीमा से ज्यादा नहीं होगा. तो क्या हाथ में चांदी कभी नहींआएगी? ऐसा नहीं है. सैद्धांतिक रूप से आप ईटीएफ को फिजिकल कमोडिटी में भुना सकतेहैं. मतलब चांदी हाथ में आएगी. सेबी ने कहा ही है कि सभी फंड अपना 95 फीसदी एसेटचांदी से संबंधित निवेश जरियों में लगाने को कानूनन बाध्य हैं. इसका मतलब है किसरकार उन्हें इस स्थिति में रखना चाहती है कि जरूरत पड़ने पर वे ईटीएफ होल्डर कोयूनिट के बराबर चांदी लौटा सकें. ज्यादातर गोल्ड ईटीएफ भी यह ऑफर देते हैं. चूंकिईटीएफ के भाव किसी भी समय बाजार भाव के बराबर या उससे ज्यादा ही होंगे, ऐसे मेंनिवेशक फिजिकल कमोडिटी लेने के बदले पैसे लेना चाहेगा. इससे वह बाजार से भी उतनेमूल्य का सोना या चांदी खरीद सकता है. यह जरूर है कि सेबी ने फंडों पर चांदी कीशुद्धता की बंदिश भी लगा रखी है, जो 99.9 फीसदी होगी. यानी कल को कोई फंड आपकोयूनिट के बदले असली चांदी लौटाए तो वह इतना शुद्ध होना ही चाहिए. इस बारे में आपफंडों के टर्म्स एंड कंडिशंस जरूर पढ़ लें.सोने और चांदी की प्रतीकात्मक फोटोGold ETF से कितना अलग ? गोल्ड ईटीएफ भारत में 2007 से चला आ रहा है. सिल्वर ईटीएफकी ट्रेडिंग इससे अलग नहीं होगी. लेकिन कोई गोल्ड के बजाय सिल्वर में क्यों निवेशकरे, इसकी अलग-अलग वजहें हो सकती हैं. आम तौर पर लगता है कि सोने और चांदी के दामसाथ-साथ बढ़ते-घटते हैं. लेकिन कई आर्थिक कारण हैं, जो इसकी गवाही नहीं देते. मसलन,देश में आने वाला ज्यादातर सोना, गहनों या सिक्कों यानी व्यक्तिगत उपभोग पर खर्च होजाता है. लेकिन चांदी की 50 फीसदी डिमांड इंडस्ट्री से आती है. डिजिटल गैजेट्स कीमैन्यूफैक्चरिंग में इसका खूब इस्तेमाल होता है. ऐसे में जब आर्थिक गतिविधियां तेजहों और यह डिमांड बढ़ रही हो, तो चांदी की कीमतें भी बढ़ेंगी. लेकिन जरूरी नहीं कियह बढ़ोतरी आपके निवेश के मुताबिक समयानुकूल हो. कई बार यह गिरावट सोने की तुलनामें ज्यादा होती है. ज्यादातर मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि आम निवेशकों के लिएचांदी की तुलना में गोल्ड ईटीएफ बेहतर विकल्प है. पिछले दस साल के रिकॉर्ड बतातेहैं कि सोना ने चांदी से ज्यादा रिटर्न दिया है. शेयर मार्केट की उठापटक के मुकाबलेहेजिंग के लिए भी सोने को बेहतर एसेट बताया जाता है. ETF की लागत कितनी ? शेयरखरीदने या बेचने पर आप कुछ ब्रोकरेज चार्ज या ट्रांजैक्शन फीस तो चुकाते ही हैं.यहां भी लगभग वही खर्च है. नए फंड के बारे में कहा गया है कि 10,000 रुपये से कममूल्य की खरीद पर ट्रांजैक्शन फीस नहीं लगेगी. आम तौर पर NFO के दौरान फंड हाउस इसतरह के किफायती ऑफर्स देते हैं. सिल्वर ईटीएफ की ट्रांजैक्शन फीस या दूसरी कॉस्टवायदा बाजार एक्सचेंजों पर होने वाली ट्रेडिंग के मुकाबले सस्ती होती है. शुरू मेंलें या बाद में ? जब भी कोई नया म्यूचु्अल फंड या ईटीएफ लॉन्च होता है, तो उसे न्यूफंड ऑफरिंग (NFO) कहते हैं. जैसा कि हम बता चुके हैं, यह बहुत हद तक शेयर आईपीओ कीतरह होता है. यह एक निश्चित अवधि तक खुला रहता है. शुरू हो रहे फंड की नेट एसेटवैल्यू (NAV) किफायती पड़ती है. ईटीएफ के मामले में कह सकते हैं कि एक यूनिट कीकीमत एक्सचेंज पर लिस्ट होने के मुकाबले कम होती है. यानी लॉन्चिंग की अवधि मेंनिवेश थोड़ा सस्ता पड़ेगा. लेकिन यह ध्यान रखें कि शेयरों के मुकाबले ईटीएफ के दाममें, खासकर गोल्ड या सिल्वर में, ज्यादा उतार-चढ़ाव की गुंजाइश नहीं होती. मोटे तौरपर चांसेज इस बात के होते हैं कि ईटीएफ अपनी ऑफर वैल्यू के आसपास या मामूली इजाफेके साथ ही ट्रेडिंग प्लैटफॉर्म पर आएगा. तो आपका पैसा और आपका विवेक, दोनों केसामंजस्य के साथ निवेश का फ़ैसला लीजिए. अपना नफ़ा और नुक़सान समझते हुए.