The Lallantop
Advertisement

जिंदगी का सबसे लंबा इंतजार उस गौरैया के अंडों से बच्चे निकलते देखना था

आज विश्व गौरैया दिवस है, तो पढ़ा जाए.

Advertisement
pic
20 मार्च 2019 (अपडेटेड: 19 मार्च 2019, 05:24 AM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
मेरा घर चिड़ियाघर था. उसमें गायें थीं, उनके बछड़े थे. उनको पापा दुलारते थे. हमारी याद तब आती थी जब चारा मशीन का हैंडल खींचना होता था. कबूतर थे, उन पर बड़े भाई का कब्जा था. वो उनके लिए बढ़िया डिजाइनर दड़बा बनाए थे. सुबह से उनके साथ लग जाते थे. खरगोश और बिना पूंछ वाले चूहे थे. कालांतर में पता चला कि उनका नाम गिनी पिग होता है. उन पर छोटे भाई ने दावा दायर कर रखा था. अब ये नहीं कहेंगे कि बीच वाला भाई होने की वजह से मुसीबतों का शिकार था लेकिन गुरू सच्चाई यही है
.
मेरे पास कोई ऐसा नहीं था. एक काले मुंह वाले बंदर के बच्चे को लाया था तो उसने हाथ में काट लिया था. फिर हिम्मत नहीं पड़ी. एक दिन घर के सामने छप्पर के अंदर उम्मीद की किरन दिखी, जहां गाय बांधी जाती थी. छप्पर में फूस के बीच गोल सा गड्ढा दिख रहा था. उसमें गौरेया बैठी थी. काफी देर तक घोंसले में उसको चीं चीं करते ध्यान से देखा. थोड़ी देर में उसका काली गर्दन वाला हसबैंड भी आ गया. वहां नीचे स्टूल रखकर किसी तरह उस पर एक आंख पहुंचने भर की जगह बनाई. अंदर झांका तो दो अंडे दिख रहे थे. इस पूरे चिड़िया घराने पर झट से कब्जा कर लिया, इससे पहले कि कोई देखे.
'हसबैंड' गौरैया, Image: Pinterest
'हसबैंड' गौरैया, Image: Pinterest

फिर दिन गिने जाने लगे. कि कब इन अंडों से बच्चे निकलेंगे और उनको ऑफिशियली पाला जाएगा. उनके लिए अलग से पालने और खिलाने पिलाने का स्पेशल प्लान था हमारे पास. रोज सुबह उठकर सबसे पहले उस घोंसले में झांकता था. कि शायद अब निकल आए हों. लेकिन नहीं. 15 दिन बीत गए. उसके बाद कहीं जाकर उसमें से बच्चे निकले. ये इंतजार शायद मेरी जिंदगी का सबसे लंबा इंतजार था. इसके बाद न एग्जाम का, न रिजल्ट्स का, न गर्लफ्रेंड और न नौकरी का इतना इंतजार किया. खैर जब तक उन अंडों में से बच्चे निकले, सारा जोश ठंडा हो चुका था. उनको पालने का सपना चकना चूर हो चुका था. बच्चों में सब्र नहीं होता. हमने जितना किया वो काफी था. उसके बाद बच्चे निकले. पता नहीं कब बड़े होकर वहां अपने तमाम रिश्तेदारों के साथ चहचहाने लगे. उस वक्त गौरेया बहुत ज्यादा थीं. फ्यूचर का पता नहीं था कि एक दिन ये भी आएगा. कि टाइगर और धर्मों की तरह गौरैया भै खतरे में आ जाएगी. और उसके लिए "वर्ल्ड स्पैरो डे मनाया जाएगा."
https://www.youtube.com/watch?v=9jsbG9iAvDU
हर साल 20 मार्च को स्पैरो डे मनाया जाता है. जो शुरू हुआ भारत में ही. क्योंकि गौरैया भारत के देहात में कभी इतनी ज्यादा दिखती थी इसका यूं गायब होना आश्चर्य बन गया. 2008 में मोहम्मद दिलावर ने नेचर फॉर सोसाइटी बनाई थी, फ्रांस के ईको सिस एक्शन फाउंडेशन के साथ मिलकर. नासिक में गौरैया को बचाने के लिए ये प्रोग्राम शुरू हुआ और अब पूरे देश में चल रहा है. ये स्पैरो डे मनाने का काम 2010 में शुरू हुआ. इस दिन बच्चों के प्रोग्राम होते हैं. आर्ट, पेंटिंग, सिंगिंग, डांसिंग वगैरह. उद्देश्य होता है जनता को गौरैया बचाने के लिए जागरूक करना.
वर्ल्ड स्पैरो डे के पापा मोहम्मद दिलावर
वर्ल्ड स्पैरो डे के पापा मोहम्मद दिलावर

अब गौरैया को बचाने की नौबत आ गई है. कभी उनका ऐसा जलवा था कि वो घर के बचे रहने की गवाही देती थी. ये कहावत चलती थी कि जिस घर में चमगादड़ आ जाएं, समझो वो खतम. जिस घर में गौरैया रहती है समझो वहां इंसान रहते हैं. गौरैया घर छोड़ के चली जाए तो सब डर जाते थे कि अब इस घर के खत्म होने का नंबर आ गया है. गौरैया का भौकाल क्या था ये जानने के लिए भीष्म साहनी की बाल कहानी 'दो गौरैया' पढ़ना. गौरैया नाम से एक फिल्म भी आई थी 2014 में लेकिन नाम के हिसाब से वो बहुत अच्छी या नई नहीं थी. नारी उत्पीड़न के मुद्दे पर उससे बेहतर तमाम फिल्में बॉलीवुड में बन चुकी हैं. गौरैया नाम रखने का उद्देश्य यही रहा होगा कि औरत को गौरैया जैसा खतरे में दिखाया गया था.
गौरैया फिल्म का पोस्टर
गौरैया फिल्म का पोस्टर

कहा जाता है कि मोबाइल टावर की वजह से गौरैया को खतरा है. इसमें कितनी सच्चाई है ये तो विशेषज्ञ जाने. मोबाइल टावर से नुकसान तो सबको हो रहा है. लेकिन न मोबाइल खत्म हो रहे हैं न टावर. ऐसा भी नहीं है कि सारी दुनिया गौरैया की दुश्मन है. कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनकी दोस्ती इंसानों से ज्यादा गौरैया से है. लखनऊ के आलमबाग में एक सुरेंद्र नाथ पांडे हैं. जिन्होंने अपना घर गौरेया फैमिलीज को सौंप रखा है. इसी तरह पटना के अर्जुन सिंह हैं. उनका भी काफी टाइम अपनी घर की गौरैयों के साथ बीतता है.
अर्जुन सिंह
अर्जुन सिंह

खैर गौरैया अभी शहरों से गायब है. गांवों में भी खतरे में है. गौरैया दिवस अपन मना रहे हैं गौरैया छप्पर में चहचहा रही है.


ये भी पढ़ें:
खुदा हमको ऐसी खुदाई न दे, फैमिली को बीच का भाई न दे

आइडिया-वोडाफोन के गठबंधन की इनसाइड स्टोरी जो आपको कहीं नहीं मिलेगी

कामयाब लोगों, नाकामयाब बंदों का जीने का अधिकार तो नहीं न छीन लोगे

Advertisement

Advertisement

()