90 के दशक में स्कूल में एक ही बंदा था जिसके चक्कर में स्कूल के मास्टरों ने हमेंदबा के हौंका. गजब का फाइटर, लॉन्ग जम्प ऐसी कि देखते रह जाओ और ऊंची कूद तो एकदमकिलर. बात कर रहे हैं अपने वाले सुपर मारियो की, जिसकी पॉपुलैरिटी सुपर कमांडोध्रुव को भी टक्कर देती थी.हमारी गली में राधेश्याम किरानेवाले की दुकान के पीछे एक अंडरग्राउंड विडियो गेमपार्लर था. दो रुपए में आधे घंटे का रेट साथ में सुपर मारियो, सुपर कॉन्ट्रा औरपैकमैन जैसे ढिंचक गेम खेलने का आनंद. इसके बाद बची-खुची शाम दोस्तों के साथ उसकीपरिकल्पना और परिचर्चा में ही गुज़र जाती थी. नतीजन क्लास में गाड़ी कभी A+B के होलस्क्वायर पर अटकी तो कभी अकबर के बेटे के बाप का नाम बताने में. मगर भगवान कसममुर्गा बनने की सारी पीर कॉन्ट्रा के ड्रैगन को मारने की खुशी में दूर हो जाती थी.समय बीता और टेकेन3 के नीना, पॉल और एडी से लड़ते-भिड़ते हम कब मारियो का गेम ओवरकर बैठे पता ही नहीं चला. 2008 में GTA के चीट कोड तलाशते समय खबर मिली कि सुपरमारियो गेम बनाने वाली कंपनी निंटेंडो ने ये वीडियो गेम बनाना बंद कर दिया.खैर, ‘नो शेव नवंबर’ के चक्कर में अम्मा के ताने सुन रहे लोगों के लिए एक दिल खुशकरने वाली खबर है. जापान की कम्पनी ने फिर से पुराना वाला वीडियो गेम बनाना शुरू करदिया है. हुआ यूं कि स्कूल के टाइम में जो लोग जी भर कर कॉन्ट्रा और मारियो खेलनेसे वंचित रह गए थे, वो अब ईबे पर पुराने वीडियो गेम कंसोल ऊंची कीमत पर खरीद रहेथे. कुछ कंसोल तो 400 डॉलर (बोले तो लगभग 28,000 रुपए) तक बिके. तो कंपनी खुद हीउतर गई मैदान में अपने पुराने गेम को लेकर.खबर है कि बाज़ार में दुबारा उतारा जा रहा कंसोल दिखने में पुराने वाले की तरह हीहोगा, बस उसका साइज़ छोटा होगा ताकि आप उसे अपने लैपटॉप बैग में कहीं भी छिपा कर लेजाएं. साथ ही इसमें बड़े वाले LED TV से कनेक्ट करने के लिए HDMI पोर्ट और केबल भीहोंगे.दुनिया भर में 28 करोड़ से ज़्यादा निंटेडो बिक चुके हैं.जाते-जाते एक राज़ की बात और बचपन में रानी तक पहुंचने के लिए जो सात स्टेज पारकरने का दर्द हर बार उठाना पड़ता था, अब वो नहीं होगा. मतलब एक बार वनअप लेकर जोरानी वाली स्टेज पर पहुंच गए तो हर बार सीधे वहीं से शुरू कर सकते हैं. तो सुल्तानकर दे चढ़ाई.