हिलेरी को प्रेसिडेंट घोषित कर मीडिया का दोगलापन दिखाया न्यूजवीक ने!
अमेरिकी चुनाव से पहले ही इन लोगों ने मैगजीन छाप ली है.
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फोटो - thelallantop
अगर आप अखबार नहीं पढ़ते हैं, तो आपको ज्यादा जानकारी नहीं है. अगर आप अखबार पढ़ते हैं, तो आपको गलत जानकारी है.- मार्क ट्वेनअमेरिका में प्रेसिडेंट का चुनाव 8 नवंबर को है. कुछ लोग डरे हैं कि ट्रंप जीत जायेंगे तो क्या होगा अमेरिका का. क्या होगा दुनिया का. कुछ खुश हैं कि अगर हिलेरी जीत गईं तो क्या कहा जाएगा बिल क्लिंटन को. क्योंकि अभी तक सिर्फ पुरुष प्रेसिडेंट बने हैं अमेरिका में और उनकी बीवियों को फर्स्ट लेडी कहा जाता था. तो बिल क्या कहे जाएंगे. कुछ लोग कुछ नया होने के इंतजार में हैं कि वोट देने के लिए मन बनाया जाये.
पर पत्रिका न्यूजवीक ने पहले से ही तय कर लिया है कि कौन बनेगा प्रेसिडेंट. चुनाव होने से पहले ही हिलेरी की कवर पिक लगाकर मैडम प्रेसिडेंट का स्पेशल इश्यू निकाल दिया गया है. लीक कर दिया गया है. आएगा कल.
पूरी दुनिया में मीडिया, कॉर्पोरेट और नेताओं की मिलीभगत पर सवाल खड़े हो रहे हैं. कई जगह मीडिया पर आरोप लगा है कि ये लोगों के मन में खबरें भर दे रहे हैं. जो चाहें वो इमेज क्रिएट कर देते हैं. ऐसे में दुनिया के सबसे ताकतवर पोस्ट के लिए इतना कंफ्यूज करना कहां तक सही है? एक इंच भी नहीं. शुरू से ही गलत है, जब से जिसने भी सोचा कि ऐसा करना है.
अब इसके दो मतलब हैं-1. ये लोग हिलेरी को सपोर्ट कर रहे हैं. पहले ही एनाउंस कर दिये तो ट्रंप के सपोर्टर कंफ्यूज हो जायेंगे.2. ये लोग ट्रंप के लिये काम कर रहे हैं. ट्रंप के सपोर्टर गुस्से में दबा के वोट करेंगे.जो भी हो पर इन लोगों ने वो काम किया है जो लंबे समय तक के लिए मीडिया की इमेज को तोड़ देगा. क्योंकि फिर लोगों का ट्रस्ट ही खत्म होने लगेगा. ट्रंप ने जो भी किया हो अपनी लाइफ में, उसका नतीजा उसके सामने आएगा चुनाव में. अगर पत्रिका वाले ट्रंप के खिलाफ षड़यंत्र रच रहे हैं तो ये फिर किस मोरलिटी के आधार पर ट्रंप को बुरा बताते हैं? खुद भी तो वही काम कर रहे हैं. अगर ये लोग ट्रंप के सपोर्ट में हैं तब तो एकदम ही आपराधिक विशेषांक निकाला है. ऐसा ही 2012 के चुनाव में भी किया था एक मैगजीन ने. ओबामा को लेकर. अमेरिकी मीडिया का ये मैनिपुलेशन सिर्फ चुनाव तक ही सीमित नहीं रहा है-1. सीरिया में बीबीसी के रिपोर्ट इयन पैनेल खड़े थे. एक बम फटा पास में. लोग घायल हुए. एक डॉक्टर भी था वहां. उसने तुरंत बता दिया कि ये नापाम है. बाद में इसको नाटो ने रासायनिक हथियार बताकर सीरिया पर हमला कर दिया. फिर सीरिया की सिचुएशन को सिविल वॉर बताया गया. इसके लिए फोटोशॉप की मदद ली गई-
2. इराक में न्यूक्लियर बम होने की पूरी संभावना जताई थी अमेरिका ने. फिर अल-कायदा से लिंक खोजने लगे इराक का नहीं मिला. पर इन लोगों ने ढूंढ लिया. जॉर्डन का एक गुंडा जरकावी इराक से होकर अफगानिस्तान गया था. उसके आधार पर अमेरिका ने स्टोरी बना ली कि इराक का बम अल-कायदा के हाथ में जा सकता है. इस आधार पर इराक पर हमला कर दिया गया. एक अच्छे-भले देश को बर्बाद कर दिया गया.
3. फिर ये भी खबर आई कि ISIS ने ही सारे वीडियो बना के नहीं भेजे थे. अमेरिका पर आरोप लगा कि लगातार लड़ाई करने के लिए खुद ही इन लोगों ने ये वीडियो बनवाए थे.

ये एकदम ट्राइड एंड टेस्टेड फॉर्मूला है. पहले जनता को कुछ भी ऐसा बता दो जिससे वो शॉक हो जाए. डिस्ट्रैक्ट कर दो. कुछ देर के लिए सोचना बंद कर दे. उतने में वो काम करवा लो. लोगों के इमोशनल पक्ष को झिंझोड़ दो. तर्क ना करने दो. तर्क करने वाले को देशद्रोही बता दो. किसी को खोजने ना दो. औसत बुद्धि की बातों को प्रमोट करो. लोग कुछ जानना शुरू करें, उससे पहले ही कुछ और बता दो. ताकि ध्यान कहीं और चला जाये. लोगों को खुद पर ही दोष डालने के लिए प्रेरित करो. जो असली अपराधी हैं वो तो परिस्थिति के वशीभूत होकर कर रहे हैं. लोगों के मन में क्या सही है की जगह डाल दो कि फलाना नेता सही है क्योंकि उसका कोई ऑप्शन नहीं है. कह दो कि अभी के लिये यही सही है. कड़वी दवा का उदाहरण दे दो.लोगों को बार-बार अहसास दिलाओ कि वो छोटे बच्चे हैं. उनको सीखने ही ना दो. जिससे उनकी आत्म-मुग्धता बढ़ती रहे. हर चीज को समस्या बता दो. जिसको लोग सोच भी ना रहे हों. फिर तुरंत समाधान भी बताओ. लोगों को खोजने ही ना दो. इतना डरा दो कि लोग तुरंत मान लें.
ट्रंप ने इन्हीं चीजों का इस्तेमाल किया. अमेरिका को ग्रेट बनाने की बात की. लोगों को बेरोजगारी का डर दिखाया. हिलेरी के ई-मेल, जिसमें कुछ नहीं था, उसको अमेरिका के लिए खतरा बना दिया. इसमें वो सारी चीजें गुम हो गईं जो ट्रंप के कांडों से आई थीं. क्योंकि वो सारी चीजें अमेरिका के खिलाफ नहीं थीं. उससे सुरक्षा खराब नहीं हो रही थी. मीडिया का मैनिपुलेशन अब स्मॉग की तरह हो गया है. हर सांस के साथ जहर अंदर जा रहा है.

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