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बुध के बेटे को बिना कपड़ों के देख छोड़ गई उसकी प्रेमिका

बुध जी का बेटा था पुरुरवा. एक दिन इंद्र के दरबार में नारद ने पुरुरवा की खूब तारीफ कर दी. तारीफ सुनकर हो गईं उर्वशी इम्प्रेस और चल पड़ीं पुरुरवा से मिलने. शुरू हुई प्रेम कहानी लेकिन फिर आया ट्विस्ट.

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कुलदीप
16 नवंबर 2015 (Updated: 12 मार्च 2018, 07:28 AM IST)
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बुध जी का बेटा था पुरुरवा. एक दिन इंद्र के दरबार में नारद ने पुरुरवा की खूब तारीफ कर दी. तारीफ सुनकर हो गईं उर्वशी इम्प्रेस और चल पड़ीं पुरुरवा से मिलने. उर्वशी पहुंचीं पुरुरवा के पास. दोनों के दिल जिगर दोनों घायल हुए, तीर-ए-नज़र दिल के पार हो गया. पुरुरवा ने कर दिया उर्वशी को प्रपोज़ और उर्वशी ने भी कर दी हां.   पर उर्वशी ने रखी दो शर्तें. पहली ये कि पुरुरवा को उर्वशी के भेड़ के दो बच्चों का ध्यान रखना होगा. दूसरी ये कि प्राइवेट मूमेंट्स के अलावा वो कभी पुरुरवा को नंगू-पंगू नहीं देखेगी.   इधर इंद्र उर्वशी को बहुत्ते मिस कर रहे थे. उन्होंने गंधर्वों को भेजा उर्वशी को लाने के लिए. गंधर्वों को रात के अंधेरे में उर्वशी नहीं मिली तो भेड़ों को ही ले जाने लगे. उर्वशी ने जब भेड़ों को चोरी होते देखा तो पुरुरवा को नामर्द बोलते हुए उन्हें बुरा भला कहने लगे. पुरुरवा का ईगो हर्ट हुआ और तलवार लेकर अंधेरे में बिना कपड़ों के ही दौड़ पड़े. गन्धर्वों ने भेड़ें तो छोड़ दीं पर खुद बिजली की तरह चमकने लगे. उर्वशी ने उन्हें बिना कपड़ों के देख लिया और उन्हें छोड़कर चली गई.   उर्वशी की खोज में पुरुरवा ने धरती, पहाड़ सब नाप दिया. वो आखिर में जब मिली तब पुरुरवा ने रिक्वेस्ट की कि उर्वशी उसे छोड़कर न जाए. पर उर्वशी ने कहा कि जो बात है, वो बात है. पर हम इत्ता कर सकते हैं कि तुमसे साल में एक बार मिल सकते हैं. और पुरुरवा लॉन्ग डिस्टेंस में ही संतोष कर अपने मोबाइल में STD टैरिफ डलाने निकल लिए.   (श्रीमद्भागवत महापुराण)

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