कश्यपजी जी की वाइफ दिति के दो बच्चे थे. हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष. दोनों थेराक्षस. भगवान विष्णु दोनों को निपटा चुके थे और यह बात सर्वमान्य हो चुकी थी कि वेइंद्र और देवताओं की साइड हैं. दिति ने सोचा कि एक ऐसा भौकाली लड़का पैदा किया जाएजो कि इंद्र की बैंड बजा दे. इसलिए उन्होंने अपने हस्बेंड कश्यप जी की सेवा शुरूकी. जब कश्यप जी ने खुश हो कर कहा कि कुछ मांगो, तो उन्होंने मांगा लड़का. पर कश्यपजी भी विल्किंसन के ब्लेड की तरह तेज थे. बोले ठीक, अगर तुम प्रेग्नेंसी के समय येसब चीज़ें फॉलो करो, तो तुमको एक सुंदर देवता जैसा लड़का होगा. और पकड़ा दी एक लिस्टबहुत से कठिन कामों की. दिति थी जबर जिद्दी. पूरा व्रत अच्छे से निभाया. एक दिनबेचारी थक कर बिना पैर धोए सो गई. बस इंद्र मौका देखकर दिति की बच्चेदानी में पलरहे बच्चे को मारने घुस गए. उन्होंने गर्भ में ही बच्चे के सात टुकड़े कर दिए. परभगवान ये कैसे देख सकते थे कि जिस औरत ने इतना कठिन व्रत किया हो उसका बच्चा मारडाला जाए. उन्होंने चलाया अपना जादू, और वो सभी टुकड़े सात नए बच्चे बन गए. कंफ्यूजहो कर इंद्र ने उन सातों के भी सात-सात टुकड़े कर दिए. इस तरह दिति के पेट में हो गए49 बच्चे. जब दिति सो कर उठी तो देखा 49 लड़के इंद्र के साथ खड़े हैं. दिति बोली,अमां हमने मांगा था एक ठौ, ये पूरी फौज कैसे खड़ी हो गई? तब इंद्र को हुआ गिल्ट औरउन्होंने दिति को सॉरी कहा. दिति के 49 बेटे मरुद्गण कहलाए. (श्रीमद्भगवत महापुराण)