अबकी गाड़ी खरीदने जाएं, तो ये वाली रेटिंग जरूर चेक कर लीजिएगा
NCAP रेटिंग क्या होती है और क्यों इसे देखना जरूरी है.
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इस तरह NCAP टेस्ट किया जाता है.
क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में हर रोज़ करीब 400 लोगों की मौत सड़क हादसों में हो जाती है. सालभर में करीब डेढ़ लाख लोग सड़क दुर्घटनाओं का शिकार बनते हैं. साल 2017 में भारत में 1,47,913 लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई थी. इनमें से 26,869 लोग कार एक्सिडेंट में मारे गए थे. ये तो हुई आंकड़ों की बात, पर हम ये सब आपको क्यों बता रहे हैं? इसलिए कि जब आप गाड़ी खरीदने जाएं, तो एक खास चीज जरूर चेक करें. आप गाड़ी के एसी से लेकर स्पीकर तक चेक करके हैं, लेकिन क्या आप NCAP रेटिंग देखते हैं?
आप सोच रहे होंगे कि ये NCAP रेटिंग क्या है और भला हमारी गाड़ी का इससे क्या लेना-देना. यही बात हम आपको बताने जा रहे हैं.
स्टार रेटिंग में जीरो कौन
सबसे पहले आपको बता दें कि हाल ही में मारुति की एक कार, जिसको मिनी एसयूवी कहा जाता है- एस-प्रेसो, वो NCAP के क्रैश टेस्ट में फेल हो गई है. इस गाड़ी को जीरो रेटिंग मिली है. इसके अलावा हाल ही में मार्केट में आई और खासा धूम मचा रही गाड़ी आई-10 NIOS को केवल दो स्टार रेटिंग मिली है. किया सेल्टोस को तीन स्टार रेटिंग मिली है. हालांकि टाटा टिगोर ने 4 स्टार रेटिंग हासिल की थी.
हम आपको NCAP के क्रैश टेस्ट के बारे में बताएं, उससे पहले आप इस वीडियो को देखिए-
https://www.youtube.com/watch?v=neVAP1UCG0E&feature=youtu.be
देखा आपने, एक गाड़ी को क्रैश कर दिया गया. इस दौरान हर एंगल से उसके वीडियो को रिकॉर्ड किया गया. इस टेस्ट में बहुत सारे सेंसर भी इस्तेमाल किए गए. इस पूरी प्रक्रिया से ये पता चलता है कि गाड़ी दुर्घटना के दौरान, ड्राइवर और उसके साथ बैठे शख्स को बचा पाएगी या नहीं.
NCAP का मतलब होता है New Car Assessment Programme. इस प्रोग्राम के तहत गाड़ियों को 64 किलोमीटर प्रतिघंटे से रफ्तार से एक बैरियर से टकराया जाता है. गाड़ी के अंदर इंसान की डमी रखी होती है, जिसमें सेंसर लगे होते हैं. इससे ये पता किया जाता है कि एक्सिडेंट के दौरान इंसान को कितनी चोट लग सकती है. क्रैश टेस्ट को दो तरह से किया जाता है. सामने से और साइड से.
पहले टेस्ट में 64 की स्पीड वाला फॉर्मूला इस्तेमाल किया जाता है और बैरियर को सामने से आ रही कार समझा जाता है. दूसरे टेस्ट में 40 की रफ्तार में गाड़ी को साइड से टकरा दिया जाता है. इस हिट का इम्पैक्ट ड्राइवर वाली खिड़की पर किया जाता है. इस तरह ये देखा जाता है कि ड्राइवर, उसके साथ की सीट पर बैठा शख्स, पीछे बैठे लोग या बच्चे कितने सुरक्षित हैं.
पूरी दुनिया में कई तरह के कानून
दुनिया के कई देशों में गाड़ियों को लेकर कई तरह के कानून हैं. भारत में वैसे तो यूरोप के मॉडल को फॉलो किया जाता है. जैसे वहां इन दिनों यूरो-6 मानक चल रहे हैं, तो हमारे यहां भी बीएस-6 चल रहा है. लेकिन आप जानते हैं कि क्रैश टेस्ट के बुरे नतीजों वाली गाड़ियों को कंपनियां अगर यूरोप में बेचना चाहें, तो इन्हें वहां नहीं बेचा जा सकेगा. यही नहीं, अमेरिका में भी National Highway Traffic Safety Administration गाड़ियों में इंसानी सुरक्षा से जुड़े हर पहलू पर गौर करती है. कई बार कंपनियों को बड़ी संख्या में चीजों में सुधार भी करना होता है, तभी उसकी ब्रिक्री को मंजूरी दी जाती है. जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में भी इन रेटिंग्स पर खासा ध्यान दिया जाता है.
यही कारण है कि दुनिया के अधिकतर देशों में बंपर का इस्तेमाल करना बंद कर दिया गया है. बंपर के कारण गाड़ी में बैठे शख्स की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है, क्योंकि टक्कर होने पर एयरबैग्स का खुलना कठिन हो सकता है. हालांकि भारत में इन रेटिंग्स को उतनी गंभीरता से नहीं लिया जाता.
कीमत से भी जुड़ा है मामला
आपको ये बात भी समझनी होगी कि अगर गाड़ी के सुरक्षा मानक और पैमाने बढ़ा दिए जाएंगे, तो न केवल गाड़ी की कीमत काफी अधिक हो सकती है, बल्कि उसके एवरेज पर भी खासा असर हो सकता है. गाड़ी में एक एयरबैग हो कि दो, या फिर दो से अधिक. ये बात गाड़ी की कीमत पर असर डाल सकती है, वहीं अगर गाड़ी की चादरों को भारी किया जाएगा, तो एवरेज पर भी असर पड़ेगा. ऐसे में भारतीय लोग क्या महंगी गाड़ी खरीदना चाहेंगे?
आपको बता दें कि महिंद्रा एक्सयूवी 300 को NCAP ने 5 स्टार रेटिंग दी है. टाटा एल्टरोज़ को भी 5 स्टार रेटिंग मिली है. मारुति एरटिगा को 3 स्टार रेटिंग दी गई है, वहीं मारुति वेगनार को भी 2 स्टार रेटिंग मिली है. साल 2014 से लेकर अभी तक जो रेटिंग भारतीय गाड़ियों को दी गई है, उसकी लिस्ट आप globalncap.org/results पर देख सकते हैं.
https://twitter.com/GlobalNCAP/status/1319254600101351424
आखिर में हम तो आपको यही सलाह देंगे कि गाड़ी खरीदने से पहले उसकी NCAP रेटिंग जरूर देखें. साथ ही जब गाड़ी देखने जाएं, तो केवल एसी और स्पीकर न देखें, बल्कि गाड़ी के एयरबैग्स के बारे में भी जरूर जान लें, क्योंकि यहां सवाल आपके जीवन का है.

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