पड़ोसी. उस जीव का नाम है जिसे दूसरे के घर का सब पता होता है. मतलब क्या उसकीकमजोरी है और क्या अच्छाई. ये ही जीव उस घर की हर बात लीक करके सोसाइटी में लोगोंका चहीता बन जाता है. बस पता नहीं होता तो ये कि उसके खुद के घर में क्या हो रहाहै. अब लोगों को उस शख्स को नीचा दिखाना होता है तो वो भेदी पड़ोसी को तरजीह देतेहैं.पाकिस्तान में ये पड़ोसी आर्मी चीफ है और जिसके घर की बातें वो जानता है वो वहां काप्रधानमंत्री है. और पता नही होता तो बस ये कि उसकी आर्मी आतंक को सपोर्ट कर रहीहै. पाकिस्तान में आर्मी चीफ ऐसी दखलअंदाजी करता है कि वहां का प्राइम मिनिस्टर ऐसेडरा सहमा रहता है कि जैसे लड़की के बाप आज के दौर में भी उसकी ससुराल वालों से सहमेरहते हैं कि कहीं बात न बिगड़ जाए. और इस चक्कर में वो नाजायज फायदे उठा ले जातेहैं. मतलब तख्तापलट हो जाता है.इसी साल जुलाई में इस्लामाबाद, लाहौर, कराची और अन्य बड़े शहरों में आर्मी चीफराहिल शरीफ के पोस्टर लगाए गए थे. उन पोस्टरों में शरीफ से रिटायर होने की जगहमार्शल लॉ लागू करने की अपील की गई थी. यानी तख्तापलट के अंदेशे जाहिर होने लगे.पनामा पेपर लीक्स में करप्शन के इल्जाम लगने के बाद मीडिया को भी लगना लगा था किपाकिस्तान में तख्तापलट हो सकता है. पीएम नवाज शरीफ का इस पर यकीन करना कोई मुश्किलनहीं था, क्योंकि एक बार पहले ही वो साल 1999 में तख्तापलट के शिकार हो चुके हैं,जब परवेज मुशर्रफ को लगा कि नवाज शरीफ उन्हें आर्मी चीफ के पद से हटा सकते हैं तोउन्होंने तख्तापलट कर डाला था. रावलपिंडी में बिजली के पोल पर लगाए गए बैनरों में60 साल के राहिल शरीफ से 2018 का चुनाव लड़ने की अपील की गई. नौकरी से हटने के दोसाल बाद तक सरकारी अफसर पॉलिटिक्स में एंट्री नहीं कर सकते हैं. राहिल शरीफ को छूटदेने की बात कही गई. बैनरों के जरिए एक मैसेज देने की कोशिश की गई कि जनरल राहिलशरीफ सरकार और आर्मी के बीच तनाव खत्म कर देंगे. यानी आर्मी और सरकार अच्छे पड़ोसीबन जाएंगे. इन ख़बरों से नवाज की धड़कनें तेज हो गईं. कि कहीं कुछ गड़बड़ न हो जाए.राहिल शरीफ को पाकिस्तान में हीरो बनाया जाने लगा. पाकिस्तानी मीडिया भी गुणगानकरने लगा था.शरीफ परिवार की कुल संपत्ति चार हजार करोड़ रुपये है. मीडिया में सुर्खियां रहीं किनवाज ने गलत तरीके से ये रकम जुटाई थी. पाकिस्तान के कई बड़े शहरों में भीपाकिस्तानी प्रधानमंत्री की अवैध प्रॉपर्टी हैं. पनामा पेपर्स लीक में भी नवाज शरीफऔर उनकी फैमिली का नाम आया. बस फिर तो चारों तरफ से नवाज शरीफ को घेरा जाने लगा.पीटीआई के चीफ इमरान खान ने रैलियां करनी शुरू कर दीं. इस्तीफे की मांग होने लगी.इन सबसे बचने के लिए वो आर्मी राहिल शरीफ की शरण में आ गए. ताकि राष्ट्रभक्ति वालाकार्ड खेलकर खुद को बचा सकें. राहिल कुछ भी करते नवाज शरीफ उनकी हां में हां मिलादेते. इस वजह से कहा जाने लगा कि नवाज पाक आर्मी चीफ राहिल शरीफ की कठपुतली बन गएहैं. इसके पीछे उनका मकसद खुद को राष्ट्रवाद के फेवर में खड़ा करना था.पाकिस्तानी आर्मी चीफ राहिल शरीफ.राहिल शरीफ ने पाकिस्तानियों को खुश रखने वाले ऐसे काम किए कि लोगों के दिल में जगहबना बैठे. आतंक को पनाह देते रहे. उड़ी अटैक हुआ. और आतंकी पाकिस्तान में घुस गए.पाकिस्तान में कहीं आतंकी हमला हुआ तो राहिल खुद फ़ौरन उस जगह पहुंचे. लोगों कोकरप्शन से मुक्त होने के हवाब दिखाए. और फिर भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक कर दी. ऐसीसर्जिकल स्ट्राइक हुई कि उसने राहिल शरीफ के गुब्बारे में छेद कर दिया. हवा निकली.और जो लोगों पर उनका खुमार चढ़ा था. वो एक ही झटके में ख़त्म हो गया. पब्लिक को लगाराहिल शरीफ एक्शन लेंगे. मगर उनकी लीपा पोती ने उनकी इमेज को और धुंधला कर दिया.डॉन अख़बार के सायरिल अल्मिदा ने एक रिपोर्ट छापी कि इंटरनेशनल लेवल पर अलग थलग पड़नेपर पीएम नवाज शरीफ ने जनरल राहिल शरीफ को आतंक से निपटने की सख्त हिदायत की है. कहाहै कि वो आतंकी गुटों से सख्ती से निपटे. आतंक को लेकर पाकिस्तान को बदनामी कासामना करना पड़ रहा है. इसके बाद तो राहिल शरीफ का किला ढह गया. क्योंकि ये रिपोर्टये इशारा करने के लिए काफी थी कि वो आतंकी कैंपों को पनाह दे रहे हैं. खबर लीककरने के इल्जाम में सरकार ने इनफार्मेशन मिनिस्टर परवेज राशिद को पद से हटा दिया.विपक्ष ने कहा ये कैसे हो सकता कि उसका मंत्री कोई अहम जानकारी पीएम की मर्जी केबिना मीडिया को बताए. ये नवाज शरीफ की साजिश है.उर्दू मीडिया में ये बात चर्चा में रही कि ये खबर नवाज शरीफ ने खुद जान बूझकर लीककराई थी ताकि वो अपने रस्ते से राहिल शरीफ को हटा सकें. और अपने ऊपर लगे करप्शन केइल्जाम से लोगों का ध्यान भटका सकें. हुआ भी ऐसा. उनपर सर्जिकल स्ट्राइक काम कर गई.जहां नवाज शरीफ के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे थे. वहां सारा मूड राष्ट्रभक्ति में बदलगया. लोग पनामा पेपर्स को भूल गए. और ये भी भूल गए कि उन्होंने करोड़ों की मालियतकैसे जमा की है. अब ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक से नवाज कैसे अंदरखाने खुश न हो जिसनेकुर्सी को बचाने के लिए जड़ी बूटी का काम किया हो. ये दौर ऐसा चल रहा है जब कुछ कामन आए तो देशभक्ति का कार्ड काम आता है. इसी देश भक्ति के कार्ड से डोनल्ड ट्रंपअमेरिका की सत्ता पर काबिज हो गए. नवाज अपनी कुर्सी बचा ले गए. और बाकी देशों मेंभी ऐसा ही कुछ चल रहा है. मतलब देशभक्ति के शिगुफे के सामने सब भुला दी जाती हैं.या ये कहिये कि देशभक्ति का शिगुफा आपकी हर परेशानी को निगल जाता है और फिर सत्तामें रहते हुए खुल्ला मौज करो. कोई आह नहीं करेगा.अब तक तो ये अंदेशे जताए जा रहे थे कि जनरल राहिल शरीफ का टाइम बढ़ाया जा सकता है.लेकिन नवाज शरीफ अपने पैर पर कुल्हाड़ी कैसे मार सकते हैं. वो भी तब जब एक बारतख्तापलट का जायका चख चुके हों. अब राहिल शरीफ की विदाई मुलाकातें शुरू हो गई हैंतो ये तय है कि वो 28 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे. उनके इस तरह से जाने परपाकिस्तानी मीडिया को हैरानी है. क्योंकि जिस तरह से सत्ता संभालने के लिए पोस्टरलगे थे, उससे उम्मीद ही कुछ और थी.पढ़ लो पाकिस्तानी मीडिया क्या रिएक्शन दे रही हैद एक्सप्रेस ट्रिब्यून : आर्मी चीफ राहिल की विदाई हैरान करती हैआईएसपीआर के एक ट्वीट से इस बहस पर विराम लग गया. सेना और सरकार में लगाताररस्साकशी की वजह से रिटायरमेंट की खबरें पाक राजनीति का अहम मुद्दा बन गया. ऐसे देशमें जहां कई आर्मी चीफ या तो टेन्योर बढ़वाकर लंबे वक्त तक पद पर बने रहते हैं याफिर रातोंरात तख्तापलट कर देते हैं, वहां राहील शरीफ के रिटायरमेंट की बात हैरानकरने वाली नहीं है?द डॉन : दबाव के बावजूद अपना फैसला नहीं बदलाएक के बाद एक ऐसे मौके आए जब सरकार पर जनता ने दबाव बढ़ाया कि वह राहिल शरीफ से पदपर बने रहने का आग्रह करे. पर आखिर में सही चीज कायम रही और एक अच्छे अधिकारी को इसहफ्ते आधिकारिक विदाई दी जा सकेगी.द नेशन : उनके पास पद पर बने रहने के मौके थेये लोगों को चौंका रहा है. उनके पास पद पर बने रहने के कई मौके थे. कई लोग ऐसा कहभी रहे थे. पनामा पेपर्स में नवाज का नाम आने और भारत से तनाव बढ़ने के बाद उनकेपास मौका था.नवाज शरीफ छठी बार तय करेंगे कि कौन आर्मी चीफ होगा. इससे पहले वो 1991 में जनरलअसिफ जंजुआ, 1993 में जनरल वहीद काकर, 1998 में जरनल मुशर्रफ, 1999 में जियाउद्दीनबट और 2013 में जनरल राहिल को अप्वाइंट कर चुके हैं.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंनवाज शरीफ कश्मीर पर नसीहत दे रहे हैं, विडंबना ने सल्फास खा ली है‘प्यारे बुद्धिजीवियों, बुरहान वानी कश्मीर वाणी नहीं है’‘उस पार कब्र में लेटे एधी साहेब आतंकी बुरहान के जनाजे को देख उदास हुए होंगे’हिंदुओं के ऋषि, मुस्लिमों के पीर, आतंकियों ने मजार में आग लगा दी, जल गया कश्मीर