अपने सिर के ऊपर निकला टेटर (गुलुम) नजर नहीं आता. जैसे बीजेपी औरों को अच्छा-बुराखूब अच्छे से सिखाती है. मगर खुद की बारी आने पर सारे सबक भूल जाती है. जैसे, PMमोदी. जो कई बार विदेशों में घरेलू राजनीति करते दिखे हैं. और इस चक्कर में भारत कीखिल्ली उड़वा चुके हैं.--------------------------------------------------------------------------------कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी बहरीन गए. वहां रहने वाले भारतीयों को संबोधित करतेहुए उन्होंने भाषण दिया. कहा: इस वक्त भारत में नौकरी, स्वास्थ्य सुविधा और शिक्षाको लेकर बात नहीं हो रही है. बातें इस पर हो रही हैं कि आपको क्या खाना चाहिए,विरोध करने का अधिकार किसके पास है. बातें ये हो रही हैं कि आप क्या कह सकते हैं.या फिर, आप क्या नहीं कह सकते हैं. बीजेपी चिढ़ गई है. राहुल गांधी की आलोचना कररही है. बीजेपी का कहना है कि राहुल ने विदेशी जमीन पर भारत का अपमान किया. वहांजाकर राजनीति की. केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बड़ी सही बात की. कहा:जब हम विदेश जाते हैं, तो वहां पर हम अपने राजनैतिक विरोधों का जिक्र नहीं करते.राहुल गांधी ने बहरीन में जो कहा, उसे बीजेपी मुद्दा बना रही है. बीजेपी के नेताओंने कुछ सटीक बातें भी की हैं. मसलन रवि शंकर प्रसाद, जिन्होंने कहा कि विदेश मेंजाकर राजनीति नहीं करनी चाहिए. दिक्कत ये है कि ये पाठ सबसे पहले PM मोदी को दियाजाना चाहिए.रवि शंकर प्रसाद एकदम सही बात कर रहे हैं. राजनीति और नेतागिरी देश के अंदर होनीचाहिए. बाहर जाकर आपको देश के बारे में अच्छी बातें बोलनी चाहिए. पॉजिटिव बातें. नकि वहां विपक्षी पार्टियों और उनके नेताओं पर कीचड़ उछालना चाहिए. बस एक दिक्कत हैयहां पर. औरों पर उंगली उठाने वाली बीजेपी को अपना मैला गिरेबां नहीं दिख रहा. रविशंकर प्रसाद ने जो कहा, वो बातें राहुल से ज्यादा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी परलागू होती हैं. क्योंकि मोदी जी देश के सबसे ताकतवर संवैधानिक पद पर हैं. राहुल देशकी सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष हैं, मगर संवैधानिक पद नहीं है उनके पास. इसलिहाज से PM मोदी का रवैया ज्यादा मायने रखता है. PM कई बार विदेशों में जाकर नेताप्रतिपक्ष जैसे मिजाज का बयान दे चुके हैं. विपक्ष पर चुटकी ले चुके हैं. विपक्षीपार्टियों पर कीचड़ उछालने के चक्कर में पूरे देश की फजीहत करवा चुके हैं. कुछ बयानपेश-ए-खिदमत हैं. पहले इनको पढ़िए: एक समय था जब लोग कहते थे कि मालूम नहीं पिछलेजन्म में हमने क्या पाप किए कि हिंदुस्तान में जन्म लेना पड़ा. ये कोई देश है? येकोई सरकार है? ये कोई लोग हैं? लोगों को हिंदुस्तानी कहलाने में शर्म आती थी.(शंघाई, चीन)मेरे प्रधानमंत्री बनने से पहले भारत की पहचान 'स्कैम इंडिया' की थी. मुझे जोविरासत मिली, उसमें गंदगी और भ्रष्टाचार भरा था. (कनाडा)मुझे विरासत में कई दिक्कतें मिलीं. मुझसे पहले की सरकारों की सुस्ती के कारण कईकाम रुके पड़े थे. उन्हें शुरू करना अब मेरी वरीयता है. (अबू धाबी, संयुक्त अरबअमीरात)जिनको गंदगी करनी थी, वो गंदगी करके चले गए. पर हम सफाई करेंगे. (टोरंटो, कनाडा)विदेशी दौरों में विपक्षी दलों से कुश्ती करने का क्या तुक? ये प्रधानमंत्रीनरेंद्र मोदी के दिए बयान हैं. वो पंक्तियां, जो उन्होंने अपने विदेशी दौरे केदौरान दिए गए भाषणों में बोलीं. अगर ये न बताया जाए कि ये बातें कहां कही गईं औरइन्हें बोलने वाले शख्स का पद क्या है, तो लगेगा किसी नेता ने अपनी चुनावी रैली मेंबोला होगा. खार खाकर, खुन्नस निकालने के लिए. मोदी ने इस अंदाज में बातें कहीं,मानो उनसे पहले भारत की कोई इज्जत ही नहीं थी. कि उनके PM बनने से पहले भारत मेंपैदा होने वाले लोग अपनी किस्मत को रोते थे. अपनी अहमियत साबित करने का ये तरीकाबड़ा वाहियात था उनका. देश के मुखिया का विदेशी जमीन पर, अपने आधिकारिक दौरों केदौरान, इस तरह घरेलू राजनीति को उठाना और अपनी पीठ खुद थपथपाना बड़ी आपत्तिजनक बातहै. एक प्रधानमंत्री के तौर पर ये उनकी नाकामी है. कि अपनी काबिलियत साबित करने केलिए उनको विदेशों में भी 'विपक्ष की नाकामयाबी' का रोना रोना पड़ता है.Born in England, choose to carry an Indian passport & no Mr PM I've never beenembarrassed to show my passport anywhere, ever.— Omar Abdullah (@OmarAbdullah) May 19, 2015विदेशी दौरे पर गया PM पूरे देश का प्रतिनिधि होता है मोदी जी के इन भाषणों मेंउनकी राजनैतिक अपरिपक्वता नजर आती है. ये बातें किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के नेता कोकतई शोभा नहीं देतीं. PM होते हुए जब आप विदेशी दौरे पर जाते हैं, तो भारत केप्रधानमंत्री की हैसियत से जाते हैं. आप वहां अपने देश की, अपने नागरिकों कीनुमाइंदगी करते हैं. वहां कोई पक्ष-विपक्ष नहीं होता. वहां कोई पार्टी नहीं होती.वहां कोई चुनाव नहीं लड़ना होता कि पॉलिटिक्स बतयाई जाए. विदेशी दौरों पर जाने केपीछे कुछ खास मकसद होते हैं. मसलन- रक्षा समझौते, आर्थिक-व्यापारिक संधियां, सामरिकसमझौता, आर्थिक निवेश वगैरह, मेजबान देश के साथ रिश्ते मजबूत करना वगैरह. PM काध्यान इन बातों पर होना चाहिए.Respected PM, when you are on a foreign tour, do remember that you arerepresenting a nation, not your political party. #ModiInsultsindia— ㅤㅤㅤ (@manas_ndtv) May 19, 2015मोदी ने शंघाई में कहा था कि उनके प्रधानमंत्री बनने से पहले भारत में पैदा होनाशर्म की बात थी. इसके बाद ट्विटर पर #ModiInsultsIndia हैशटैग खूब चला था. देश केमुखिया को कहीं और जाकर ऐसी बात तो नहीं ही बोलनी चाहिए.राहुल को नसीहत देने वाली बीजेपी थोड़ी नसीहत PM को भी दे दे आज का जो दौर है,उसमें प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति विदेश जाकर अपने देश की अच्छी बातें बेचते हैं. ताकिमुनाफा हो. निवेशक आकर्षित हों. दुनिया में छवि बेहतर हो. इन विदेशी दौरों पर PM काकाम किसी सेल्समैन जैसा होता है. वो सेल्समैन जो ग्राहकों को अपना अच्छा प्रॉडक्टबेचता है. उसकी कमियां नहीं उधेड़ता. ऐसे में अगर PM मोदी अपने विदेशी दौरों परइतने कच्चे बयान देकर ताली बटोरें, तो उनकी घनघोर आलोचना होनी चाहिए. और BJP को इसबात का इल्म होना चाहिए. नेता एक-दूसरे को मूर्ख समझें, तो उनकी इच्छा. मगर जनता कोमूर्ख न समझें. लोगों को आगा-पीछा सब याद रहता है. बीजेपी राहुल गांधी को जिससमझदारी और बड़प्पन की नसीहत दे रही है, वो ही नसीहत उसे PM मोदी पर भी खर्चनीचाहिए. और बात रही मोदी जी की, तो उन्हें ओबामा, शिंजो आबे और जस्टिन ट्रूडो जैसेविदेशी राष्ट्राध्यक्षों से सीखना चाहिए. कि देश के मुखिया को किस तरह काबर्ताव करना चाहिए.--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें: नरेंद्र मोदी की लाइफ की पूरी कहानी और उनकी वो विशेषताएं जो नहीं पढ़ी होंगीजब 'टेक्निकल वजह' से पीएम मोदी का धनुष नहीं चल पायावो 9 लोग जो पिछले तीन साल से पीएम मोदी के सारे काम देख रहे हैंराहुल गांधी ने इस लड़की के साथ फोटो खिंचाकर बहुत हिम्मत का काम किया हैराहुल गांधी ने आज मंच पर जो किया, वो कोई और नेता करने की सोच भी नहीं सकता--------------------------------------------------------------------------------नरेंद्र मोदी की लाइफ की पूरी कहानी और उनकी वो विशेषताएं जो पहले नहीं सुनी होंगी