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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किससे और क्यों छीना मंत्रालय

नरेंद्र मोदी कैबिनेट में कल बड़ा फेरबदल होने जा रहा है.

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3 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 3 सितंबर 2017, 08:10 AM IST)
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क्या तुम्हें भी मंत्री बनना है?
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रविवार सुबह 10 बजे नरेंद्र मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल होने जा रहा है. 13 मार्च 2017 को जब मनोहर पर्रिकर रक्षामंत्री पद से इस्तीफा देकर गोवा के CM बने थे, तब से ही माना जा रहा था कि मोदी कैबिनेट में फेरबदल होगा. पर्रिकर के जाने के बाद से ही वित्तमंत्री अरुण जेटली रक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं. 31 अगस्त की शाम कैबिनेट के कई मंत्रियों द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद ही फेरबदल के संकेत मिल गए थे.
narendra modi amit shah

ये है मोदी मंत्रिमंडल के आंकड़े

24 कैबिनेट मंत्री हैं
12 राज्यमंंत्री (स्वतंंत्र प्रभार)
36 राज्यमंत्री
72 कुल मंंत्री

अब आगे क्या हो सकता है

रविवार को जो फेरबदल होने जा रहा है, उसमें अनुमान लगाया जा रहा है कि मंंत्रियों की संख्या 72 से बढ़कर 81 हो जाएगी. इसकी वजह ये है कि नीतीश कुमार के नेतृत्व वाला JD (U) धड़ा NDA में शामिल हो गया है. इसके भी कुछ नेताओं के मंत्रिमंडल में शामिल होने की उम्मीद थी. हालांकि JD (U) सूत्रों का कहना है कि पार्टी को फिलहाल इसके बारे में कुछ भी नहीं बताया गया है. इसके अलावा AIADMK के भी कुछ नेता कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं. इससे पहले जुलाई 2016 में कैबिनेट में फेरबदल हुआ था, जिसमें 19 नए चेहरों को जगह दी गई थी.

कुछ इस्तीफे हो चुके हैं और कुछ की चर्चा है

ऐसे निकाल दिया
ऐसे निकाल दिया

31 अगस्त को शाह से मुलाकात के बाद जिन मंत्रियों के इस्तीफे की खबर है, उनमें उमा भारती, राजीव प्रताप रूडी, कलराज मिश्र, संजीव बालियान, फग्गन सिंह कुलस्ते और बंडारू दत्तात्रेय हैं. इसके अलावा निर्मला सीतारमण, गिरिराज सिंह, राधा मोहन सिंह, कृष्णा राज और विजय सांपला के भी इस्तीफा देने की चर्चा जोरों पर है.  इनमें से कुछ को पार्टी और संगठन की जिम्मेदारियां दी जा सकती हैं. वहीं कुछ मंत्रियों को कोई अन्य प्रोफाइल देकर वापस कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है. चूंकि कैबिनेट का विस्तार भी होना है, ऐसे में लग रहा है कि मोदी सरकार कुछ नए चेहरों को भी मौका दे सकती है. साथ ही, हिमाचल प्रदेश, गुजरात और कर्नाटक में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण वहां के कुछ चेहरों को भी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है.

भ्रष्टाचार की वजह से गई एक मंत्री की कुर्सी

'आज तक' को मिली एक्सक्लूसिव जानकारी के मुताबिक मोदी सरकार के एक मंत्री की छुट्टी इसलिए की गई है, क्योंकि वो आर्थिक अनियमितता में शामिल थे. ये मंत्री खुफिया एजेंसियों की रडार पर थे और उनका फोन भी टैप हो रहा था. सूत्रों से पता चला है कि कथित मंत्री का नाम हाल ही में हुए हाई प्रोफाइल छापेमारी में पकड़े गए चार आरोपियों ने लिया. इन आरोपियों की मंत्री के साथ सौदेबाजी पर बात हो रही थी. इस मामले से जुड़ी पूरी फाइल प्रधानमंत्री कार्यालय के पास है और मंत्री को इस्तीफा देने का निर्देश दिया गया.

फेरबदल की वजहें और भी हैं

1.मनोहर पर्रिकर गोवा के मुख्यमंत्री बन गए हैं, वेंकैया नायडू उपराष्ट्रपति हैं और अनिल माधव दवे का निधन हो गया है. ऐसे में मंत्रिमंडल में पहले से ही तीन सीटें खाली हैं.
2. 2019 के लोकसभा चुनाव में अब 2 साल से भी कम का वक्त बचा है. जाहिर है कि अब मोदी सरकार अपने मंत्रिमंडल में बेहतर रिजल्ट देने वाले चेहरों को शामिल करने की सोच रही होगी. इसके अलावा, जातीय और प्रादेशिक समीकरणों का भी ध्यान रखा जाएगा.
3. 31 अगस्त को ही जेटली ने संकेत दे दिए थे कि वो लंबे समय तक रक्षा मंत्रालय नहीं संभालेंगे. उन्हें गुजरात विधानसभा चुनाव का प्रभारी भी बनाया गया है.
4. लगातार हो रही रेल दुर्घटनाओं के बीच रेलवे मिनिस्टर सुरेश प्रभु ने भी इस्तीफा देने की पेशकश की थी. प्रभु ने कहा था कि PM मोदी ने उन्हें अभी इंतजार करने को कहा है. अनुमान है कि प्रभु से रेल मंत्रालय वापस लेकर उन्हें पर्यावरण मंत्रालय दिया जा सकता है.

कई मंत्री कर रहे हैं '13 खाना रिंच' का काम

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जेटली के अलावा 3 अन्य केंद्रीय मंत्रियों के पास भी अतिरिक्त मंत्रालयों का प्रभार है. कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार संभाल रही हैं. ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र तोमर के पास शहरी विकास मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है. उपराष्ट्रपति चुनाव का नामांकन दाखिल करने से पहले वेंकैया नायडू द्वारा इस्तीफा दिए जाने के बाद ये पद खाली हो गया था. इसी साल मई में अनिल दवे के निधन के बाद विज्ञान एवं तकनीक मंत्री हर्ष वर्धन को पर्यावरण मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंप दी गई.

जानें, किस-किस की हुई छुट्टी

1. राजीव प्रताप रूडी
देखते हैं, अब क्या उड़ाने को मिलता है राजीव प्रताप रूडी को
देखते हैं, अब क्या उड़ाने को मिलता है राजीव प्रताप रूडी को

सांसद: सारण, बिहार मंत्रालय: राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय चर्चा में:  प्रशिक्षित पायलट भी हैं लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रेकॉर्ड्स में नाम है क्यों बाहर गए:  'मेक इन इंडिया' अभियान में परफॉर्मेंस दमदार नहीं रही आगे क्या:  बिहार का उपमुख्यमंत्री बनाया जा सकता है
2. उमा भारती
उमा भारती स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देना चाहती थीं.
उमा भारती स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देना चाहती थीं.

सांसद: झांसी, उत्तर प्रदेश मंत्रालय: जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री चर्चा में:  रामजन्मभूमि आंदोलन से जुड़ी थीं बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में आरोपी हैं 2004 में आडवाणी के साथ झड़प के बाद पार्टी से निलंबित पार्टी से निकाले जाने पर 'भारतीय जनशक्ति पार्टी' नाम से अलग दल बनाया मध्य प्रदेश के CM शिवराज सिंह चौहान की धुर विरोधी क्यों बाहर गईं: उमा भारती ने कुछ समय पहले स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा देने की पेशकश की थी
3. कलराज मिश्र
यूपी इलेक्शन में कहा गया कि एक रैली में कलराज मिश्र ने केशव प्रसाद मौर्या का हाथ झटक दिया, बाद में कहा गया कि उनके उस कंथे में दिक्कत है.
यूपी इलेक्शन में कहा गया कि एक रैली में कलराज ने केशव मौर्य का हाथ झटक दिया, बाद में कहा गया कि उनके कंधे में दिक्कत है.

सांसद: देवरिया, उत्तर प्रदेश मंत्रालय: सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री चर्चा में: उत्तर प्रदेश में BJP के ब्राह्मण नेताओं में से एक क्यों बाहर गए: 75 साल के हो चुके हैं
4. फग्गन सिंह कुलस्ते
टोपी लगाए सज्जन ही हैं फग्गन सिंह कुलस्ते
लाल घेरा जिनकी टोपी पर से जा रहा है, वही फग्गन सिंह कुलस्ते हैं

सांसद: मंडला, मध्य प्रदेश मंत्रालय: राज्यमंत्री, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय चर्चा में: सादगी और अनुशासन पसंद मध्य प्रदेश के आदिवासी नेता, 230 सीटों की विधानसभा में 47 सीटें अनुसूचित जनजाति (ST) के लिए आरक्षित हैं, 2011 की जनगणना के मुताबिक, MP की कुल आबादी के 21.1 फीसद हैं ST मनमोहन सिंह सरकार पर 'कैश फॉर वोट' का आरोप लगाया. साथ दिया अशोक अरगल और महावीर भागोरा ने. 22 जुलाई 2008 को लोकसभा में विश्वास मत पर हुआ था मतदान अमेरिका के साथ न्यूक्लियर डील पर नाराज लेफ्ट ने UPA से समर्थन वापस लिया था क्यों बाहर गए: 2018 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों को देखते हुए.
5. निर्मला सीतारमण
संबित से कोई साम्य नहीं
संबित से कोई साम्य नहीं

सांसद: कर्नाटक से राज्यसभा सांसद मंत्रालय: राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय चर्चा में: BJP की राष्ट्रीय प्रवक्ता रहीं बहस में भी शालीनता बनाकर रखती हैं तमिलनाडु में पैदा हुईं, आंध्र प्रदेश में शादी हुई, कर्नाटक से चुनकर राज्यसभा गईं ससुराल वाले कांग्रेस से जुड़े थे, लेकिन खुद BJP जॉइन किया क्यों बाहर गईं: कई राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के कारण फिर प्रवक्ता बनाई जा सकती हैं
6. संजीव बालियान
संभल में भी संभल के न बोल पाए संजीव बालियान
संभल में भी संभल के न बोल पाए संजीव बालियान

सांसद: मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश मंत्रालय: राज्यमंत्री, ऐग्रीकल्चर ऐंड फूड प्रोसेसिंग मिनिस्ट्री चर्चा में:  2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के साथ जुड़ा है नाम UP पुलिस ने सांप्रदायिक सद्भाव बिगाड़ने का आरोप लगाया था जिस महापंचायत ने माहौल बिगाड़ा, उसमें भी शामिल थे मुजफ्फरनगर के दंगा प्रभावित इलाकों में ध्रुवीकरण के बल पर फायदा उठाने का भी आरोप हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय से PhD, असिस्टेंट प्रफेसर भी रह चुके हैं क्यों बाहर गए: 2019 के चुनाव को देखते हुए बालियान को BJP की राष्ट्रीय टीम में लाया जा सकता है
7. गिरिराज सिंह
सोनिया गांधी पर टिप्पणी के बाद गिरिराज सिंह 21 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री से मिले और टीवी स्क्रीन पर ये दिखा.
सोनिया गांधी पर टिप्पणी के बाद गिरिराज सिंह 21 अप्रैल, 2015 को प्रधानमंत्री से मिले और टीवी स्क्रीन पर ये दिखा.

सांसद: नवादा, बिहार मंत्रालय: राज्यमंत्री, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्रालय चर्चा में: विवादित और आपत्तिजनक बयान देने में माहिर सोनिया गांधी को कहा था, "राजीव गांधी 'गोरी चमड़ी' वाली सोनिया की जगह किसी नाइजीरियन से शादी करते तो भी क्या कांग्रेस                  उसको अपना नेता चुनती'' 'बीफ खाने वाले 10 में से 9 लोग IIT के होते हैं' सारे आतंकवादी एक ही समुदाय से ताल्लुक क्यों रखते हैं' 'नोटबंदी के बाद देश को नसबंदी के लिए कानून बनाने की सख्त जरूरत' 'जो नरेंद्र मोदी का विरोध करते हैं, वे पाकिस्तान चले जाएं' 'मुस्लिमों की आबादी इतनी बढ़ गई है कि उनका अल्पसंख्यक दर्जा बदलने के लिए नए कानून की जरूरत है' क्यों बाहर गए: विवादित बयानों पर पार्टी कमान कई बार दे चुका था चेतावनी
8. महेंद्र नाथ पाण्डेय
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सांसद: चंदौली, उत्तर प्रदेश मंत्रालय: राज्यमंत्री, मानव संसाधन विकास मंत्रालय चर्चा में:  उत्तर प्रदेश में BJP के प्रमुख ब्राह्मण नेताओं में से एक हैं काफी लंबे समय से संघ के साथ जुड़े हैं ABVP के साथ छात्र राजनीति भी कर चुके हैं बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ के महामंत्री रहे राम जन्मभूमि आंदोलन में हिस्सा लिया, जेल भी गए 1991 में गाजीपुर की सैदपुर सीट से पहली बार विधायक बने क्यों बाहर गए: उत्तर प्रदेश BJP का अध्यक्ष बना दिया गया है
9. कृष्णा राज
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सांसद: शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश मंत्रालय: राज्यमंत्री, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय चर्चा में:  उत्तर प्रदेश के दलित समाज की महिला नेता हैं पासी समुदाय से आती हैं | UP की कुल आबादी में दलितों की हिस्सेदारी करीब 21.2 फीसद है उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में दलित वोट बैंक को रिझाने के लिए कैबिनेट में शामिल किया गया था संघ के साथ करीबी रिश्ते हैं 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में मोहम्मदी सीट से जीत हासिल की थी 2014 लोकसभा चुनाव में फूलन देवी के पति और BSP नेता उमेद सिंह कश्यप को 2 लाख 35 हजार वोटों से हराया था UP के पूर्व CM और वरिष्ठ नेता कल्याण सिंह की करीबी मानी जाती हैं राजनीति में आने वाली अपने परिवार की इकलौती सदस्य समाजसेविका रह चुकी हैं क्यों बाहर गईं: UP चुनाव खत्म हो चुका है. कृष्णा राज को केंद्र से वापस उनके गृह राज्य भेजा जा सकता है
10. विजय सांपला
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सांसद: होशियारपुर, पंजाब मंत्रालय: राज्यमंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय चर्चा में: पंजाब के दलित नेता. वहां दलितों के पास लगभग 38 फीसद वोट हैं गरीब परिवार से आते हैं पहले मजदूरी की, फिर सीमेंट की अपनी दुकान शुरू की संघ से जुड़े, फिर 1988 में BJP जॉइन किया 2003 के तल्हान गुरुद्वारा कांड में उनका नाम सुर्खियों में आया एक दलित की हत्या के बाद हुई हिंसा के बीच सांपला ने निभाई प्रभावी भूमिका 2014 में पहली बार मिला लोकसभा चुनाव का टिकट पहली बार सांसद चुने जाने पर ही मिल गई कैबिनेट में जगह क्यों बाहर गए: पंजाब चुनाव खत्म होने के बाद सांपला की दलित नेता की छवि भुनाने का काम फिलहाल खत्म हो गया है
11. बंडारू दत्तात्रेय
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सांसद: सिकंदराबाद, हैदराबाद मंत्रालय: श्रम एवं रोजगार मंत्री चर्चा में: तेलंगाना में जनता के बीच लोकप्रिय नेता और संगठन को मजबूत करने वाले व्यक्ति के तौर पर देखा जाता है पिछड़े कुर्मा समुदाय से ताल्लुक रखते हैं 1998-2004 के दौरान एनडीए सरकार में अर्बन डिवेलपमेंट और रेलवे मंत्री रह चुके हैं बंडारू 1989 तक आरएसएस के प्रचारक रहे थे और इसके बाद उन्होंने विवाहित जीवन बिताने का फैसला किया था इमर्जेंसी के बाद 1977 में आंध्र प्रदेश के गोदावरी में आए चक्रवाती तूफान के बाद पुनर्वास कार्य में उनकी मेहनत की प्रशंसा हुई थी क्यों बाहर गए: रोजगार के मामले में मोदी सरकार कुछ खास नहीं कर पाई है, जिसपर विपक्ष लगातार सवालिया निशान खड़े कर रहा है.

क्या हो सकते हैं बड़े बदलाव

नजरिए का अंतर है: जिन्हें ये ज़ीरो दिखाई दे रहा है, वो जाएंगे, जिन्हें ये लल्लनटॉप लग रहा है, उनका प्रमोशन होगा.
नजरिए का अंतर है: जिन्हें ये ज़ीरो दिखाई दे रहा है, वो जाएंगे, जिन्हें ये लल्लनटॉप लग रहा है, उनका प्रमोशन होगा.

बड़े बदलावों के तहत राजीव प्रताप रूडी को वापस उनके गृह राज्य बिहार भेजा जा सकता है. खबर तो यह भी है कि रूडी को बिहार का उपमुख्यमंत्री पद मिल सकता है. नीतीश और लालू के गठबंधन को तोड़कर बिहार में BJP की वापसी में अहम भूमिका निभाने वाले सुशील कुमार मोदी को प्रमोशन मिलने का अनुमान जताया जा रहा है. कैबिनेट में फेरबदल का पहला मजबूत संकेत तभी मिल गया था, जब  31 अगस्त की दोपहर में अमित शाह ने महेंद्र नाथ पाण्डेय को उत्तर प्रदेश BJP का प्रमुख बना दिया. पाण्डेय इससे पहले मानव संसाधन विकास मंत्रालय (HRD) में राज्य मंत्री थे. अच्छा प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों- मसलन, बिजली मंत्री पीयूष गोयल और पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को प्रमोशन दिया जा सकता है. मनोज सिन्हा और जितेंद्र सिंह को भी बड़ी प्रोफाइल दिए जाने की चर्चा है. इसके अलावा BJP हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनावों से जुड़ी बड़ी घोषणा भी कर सकती है. जेपी नड्डा को हिमाचल में BJP का मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित किए जाने की भी खबरें हैं. पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को उनकी जगह केंद्रीय कैबिनेट में जगह मिल सकती है.


वीडियो में जानिए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के परिवार के लोग क्या करते हैं:

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