सोहराबुद्दीन केस में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया कि सोहराबुद्दीन के बैकग्राउंड केआधार पर उसकी मौत को दरकिनार नहीं किया जा सकता. तो गुजरात में जांच शुरू हुई.क्रिमिनल इंवेस्टीगेशन डिपार्टमेंट की आईजी गीता जौहरी को कमान सौंपी गई. उन्होंनेवी एस सोलंकी की अगुवाई में एक टीम बनाई. टीम की रिपोर्ट में कई चौंकाने वाली बातेंआ रही थीं. एक मीडिया कांफ्रेंस में सोलंकी के ही एक स्टेटमेंट के मुताबिक अमित शाहने गीता जौहरी, सोलंकी और जी सी रायगर को बुलाया और इनवेस्टिगेशन को बदलने को कहा.इनमें से कोई मंत्री की बात मानने को तैयार नहीं था. गीता जौहरी को हटाकर रजनीश रायको लाया गया. पर उन्होंने भी बात मानने से इंकार कर दिया. अमित शाह समेत कई लोगोंको इस्तीफा देना पड़ा. सवाल ये है कि कौन सा डॉक्टर अपना ऑपरेशन खुद करता है? औरजिसका ऑपरेशन होना चाहिए, अगर वही डॉक्टर को निर्देश देने लगे तो क्या होगा? खबर आईकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को भाजपा के निर्वाचित प्रतिनिधियों(सांसद-विधायक) से कहा है कि 8 नवंबर से लेकर 31 दिसंबर तक के अपने बैंकट्रांजैक्शन डिटेल्स 1 जनवरी 2017 को पार्टी चीफ अमित शाह को सौंप दें. 8 नवंबर को500 और 1000 के नोट बैन हुए थे. और 31 दिसंबर उनको जमा करने की आखिरी डेट है.प्रधानमंत्री ने जोर देकर दो बार रोकर कहा कि ये देश हित में लिया गया फैसला है.इससे काला धन सामने आएगा. अपराधी पकड़े जाएंगे. जनता को थोड़ी दिक्कत है. सह लें.विपक्ष ने पार्लियामेंट और सड़कों पर काफी हंगामा किया क्योंकि जनता को कैश मिलनेमें समस्या लगातार आ रही है. ये भी कहा जा रहा है कि सरकार के फैसले का पता बड़ेलोगों को पहले ही लग चुका था. कोई भी बड़ा आदमी नोट बदलवाने की समस्या से नहीं जूझरहा है. आम लोग ही इस मुसीबत का सामना कर रहे हैं. पर सरकार ने इन बातों को नहींमाना है. ठीक है. पर अमित शाह ही पार्टी के लोगों की जांच क्यों करेंगे? क्यापार्टी के लोगों के लिये इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के लोग जांच नहीं करेंगे? या अमितशाह इनकम टैक्स वालों की मदद कर रहे हैं कुछ काम अपने हाथ में लेकर? ये पूरी सूचनाजनता के ही सामने क्यों नहीं डाल दी जा रही है? पॉलिटिकल पार्टियां खुद को आरटीआईसे अलग क्यों रख रही हैं? एक डेटा जर्नलिज्म वेबसाइट है, 'फैक्टली', जिसके मुताबिकभाजपा के पास सबसे ज्यादा अनएकाउंटेड पैसा है. मतलब नहीं पता कि ये पैसा कहां सेआया है, किसने दिया है. इनके ठीक बाद कांग्रेस का नंबर है. अगर कोई 20 हजार रुपयेसे कम का डोनेशन देता है तो अभी तक यही नियम है कि उसका नाम किसी को बताया नहींजायेगा. ये किसी से छुपा नहीं है कि 20 करोड़ का भी डोनेशन 20 हजार में तोड़ करकैसे दिया जा सकता है. इसके अलावा पॉलिटिकल पार्टियों को इनकम टैक्स रिटर्न भी नहींभरना पड़ता. पार्टियों का 75 प्रतिशत डोनेशन का कोई रिकॉर्ड नहीं है. इनको जमीन भीसस्ती दरों पर मिल जाती है. अभी हाल में ही बिहार भाजपा पर ढेर सारी जमीनें खरीदनेका आरोप लगा है. ये आम लोगों के ठीक उलटा है. हर इंसान को अपनी सारी इनकम और सोर्सबताना होता है. पर लोगों के प्रतिनिधियों के संगठन को इससे पूरी छूट है. आप आरटीआईभी नहीं लगा सकते. पर क्यों? अगर ये अपना सारा डेटा साइट पर डाल दें तो लोग आरटीआईभी नहीं लगायेंगे. Association for Democratic Reforms नाम के एनजीओ ने सुप्रीमकोर्ट में याचिका डाली थी. तो सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्यों आरटीआई ना लगाईजाए पार्टियों पर. इसका गोल-मोल जवाब दे दिया गया. ये किसी से छुपा नहीं कि किस तरहराजनीति और कॉरपोरेट का गठजोड़ देश को कमजोर बनाते चला जा रहा है. दोनों एक-दूसरेको फायदा पहुंचाने की जुगत में आम इंसान से उसका सवाल पूछने का भी अधिकार छीन रहेहैं. ऐसे में प्रधानमंत्री ने संविधान और संस्थान के इतर पार्टी चीफ अमित शाह को हीअपना नया शाहकार बना के पेश किया है. इसके समर्थन में ये कहा जा सकता है कि येबिल्कुल ठीक है कि पार्टी में ही पहले जांच हो रही है. पर नोटबंदी और इनकम टैक्सडिपार्टमेंट के दावों के मुताबिक सब पर नजर रखी जा रही है. ऐसे में क्या भाजपा केनेताओं पर नजर नहीं रखी जा रही? या फिर अमित शाह की नजर ज्यादा तेज है? ये किस तरहकी हायरार्की है, ये किस तरह का फिल्टर है? सीधे नेताओं से उनके ट्रांजैक्शनसार्वजनिक करने को क्यों नहीं कहा जाता? पर ऐसा नहीं होगा. क्योंकि 2013 में जबपॉलिटिकल पार्टियों पर आरटीआई लगाने की बात हुई थी तब सबने अपनी शत्रुता भुलाकर एकसुर से इसका विरोध किया. उस वक्त सब भाई-बहन लग रहे थे. लगा ही नहीं था कि ये लोगएक-दूसरे को हमेशा नीचा दिखाते रहते हैं. अगर ब्लैक मनी के चक्र को तोड़ना है तोपहला कदम खुद ही उठाना होगा. इसके लिये जरूरी है कि सामाजिक और संवैधानिक संस्थानोंकी अहमियत देखी जाए. इसे व्यक्तिवादी ना बनाया जाए.--------------------------------------------------------------------------------कौन है जो अरविंद केजरीवाल को रेप में फंसाने की कोशिश कर रहा है?पाकिस्तान पर भारत हमला क्यों नहीं करता, वजह ये है