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पहले दही, फिर दूध, अब दक्षिण भारत में घी और लड्डू पर क्या विवाद शुरू हुआ? एक क्लिक में सब समझिये

कर्नाटक में घी पर घमासान. कांग्रेस-भाजपा आपने सामने, बीच में तिरुपति के लड्डू.

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4 अगस्त 2023 (अपडेटेड: 7 अगस्त 2023, 10:13 AM IST)
tirupati prasad row
तस्वीर: इंडिया टूडे
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राजनीति में "तेल देखो तेल की धार देखो" मुहावरा खूब चलता है, लेकिन कर्नाटक में "घी देखो घी की धार देखो" चल रहा है. तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) में प्रसाद के लड्डुओं के लिए कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) की कंपनी नंदिनी घी की आपूर्ति अब नहीं करेगी. इस मुद्दे पर विवाद और बयानबाजी शुरु हो गई है. फैसले के पीछे राजनीतिक वजह तलाशी जा रही है. आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल निकला है. क्या है तिरुपति के लड्डुओं और नंदिनी घी का पूरा विवाद. आइए समझते हैं.

विवाद में किसने क्या कहा?

बीते रविवार 30 जुलाई को KMF के अध्यक्ष भीमा नाइक ने बताया, ‘TTD ट्रस्ट ने घी का टेंडर किसी और कंपनी को दे दिया है. KMF ने इस बार टेंडर प्रक्रिया में भाग नहीं लिया था. हमनें 27 जुलाई को नंदिनी के उत्पादों का दाम बढ़ाने का फैसला किया था. 1 अगस्त से घी के भी दाम बढ़ने थे. कंपनी पुरानी कीमत पर घी की आपूर्ति नहीं कर सकती. पैसों के चलते हम अपनी गुणवत्ता से समझौता नहीं करना चाहते. ऐसा करने से घाटा होगा.’

उन्होंने आगे कहा कि कोई भी कंपनी नंदिनी घी की गुणवत्ता की बराबरी नहीं कर सकती. तिरुपति के लड्डुओं में नंदिनी घी का ही इस्तेमाल होता था, उसके स्वाद में हमारी गुणवत्ता भी एक वजह है. हम हमारे ग्राहकों के द्वारा शत प्रतिशत सर्टिफाइड हैं.

नाइक का बयान आने के बाद श्री वेंकटेश्वर मंदिर के आधिकारिक संरक्षक और TTD के कार्यकारी अधिकारी धर्मा रेड्डी का बयान आया. उन्होंने बताया कि पिछले 20 सालों में KMF ने केवल एक साल नंदिनी घी सप्लाई की है. क्या बीते 19 साल से हमारे लड्डू खराब थे और केवल एक साल तक अच्छे रहे, वह भी केवल नंदिनी के 20 प्रतिशत घी की आपूर्ति के बदौलत.

रेड्डी ने पीटीआई (PTI) से बात करते हुए कहा

KMF ने हमारी मांग की केवल 20 प्रतिशत ही आपूर्ति की है और वह भी छः महीने की जगह एक साल लगा दिए. TTD को 15, 000 किलोग्राम यानी 15 टन घी प्रतिदिन, महीने में 450 टन और साल में 5,400 टन घी की आवश्यकता होती है. जब KMF केवल 20 प्रतिशत घी की भी आपूर्ति नहीं कर सका तो नाइक सोच भी कैसे सकते हैं कि वो सारे घी की आपूर्ति करेंगे और प्रसाद नंदिनी घी की वजह से ही स्वादिष्ट है.

टेंडर की प्रक्रिया पर बात करते हुए धर्मा रेड्डी ने बताया 

सभी को समान अवसर मिल सके इसलिए ट्रस्ट ऑनलाइन डेंटर (E-Tender) की प्रक्रिया का पालन करता है. टेंडर खुलने के बाद ही टेंडर डालने वाली कंपनी के नाम का पता चलता है. निर्णय सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनी के पक्ष में जाता है. कंपनी को गुणवत्ता और कीमत दोनों ही कसौटियों पर खरा उतरना होता है.

धर्मा रेड्डी के बयान के बाद KMF के प्रबंध निदेशक (Managing Director) एमके जगदीश ने पीटीआई (PTI) को दिए बयान में कहा, 

“हमने 2021-22 में आखिरी बार 345 मिट्रिक टन घी की आपूर्ति की. उस समय हमने 400 रुपए में घी सप्लाई किया था. 6 महीने में 2050 मिट्रिक टन घी की आपूर्ति करनी थी लेकिन 400 रुपए में हमें घाटा हो रहा था इसलिए हमने 345 मिट्रिक टन घी ही दिया.” 

एमके जगदीश ने आगे कहा कि हम एक बार फिर TTD के साथ संपर्क करने की कोशिश करेंगे. हमने उन्हें बताया है कि हमारे घी की गुणवत्ता बहुत बढ़िया है. हम घी की आपूर्ति करना चाहते हैं, बस कीमत 400 से ज्यादा चाहते हैं. अगले 6 महीने में फिर से  TTD का टेंडर आएगा और हम टेंडर प्रक्रिया में भाग लेंगे.  

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम् (TTD) और कर्नाटक मिल्क फेडरेशन (KMF) की इस बहस में सियासी पार्टियां हिस्सेदारी के लिए कूद पड़ीं और बहस का राजनीतिकरण हो गया.

घी पर सियासत

KMF चेयरमैन भीमा नाइक के बयान के बाद कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष नलिन कुमार कटील का बयान आया. उन्होंने KMF के इस फैसले के पीछे कर्नाटक की कांग्रेस सरकार की भूमिका होने का दावा किया. आरोप लगाया कि "सिद्धारमैया सरकार ने मंदिरों, हिंदू मान्यताओं और भक्ति के प्रति उदासीनता की नीति के तहत घी की आपूर्ति रोक दी है"  

कटील के आरोपों का जवाब देते हुए कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, “तिरुपति के लड्डुओं के लिए नंदिनी घी की आपूर्ति डेढ़ साल पहले पिछली भाजपा सरकार के समय ही रोक दी गई थी”.  

घी में राजनीति कहां से आई

नंदिनी बीते विधानसभा चुनाव से ही राजनीति की रार में फंसी है. चुनाव के बाद फिर एक बार नंदिनी पर सियासत हो रही है. कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान 5 अप्रैल को गुजरात की मिल्क कॉपरेटिव सोसाइटी अमूल ने कर्नाटक में भी दूध और अन्य उत्पादों की बिक्री की बात कही थी. उससे पहले 30 दिसंबर 2022 को अमित शाह कर्नाटक के गेज्जलागेरे गांव में कह चुके थे कि नंदिनी और अमूल दोनों मिलकर कमाल कर सकते हैं. उस समय विधानसभा चुनाव के दौरान विपक्षी दल कांग्रेस और जनता दल (सेकुलर) ने इसे मुद्दा बनाया था. आरोप लगाया गया कि अमूल नंदिनी को खुद में मिलाकर खत्म कर देगा. नंदिनी को उस वक्त कन्नड़ अस्मिता के साथ जोड़ा गया और अमूल का कर्नाटक में आना आर्थिक हमले की तरह पेश किया गया. 

इस बार मौका बीजेपी के पास है. बीजेपी तिरुपति मंदिर के लड्डुओं के लिए नंदिनी घी की आपूर्ति रोके जाने को हिंदू विरोध की तरह पेश कर रही है. वरिष्ठ भाजपा नेता सीटी रवि (CT Ravi) ने कहा सत्ता में आने के बाद कांग्रेस सरकार ने दूध और उससे बने उत्पादों का दाम बढ़ाया है, जिसके चलते KMF नंदिनी घी पहले के दाम पर TTD को नहीं दो पा रहा है.

भाजपा आरोप लगा रही है कि कांग्रेस ने चुनाव में भी नंदिनी का इस्तेमाल अमूल को बदनाम करने के लिए किया था. 

कैसे बढ़े दूध के दाम? 

कर्नाटक कैबिनेट ने 27 जुलाई को  KMF के प्रस्ताव पर दूध के दाम बढ़ाने को स्वीकृति दे दी थी. बढ़ी हुई कीमत 1 अगस्त से लागू होनी थी. पहले टोंड नंदिनी दूध 39 रुपए प्रति लीटर मिलता था, कीमत बढ़ने के बाद 42 रुपए प्रति लीटर हो गया. कर्नाटक सीएम सिद्धारमैया ने बढ़ी हुई कीमतों के बारे में कहा कि अभी भी कर्नाटक में दूध की कीमत कम है. अन्य प्रदेशों में 54 से 56 रुपए प्रति लीटर दूध मिल रहा है.

इन बयानों और आरोप- प्रत्यारोप के बीच दूध-घी पर सियासत हो रही है. KMF और नंदिनी सियासी बिसात का मौहरा हो कर रह गए हैं.

(यह स्टोरी हमारे साथी अनुराग अनंत ने की है.)

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