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इस बंदे ने सबसे पहले पूरी दुनिया नाव से घूम डाली!

प्रशांत महासागर का जिसने किया नामकरण संस्कार, ये वो नक्शेबाज है.

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15 अगस्त 2016 (अपडेटेड: 15 अगस्त 2016, 03:30 PM IST)
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पारुल
पारुल

जइसे इश्क के सात मुकाम होते हैं. ठीक वैसे ही नक्शेबाज सीरीज के भी कुछ मुकाम होते हैं. आज 7वां मुकाम है. इतना तो आप जानते ही हैं कि दी लल्लनटॉप आपको ट्रैवलर्स के किस्से पढ़ा रहा है. ये ट्रैवलर्स कब, कहां और किस रास्ते से गए. सब कुछ. आज बारी है पुर्तगाल के फर्डीनांड मैगलन की. इनके बारे में लिखा है पारुल ने. पढ़िए और ग़र मन करे तो निकल पड़िए यहीं कहीं, जहां घूमने का मन करे.


 

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फर्डीनांड मैगलन

ये पुर्तगाल के थे. 15वीं सेंचुरी में घूमने निकले थे. और पूछो मत कितना घूमे. ये शायद पहले इंसान थे, जिसने नाव से पूरी दुनिया का चक्कर लगाया हो.

ड्राइविंग फ़ोर्स:

मैगलन की फैमिली पहले से ही शाही खानदान से जुड़ी हुई थी. फिर पापा के मर जाने के बाद मैगलन रानी के ख़ास नौकर बन गए थे. फिर नेवी में आने के बाद उन्हें चुना गया था नई जगहों पर जाकर स्पेन का रौला सेट करने और बनाने के लिए.

फैमिली बैकग्राउंड/इनकम लेवल:

ये ठीक ठाक घर से थे. नेवी में ऑफिसर थे. समुद्री रास्तों के मामले में बिलकुल एक्सपर्ट थे. और इसीलिए स्पेन के राजा ने इन्हें चुना था मालुकु आइलैंड भेजने के लिए. ये जगह तिमुर के पास है. यहां ढेरों ऐसे मसाले होते थे, जो दूसरी जगहों में आसानी से नहीं मिल पाते थे.

ट्रेवल रूट/ जगहें:

पांच नावें लेकर मैगलन स्पेन से निकलें. जब वो पेसिफिक ओशन पहुंचे, तो उन्होंने उसका नाम 'पीसफुल सी' रखा. बाद में उसका नाम पैसिफिक हो गया. इन्होंने अटलांटिक, पेसिफिक और इंडियन, तीन ओशन से होते हुए अपना सफ़र पूरा किया था.
मैगलन 1521 में उन मसालों वाले आइलैंड पर पहुंच गए. फिर घर वापस आते वक़्त इंडियन ओशन से होते हुए आए. इस तरह उनका एक चक्कर पूरा हो गया. इस सफ़र के बाद केवल एक नाव वापस सही-सलामत लौटी. उसका नाम था विक्टोरिया. विक्टोरिया पहली ऐसी नाव बन गई, जिसने पूरी दुनिया का चक्कर लगाया हो.
पहले इन्हें पुर्तगाली भारत में वायसराय बनाया गया था. ये करीब आठ साल तक भारत में रहे थे. गोवा, कोचीन और कोल्लम में. इसके बाद मैगलन ने मलय जाकर वहां अपनी कॉलोनी बनाई. मलय से इन्होंने एक-दो बंधुआ मजदूर अपने साथ ले लिए थे. जिनमें से एक तो उनके साथ अंतिम वक़्त तक रहा. जब मैगलन और उनकी टीम फिलीपीन्स पहुंची, तो मलय के इसी बंधुआ मजदूर ने भाषा समझने में इनकी मदद की. ये लोग पहले यूरोपियन थे, जो फिलीपीन्स पहुंचे.

मुश्किलें:

कहा जाता है कि इस सफ़र में जो तीन दूसरे कप्तान थे, वो मैगलन को जान से मार देने की कोशिश कर रहे थे. जिसमें से एक को मैगलन ने नाव से फ़ेंक दिया था. फिर अगली मुश्किल ये आई कि इक्वेटर के पास पहुंचने पर पानी के बहाव में बहुत तेज़ी आ गई. जिससे निकल पाना बड़ा कठिन था. फिर जब मैगलन और उनका ग्रुप साउथ अमेरिका के गुआम पहुंचा तो वहां के लोकल लोगों ने जहाज से इनका बहुत सारा सामान पार कर दिया. आगे जाकर इसकी वजह से इन लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ी.

आउटपुट:

इस पूरे सफ़र के दौरान मैगलन के क्रू के ही कुछ मेंबर्स बराबर नोट्स बनाया करते थे. ऐसे दो-तीन एकाउंट्स मिलते हैं. इनसे ही हमें मैगलन के इस सफ़र के पूरे रूट का पता चलता है. इसी से क्रू के मेम्बेर्स, नावें, नई-नई जगहें, सब कुछ के बारे में पता चलता है.


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