The Lallantop
Advertisement

"दुनिया के सबसे ताकतवर ब्रेन ने अब काम करना बंद कर दिया"

थॉमस श्‍टॉल्‍ट्ज़ हार्वे ने 1955 में आइंस्टीन की मृत्‍यु पर उसके दिमाग का परीक्षण किया था और उसे 240 विभिन्‍न टुकड़ों में बांट दिया था. क्या था आखिर आइंस्टीन के दिमाग से जुड़ा मिथ?

Advertisement
pic
18 मई 2016 (अपडेटेड: 18 मई 2016, 01:54 PM IST)
Img The Lallantop
फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
sushobhit क्या हुआ जब एक जीते जागते इंसान के दिमाग को चमत्कारी मान लिया गया? उसके पीछे कहानियां बनाई जाने लगीं, और मानवजाति उसके सहारे दुनिया के तमाम अनसुलझे रहस्य जान लेने के सपने देखने लगी. क्या सच था, क्या झूठ, और क्या सच और झूठ के पार.. वैज्ञानिक अलबर्ट आइंस्टीन के दिमाग और उससे जुड़ी तमाम मिथक कथाएं आज हमें सुना रहे हैं सुशोभित सक्तावत. सुशोभित इंदौर में रहते हैं और 'दी लल्लनटॉप' के लिए लिखते रहे हैं. पढ़िए उनके फेसबुक पेज से साभार यह दिलचस्प किस्सा.
 
अल्‍बर्ट आइंस्टीन का दिमाग एक मिथ है. दुनिया के सबसे बड़े जीनियस का ब्रेन. जब वह जीवित था, तभी से उसके दिमाग को लेकर उत्‍सुकताएं शुरू हो चुकी थीं. जब उसकी मृत्‍यु हो गई तो बाकायदा उसके दिमाग का परीक्षण भी किया गया. उसकी चीरफाड़ की गई. जैसे ही यह पाया गया कि वह सामान्‍य मनुष्‍य के दिमाग से भारी था (उसका ब्रेन डेढ़ किलो का था) तो उससे जुड़ा मिथक और बलवान हुआ. जब यह पाया गया कि उसके दिमाग का "सिल्वियन फिशर" दूसरों के दिमाग की तुलना में छोटा था, तो आश्‍चर्यभरा कौतुक और आगे बढ़ा.
प्रिंसटन हॉस्पिटल के पैथालॉजिस्‍ट थॉमस श्‍टॉल्‍ट्ज़ हार्वे ने 1955 में आइंस्टीन की मृत्‍यु पर उसके दिमाग का परीक्षण किया था और उसे 240 विभिन्‍न टुकड़ों में बांट दिया था. हर लिहाज से, हर कोण से उसके दिमाग की पड़ताल की गई.
वास्‍तव में अपने जीनियस होने के मिथक को जाने-अनजाने आइंस्टीन ने स्‍वयं ही बढ़ावा दिया था. उसकी ऐसी तस्‍वीरें खिंचवाई जाती रहीं कि वह एक ब्‍लैकबोर्ड के सामने खड़ा है, जिस पर एक लंबा-चौड़ा अबूझ फ़ॉर्मूला लिखा हुआ है, जिसे केवल वह ही बूझ सकता था. फिर ऐसी तस्‍वीरें सामने आईं कि उसके दिमाग से इलेक्‍ट्रॉनिक वायर्स जोड़ दिए गए हैं और उससे अनुरोध किया जा रहा है कि वह "रिलेटिविटी की थ्योरी" के बारे में कुछ सोचे और मशीन पर उसके दिमाग की हलचलों को दर्ज किया जा रहा है. आइंस्टीन में विनोदप्रियता की कमी नहीं थी. वह जानता था कि उसके इर्द-गिर्द क्‍या खेल खेला जा रहा है और वह इस खेल में ख़ुद भी शिरकत कर उसका मज़ा ले रहा था.
आइंस्टीन की मृत्‍यु को लेकर रोलां बार्थ ने बड़ी दिलचस्‍प बात कही. उसने कहा इस व्‍यक्ति की मृत्‍यु की एक ही परिभाषा हो सकती है, "दुनिया के सबसे ताकतवर ब्रेन ने अब काम करना बंद कर दिया."
रोलां बार्थ ने अपनी किताब "मायथोलॉजीज़" में दुनिया के अनेक मिथकों पर चर्चा की थी, जैसे ग्रेटा गार्बो का चेहरा, रोमन सिपाहियों की वेषभूषा, जूल्‍स वेर्ने का नौका प्रेम, छुट्टियों पर लेखक, दूध बनाम शराब इत्‍यादि. इन्‍हीं में आइंस्टीन का ब्रेन भी शामिल था. आइंस्टीन ने "मास एनर्जी इक्विवेलेंस" (E = mc2) (E यानी फिजिकल सिस्‍टम की एनर्जी, m यानी मास और c यानी वैक्‍यूम में स्‍पीड ऑफ़ लाइट) की जो थ्‍योरी दी थी, उसे बार्थ ने एक ऐसे "कोड" की संज्ञा दी, जिसकी मदद से आइंस्टीन ने सृष्टि के रहस्‍य को लगभग सुलझा लिया था.
मानो ब्रह्मांड एक संदूक की तरह हो, जिस पर लगे ताले को एक गुप्‍त और दुर्बोध "कोड" या "कॉम्बिनेशन" की मदद से खोला जा सकता हो, और अगर कोई एक व्‍यक्ति उसके सबसे करीब पहुंचा था तो वह अल्‍बर्ट आइंस्टीन ही था.
बहरहाल, वह उसके करीब तक ही पहुंचा, गुत्‍थी को पूरी तरह सुलझा नहीं पाया. दुनिया का रहस्‍य अब भी अज्ञात बना हुआ है और यही आइंस्टीन के दिमाग से जुड़ा सबसे बड़ा मिथक है. उसकी मौत के बाद उसके ब्रेन की पड़ताल करने के पीछे उस एक कुंजी को रत्‍तीभर की दूरी से चूक जाने का संताप ही था. एक मृत व्‍यक्ति के दिमाग की पड़ताल करके यूं भी आखिर क्‍या हासिल किया जा सकता है. चाहे वह दिमाग एक जीनियस का ही क्‍यों ना हो. जीवन की जिन तरंगों ने उसे आंदोलित किया था, वे तो जाती रहीं : E = mc2 से रत्‍तीभर और इसीलिए अनेक प्रकाश-वर्ष की दूरी पर.

Advertisement

Advertisement

()