The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • mp Syed Shahabuddin leader who opposed Demolition of Babri Masjid once announces boycott republic day

जब मुसलमानों ने नहीं मानी, 26 जनवरी न मनाने की अपील

जड़ बाबरी विवाद था. जरिया शहाबुद्दीन. लेकिन इस ऐलान का मुस्लिम संगठनों ने भी जमकर विरोध किया.

Advertisement
pic
26 जनवरी 2017 (अपडेटेड: 26 जनवरी 2017, 10:51 AM IST)
Img The Lallantop
Symbolic image - source- Reuters
Quick AI Highlights
Click here to view more
6 दिसंबर 1992. भारत के सीने से कभी न मिटने वाली तारीख. बाबरी मस्जिद को उन्मादी भीड़ ने ढहा दिया. बाबरी विवाद यूं तो बेहद पुराना और आज भी बादस्तूर जारी है. लेकिन 1992 से 6 साल पहले एक ऐसा सांसद थे, जिसने बाबरी विवाद की वजह से मुसलमानों से 'रिपब्लिक डे' के बायकॉट करने का ऐलान किया. जनता पार्टी से सांसद सैयद शहाबुद्दीन. 23 दिसंबर 1986 को नवगठित अखिल भारतीय बाबरी मस्जिद कॉन्फ्रेंस ने मीडिया को बुलाया. मकसद था 26 जनवरी के बायकॉट का ऐलान. शुरू में इस ऐलान पर ज्यादा किसी ने ध्यान नहीं दिया लेकिन बाद में मामला तूल पकड़ता गया. सैयद शहाबुद्दीन बाबरी मस्जिद के हक में बोलने वाले बड़े नेताओं में शुमार थे. सैयद शहाबुद्दीन ने उस साल मुसलमानों को 'सरकारी समारोहों' से अलग रहने की अपील करार दी. लेकिन इस अपील से हालात बिगड़ चुके थे. जानकार बताते हैं कि इस ऐलान से आठ करोड़ मुसलमानों और सरकार के बीच संबंधों में भारी कड़वाहट भर जाने का अंदेशा पैदा हो गया. फैसले का मुसलमानों ने ही किया विरोध ऐसा नहीं था कि इस ऐलान से सरकार और मुसलमानों के बीच संबंध मधुर थे. खासकर मुसलमानों और बहुसंख्यक हिंदू समुदाय के बीच कड़वाहट तो पहले से ही थी. लेकिन इस फैसले से खतरे पहले के मुकाबले ज्यादा बढ़ गए थे. इंका के एक बागी नेता आरिफ खां के मुताबिक, इस फैसले से दोनों समुदायों में इतना ज्यादा अविश्वास पैदा हो जाएगा, जितना कुल मिलाकर हुए सांम्प्रदायिक दंगों से भी न हुआ होगा. इसी को देखते हुए सैयद शहाबुद्दीन के इस फैसले का कुछ मुस्लिम नेताओं ने विरोध भी किया. करीब दो दर्जन प्रतिष्ठित मुसलमानों ने इस फैसले के खतरे को देखते हुए साझा बयान जारी किया था. ज्यादातर ने माना कि इससे तनाव और झगड़े बढ़ेंगे और अंजाम ये होगा कि महत्वपूर्ण और प्रतिभाशाली मुस्लिम लोकतांत्रिक भारत से कट जाएगा. इस फैसले में सैयद के साथ इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के अध्यक्ष सुलेमान सेठ भी खड़े नजर आए. हालांकि दोनों को काफी आलोचना का सामना करना पड़ा. सैयद शहाबुद्दीन चंद्रशेखर ने शहाबुद्दीन के खिलाफ नहीं की कार्रवाई जनता परिवार अध्यक्ष चंद्रशेखर ने मुस्लिम नेताओं ने इस फैसले पर विचार करने की अपील की. चंद्रशेखर ने कहा, 'गणतंत्र दिवस देश के लिए खुशी मनाने का दिन है. चाहे कितनी भी उत्तेजना क्यों न हो. किसी भी समुदाय को इस समारोह का महत्व घटाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.' हालांकि उन्होंने सैयद शहाबुद्दीन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की. सैयद शहाबूद्दीन के इस फैसले को बाबरी मस्जिद के पक्ष में खड़े लोगों  की तरफ से किया एक गलत फैसला बताया जाता है. 1992 में बाबरी विध्वंस के बाद सैयद सक्रिय राजनीति से दूर ही रहे. लेकिन इतिहास में संभवत: वो पहले ऐसा राजनेता बन गए थे, जिसने लोकतंत्र के पर्व रिपब्लिक डे का विरोध किया.
ये भी पढ़ें: कहानी शहाबुद्दीन की जिसने दो भाइयों को तेजाब से नहला दिया था 25 साल का डॉन जिसने CM की सुपारी ली थी राजस्थान का सबसे बड़ा गुंडा AK-47 लेकर बकरियां चुरा रहा है  

Advertisement

Advertisement

()