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  • Moving sculptures of Ali & Nino based on a novel with the same name by an Azerbaijani writer.

रोज मिलते हैं और रोज अलग होते हैं, अली और नीनो

मिलने और बिछड़ने की कहानी शुरू हुई थी 1918 में, और ये दोनों आज तक नहीं मिल पाए हैं.

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26 फ़रवरी 2016 (अपडेटेड: 26 फ़रवरी 2016, 04:48 PM IST)
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Source-Visit Batumi
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काले सागर के किनारे एक शहर बसा है. नाम है बटूमी. जॉर्जिया में पड़ता है. उस शहर में 26 फुट ऊंचे स्टील के दो बुत खड़े हैं. रोज शाम सात बजे वो एक-दूसरे की ओर बढ़ते हैं,मिलते हैं और अलग हो जाते हैं. 10 मिनट में ख़त्म हो जाने वाले ये कहानी हर रोज दोहराई जाती है.
https://www.youtube.com/watch?v=3ds9fE0tnzE
मिलने और बिछड़ने की कहानी शुरू हुई थी 1918 में. 1937 में कुरबान सईद के नाम से छपी 'अली एंड नीनो' में यही वक़्त दिया है जब दोनों पहली बार मिले थे. अली था अजरबेजानी मुसलमान और नीनो जॉर्जिया की क्रिश्चियन. वो भी राजकुमारी.
Source- Instagram
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पूरब-पश्चिम,मुस्लिम-ईसाई,लड़का-लड़की सब कुछ था इस कहानी में जो इश्क के आड़े आए. दोनों जैसे-तैसे मिलते हैं पर अली के मुल्क में हमला हो जाता और वो जंग में मारा जाता है दोनों हमेशा के लिए अलग हो जाते हैं.
Source-valery_larrosa
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किताब बाद में 30 से ज्यादा भाषाओं में छपी. सौ के लगभग संस्करण छपे. पर कुरबान सईद कौन था कायदे से आजतक कोई न जान पाया. कुछ कहते हैं कि लेव नुस्सिम्बाम किताब के असल लेखक हैं. जिनने कुरबान के नाम से लिखा पर वैसे ही दावे और भी हैं. कुरबान कौन था ये बहस फिर कभी.
Ali nino 3

बुत का किस्सा ये कि इसे बनाया है जॉर्जियन मूर्तिकारा तमारा क्वेसिताद्जे ने. और कहानी जोड़ी 'अली और नीनो' से. दोनों बुत 26 फुट के हैं. 2007 में तमारा ने डिजाइन तैयार किया. 2010 में बटूमी शहर के सामने युद्ध के बीच पलते त्रासद अंत वाले प्यार का किस्सा बखान करने को रख दिया.
Ali nino 4
Source- Instagram

अली और नीनो का हिन्दुस्तान से भी कनेक्शन है. 27 जनवरी को इस नाम से एक फिल्म आई है. और उसके डायरेक्टर भारतीय मूल के थे. जिनका नाम है आसिफ कपाड़िया.
Source-imglobalfilm
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