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UP पंचायत चुनावों में कोरोना ने 1500 की जान ले ली, कहते हुए SC पहुंचे, क्या रुकेगी काउंटिंग?

कर्मचारियों का दावा- चिट्ठी लिखी, पर न UP सरकार ने जवाब दिया, न चुनाव आयोग ने.

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पंचायत चुनाव के दौरान वोट डालते ग्रामीण. फोटो- आजतक
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Varun Kumar
30 अप्रैल 2021 (अपडेटेड: 30 अप्रैल 2021, 03:29 PM IST)
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यूपी में पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो चुकी है. 2 मई को मतगणना होनी है. इस चुनावी प्रक्रिया में टीचर और अन्य सरकारी महकमों के तमाम कर्मचारी जुटे हैं. टीचरों के संगठनों का दावा है कि अभी तक 700 से अधिक टीचरों की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई है और हजारों टीचर कोरोना से पीड़ित हैं. अधिकतर टीचर, मतगणना टालने के लिए गुहार लगा रहे हैं. विपक्षी दल भी इसे लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं लेकिन सरकारी अधिकारी इन आंकड़ों को गलत बता रहे हैं. लगातार हो रही हैं मौतें आगे बढ़ने से पहले कुछ खबरों पर नज़र डालिएः
- सुल्तानपुर के बिरधौरा गांव में रहने वाले टीचर रमेश कुमार यादव 28 साल के थे. 19 अप्रैल को चुनाव संपन्न कराने के बाद से वह बीमार हुए और 28 अप्रैल की रात उनकी मृत्यु हो गई. दिसंबर 2020 में नौकरी मिली थी. अभी पहली सैलेरी भी नहीं मिली थी. इस मामले पर सुल्तानपुर जिले के उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जनपदीय प्रवक्ता निज़ाम खान कहते हैं कि सुल्तानपुर में अभी तक 13 शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी के कारण मौत हो चुकी है.
- नवभारत टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक आगरा में पंचायत चुनाव में ड्यूटी के बाद लौटे 6 टीचरों की कोरोना से मौत हो गई. उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. महेशकांत शर्मा के हवाले से अखबार ने लिखा है कि एक टीचर को तो न बेड मिला, न ऑक्सीजन और न ही वेंटीलेटर. परिवार वाले इधर उधर दौड़ते रहे और टीचर ने आखिर में दम तोड़ दिया.
- अमर उजाला अखबार में छपी एक खबर के मुताबिक, फिरोजाबाद में पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटे शिक्षकों की तबीयत बिगड़ रही है. 29 अप्रैल को छपी इस खबर में दावा किया गया है कि पिछले 24 घंटे में चार शिक्षकों की मौत कोरोना के कारण हो गई है. इसके अलावा कई शिक्षकों की तबीयत खराब है. टीचरों का कहना है कि चुनाव के काम से मना करने पर अधिकारी FIR की धमकी दे रहे हैं.
- टीचर्स ही नहीं, चुनाव ड्यूटी पर लगे प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी कोविड की चपेट में आकर जान गवां रहे हैं. बदायूं के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर अवधेश की भी पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी थी. अमर उजाला अखबार लिखता है कि इसी चुनाव के दौरान अवधेश संक्रमित हुए और उनकी मौत हो गई.
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बुलंदशहर के टीचर ने ये तस्वीर भेजी है. साफ दिखता है कि सोशल डिस्टेंसिंग नहीं है.
इस मामले पर टीचर्स और कर्मचारी संघों का क्या कहना है? इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षा संघ ने एक पत्र यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्य निर्वाचन आयुक्त को भेजा है. इस पत्र में सीएम से मतगणना रोकने की गुहार लगाई गई है. कहा गया है कि 706 टीचर मर चुके हैं, बाकी डरे हुए हैं. सभी चाहते हैं कि वोटों की गिनती को रोका जाए.
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UP Covid 19 Deceased

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संगठन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने 'दी लल्लनटॉप' को फोन पर बताया, इस मामले में 'दी लल्लनटॉप' ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी से भी बात की. उन्होंने कहा, विपक्षी पार्टियों का क्या कहना है? पंचायत चुनावों के दौरान हो रही मौतों का मुद्दा प्रदेश की तीनों बड़ी विपक्षी पार्टियों सपा, बसपा और कांग्रेस ने उठाया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया,
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https://twitter.com/yadavakhilesh/status/1387685198318297088
बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने 3 ट्वीट में लिखा,
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बसपा सुप्रीमो मायावती का ट्वीट

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने लिखा,
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https://twitter.com/priyankagandhi/status/1387709862306480129 सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला पंचायत चुनाव के नतीजे 2 मई को आने हैं. उससे दो दिन पहले यानी 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिका में मतगणना पर रोक लगाने की मांग की गई है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और यूपी निर्वाचन आयोग को नोटिस दिया है. 1 मई को इस मामले पर सुनवाई होगी. सरकारी पक्ष क्या है? इस पूरे मामले में आधिकारिक जानकारी लेने के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने यूपी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए नंबरों पर कॉल किए. फोन उठा नहीं. इलेक्शन कमिश्नर मनोज कुमार के मोबाइल नंबर पर भी कॉल किया लेकिन उन्होंने भी फोन नहीं उठाया. अगर उनका पक्ष आता है तो उसे ख़बर में अपडेट किया जाएगा. आपको बता दें कि 28 अप्रैल को भी इस मुद्दे पर हमने खबर की थी, तब ये पता चला था कि एडिशनल इलेक्शन कमिश्नर वेद प्रकाश वर्मा और सचिव जय प्रकाश सिंह, दोनों कोविड पॉजिटिव हैं.

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