The Lallantop
Advertisement
  • Home
  • Lallankhas
  • Modi government announced changes to the FDI policy for the E commerce sector

फ्लिपकार्ट-ऐमज़ॉन को बड़ा झटका, जिसका असर आप पर भी पड़ेगा

जानिए मोदी सरकार ने कौन से नियम बदल दिए, जिससे आपको नुकसान होने वाला है.

Advertisement
pic
27 दिसंबर 2018 (अपडेटेड: 27 दिसंबर 2018, 04:03 PM IST)
Img The Lallantop
अमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियां अब ज्याद छूट नहीं दे पाएंगी
Quick AI Highlights
Click here to view more
होली-दीवाली या 15 अगस्त-26 जनवरी से पहले अखबारों में क्या खास होता है? ये गौर किया है आपने. ऐसे खास मौकों पर ज्यादातर अखबारों के फ्रंट पेज ऐमज़ॉन और फ्लिपकार्ट जैसी ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों के विज्ञापनों से भरे होते हैं. इन ऐड में कंपनियां कैशबैक, एक्सक्लूसिव और स्पेशल ऑफर जैसी 'छूट' ऑफर करती हैं. और ये देख हम-आप अपने स्मार्टफोन से कुछ न कुछ ऑर्डर कर ही देते हैं. फिर मार्केट से कुछ सस्ता सामान पाकर इतराते-इठलाते हैं. पर अब शायद ये बीते दिनों की बात हो जाएगी. ऑनलाइन दुकानदार यानी ई कॉमर्स कंपनियां आपको बहुत ज्यादा छूट नहीं दे पाएंगी.
ऐसा क्या हो गया जो छूट नहीं मिलेगी? सरकार ने ऑनलाइन सामान बेचने वाली कंपनियों की तगड़ी घेराबंदी कर दी है. उसने ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए सीधे विदेशी निवेश यानी एफडीआई की पॉलिसी बदल दी है. सरकार ने मार्च 2016 में इस सेक्टर को 100 फीसदी विदेशी निवेश यानी विेदेशी पैसा लगाने के लिए खोला था. इसके बाद फ्लिपकार्ट और ऐमज़ॉन जैसी कंपनियों में विदेशी पैसा लगना शुरू हो गया था. बाहरी पैसा आते ही इन कंपनियों ने हमको-आपको छूट का तगड़ा लालच दिया. हम आप इन कंपनियों से खरीदारी करने के लिए टूट पड़े. इससे कंपनियां रातों-रात बमबम हो गईं. पर मुहल्ले के दुकानदारों और देश की दूसरी कंपनियों का धंधा गिरने लगा. इस पर देसी कंपनियों और कारोबारियों ने मोदी सरकार से मदद की गुहार लगाई. नतीजा कॉमर्स मिनिस्ट्री ने ऑनलाइन रिटेल में एफडीआई की पॉलिसी संशोधित कर दी. ये पॉलिसी एक फरवरी, 2019 से लागू होगी.
फ्लिपकार्ट और ऐमज़ॉन की सेल की सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.
फ्लिपकार्ट और ऐमज़ॉन की सेल की सांकेतिक तस्वीर. इंडिया टुडे.

तो अब क्या होगा? अब सरकार ने फ्लिपकार्ट और ऐमज़ॉन जैसी कंपनियों को एक्सक्लूसिव या कैशबैक डील ऑफर करने से रोक दिया है. मतलब ये कि अब ये कंपनियां अपने खुद के प्रोडक्ट खुले बाजार से कम कीमत पर नहीं बेच पाएंगी. अब ग्राहकों को पहले की तरह बड़ा डिस्काउंट नहीं मिलेगा. इससे मुहल्ले के दुकानदारों और दूसरे स्टोर्स को फायदा हो सकता है. अब किसी पोर्टल पर किसी खास ब्रैंड की एक्सक्लूसिव लॉन्चिंग भी नहीं हो पाएगी. ऐमज़ॉन प्राइम और फ्लिपकार्ट एश्योर्ड जैसी सर्विस में भी कुछ बदलाव हो सकते हैं. अब किसी एक वेबसाइट पर कोई एक वेंडर यानी विक्रेता अपने प्रोडक्ट का 25 फीसदी हिस्सा ही बेच पाएगा. वो कुछ इस तरह जैसे कोई कंपनी 100 पेन ऑनलाइऩ बेचना चाहती है, तो अब वो एक वेबसाइट के जरिए सिर्फ 25 पेन ही बेच पाएगी. इस पॉलिसी की एक खास बात और है. वो ये कि फ्लिपकार्ट और ऐमज़ॉन जैसी कंपनियां अब किसी विक्रेता पर ये दबाव भी नहीं बना पाएंगी कि उनका एक्सक्लूसिव प्रोडक्ट सिर्फ उनकी वेबसाइट पर ही मिलेगा.
अब कंपनियां क्या करेंगी? नए नियमों का मकसद इन प्लेटफॉर्म्स को भेदभाव रहित बनाना है. अभी क्लाउडटेल के प्रोडक्ट ऐमज़ॉन पर और डब्ल्यूएस रिटेल के प्रोडक्ट फ्लिपकार्ट पर बेचे जाते हैं. क्लाउडटेल में ऐमज़ॉन की और डब्लूएस रिटेल में फ्लिपकार्ट की हिस्सेदारी मानी जाती है. नए नियम लागू होने के बाद इनका सामान उनके प्लेटफॉर्म्स पर नहीं मिल पाएगा. फ्लिपकार्ट के सामने तो सिर मुंड़ाते ओले पड़ने जैसी स्थिति हो गई है. कंपनी को हाल ही में वॉलमार्ट ने खरीदा है. अब वॉलमार्ट के प्रोडक्ट फ्लिपकार्ट पर नहीं बिक पाएंगे. ऐमज़ॉन इंडिया पर भी सबसे ज्यादा सामान क्लाउडटेल बेचती है. ये इन्फोसिस के सह-संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति, कैटामारन वेंचर और ऐमज़ॉन का ज्वाइंट वेंचर है. नए नियमों के बाद कंपनियों का कारोबार प्रभावित होगा. सरकार ने ई कॉमर्स कंपनियों की खरीदारी पर सख्ती कर दी है. अब वे किसी भी सप्लायर से, जिसे तकनीकी भाषा में मार्केटप्लेस एंटिटी बोलते हैं, 25 फीसदी से ज्यादा खरीदारी भी नहीं कर पाएंगी. इससे ज्यादा माल खरीदा तो माना जाएगा कि उसमें ई कॉमर्स कंपनी की हिस्सेदारी है. अब कैशबैक या फास्टर डिलीवरी जैसी प्रमोशनल स्कीमें भी प्रभावित हो सकती हैं. नई नीति में इन्हें भेदभाव वाला माना गया है.
फ्लिपकार्ट की सेल की सांकेतिक तस्वीर. फोटो. फ्लिपकार्ट.
फ्लिपकार्ट की सेल की सांकेतिक तस्वीर. फोटो. फ्लिपकार्ट.

अभी क्या हाल है? ई-कॉमर्स वेबसाइटों की सहयोगी इकाइयों की ओर से मिलने वाले डिस्काउंट को लेकर सरकार के पास काफी शिकायतें थीं. इससे फिजिकल स्टोर्स के बिजनेस में गिरावट आ रही थी. ये एफडीआई की शर्तों के खिलाफ था. सरकार ने ई-कॉमर्स सेक्टर में कारोबार से कारोबार के बीच 100 फीसदी विदेशी निवेश की इजाज़त दी है. इसका मतलब ये है कि कोई विदेशी कंपनी भारत की किसी कंपनी के कारोबार में ही निवेश कर सकती है. वो अपने प्रोडक्ट सीधे उपभोक्ताओं को नहीं बेच सकती है. मगर कुछ ई कॉमर्स कंपनियां बैक डोर से उनके सामान भी बेच रही थीं. इनमें घरेलू इस्तेमाल के लिए आने वाले साबुन तेल से लेकर कपड़े, खाने-पीने का सामान, मोबाइल, टीवी, फ्रिज जैसे इलेक्ट्रानिक सामान शामिल होते हैं.
ई कॉमर्स कंपनियां क्या हैं? इंटरनेट के जरिए कारोबार करने वाली कंपनियों को ई कॉमर्स कैटेगरी में रखते हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस वक्त इन कंपनियों का कारोबार 5,000 करोड़ रुपए के आस-पास है. ये कारोबार सालाना 30 फीसदी की दर से बढ़ रहा है. ऐमज़ॉन एक अमेरिकी कंपनी है. कंपनी भारत में 350 अरब रुपए से ज्यादा के निवेश का इरादा लेकर आई है. इसी तरह, फ्लिपकार्ट को हाल ही में अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट ने करीब 1,07,200 करोड़ रुपए में खरीदा है. इस तरह इन दोनों कंपनियों का मैनेजमेंट विदेशी हाथों में है. एक रिपोर्ट के मुताबिक ऐमज़ॉन इंडिया इस वक्त भारत की सबसे पॉपुलर वेबसाइट है. इसके बाद फ्लिपकार्ट का नंबर है. फ्लिपकार्ट ने साल 2007 में एक छोटी वेबसाइट के जरिए किताबें बेचनी शुरू की थीं. आज ये देश की दूसरी सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है. पेटीएम तीसरी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी है. कंपनी ने दो साल पहले पेटीम मॉल लॉन्च करके ई-कॉमर्स इंडस्ट्री में एंट्री मारी थी. साल 2017 में पेटीएम ने सॉफ्टबैंक से 4,400 करोड़ रुपए का निवेश हासिल किया था. मगर इसका प्रबंधन अभी हिंदुस्तानी हाथों में है. ऑनलाइन कारोबार करने वाली कंपनियों में एक कंपनी जबांग भी है. ये वेबसाइट साल 2012 में स्थापित हुई थी. इसे फ्लिपकार्ट ने एक्वायर कर लिया है. जबांग और फ्लिपकार्ट के विलय के बाद भी जबांग अपनी वेबसाइट को अलग इकाई के तौर पर चला रही है. मिंत्रा नाम की एक शॉपिंग वेबसाइट फैशनेबल प्रोडक्ट बेचती है. इसे साल 2007 में मुकेश बंसल ने स्थापित किया था. साल 2014 में फ्लिपकार्ट ने इसे भी अधिग्रहीत कर लिया था. इस तरह अब फ्लिपकार्ट, मिंत्रा और जबांग एक प्‍लेटफॉर्म पर काम कर रहे हैं.


वीडियोः एक सांसद को 25 करोड़ खर्च करने होते हैं वो भी नहीं कर पा रहे हैं

Advertisement

Advertisement

()