भारतीय मूल के शख्स की बात अब पूरा अमेरिका सुनेगा!
अमेरिका की फॉरेन पालिसी अब एक भारतीय बताएगा!

और किसी लोकतंत्र का सबसे अहम पहलू है जवाबदेही. इसीलिए अमेरिका में लम्बे समय से प्रथा रही है कि हर रोज़ वाइट हाउस सहित सरकार के सभी मंत्रालयों से एक प्रेस ब्रीफिंग जारी की जाती है. इस प्रथा की शुरुआत साल 1913 में हुई थी. प्रेस ब्रीफिंग के लिए कोई भी जगह चुन ली जाती थी. फिर 60 के दशक में टीवी न्यूज़ का दौर चला. प्रेस की अहमियत खासकर विजुअल्स की अहमियत बहुत बढ़ गयी थी. इसलिए साल 1969 में राष्ट्रपति निक्सन ने एक प्रेस रूम बनवाया. इस कमरे के बनने की कहानी भी कम रोचक नहीं. अमेरिका के एक राष्ट्रपति हुआ करते थे फ्रेंकलिन रूजवेल्ट. धाकड़ आदमी थे.
1930 के दशक में अमेरिका को ग्रेट डिप्रेशन से निकाला. फिर दूसरा विश्व युद्ध हुआ तो विरोध के बावजूद ब्रिटेन का साथ दिया और मित्र राष्ट्र्रों की जीत में अहम भूमिका निभाई. और ये सब उन्होंने किया जब पोलियो ने उनका आधा शरीर बेकार कर दिया था. तो कहानी यूं है कि अपनी थेरेपी के लिए रूजवेल्ट को तैराकी सजेस्ट की गयी थी. लेकिन वाइट हाउस में कोई स्विमिंग पूल नहीं था. इसलिए रूजवेल्ट को थेरेपी के लिए बाहर जाना होता था. इसी चक्कर में साल 1933 में एक कैम्पेन की शुरुआत हुई. लोगों से चंदा मांगा गया. और उससे बना एक स्विमिंग पूल.
इसी स्विमिंग पूल को ढककर 1969 में प्रेस रूम बनाया गया. और यही कमरा राष्ट्रपति के प्रेस से मुखातिब होने के लिए यूज़ किया जाने लगा. साल 1989 की बात है. तब रोनाल्ड रीगन राष्ट्रपति थे. इनका भी अमेरिकी पॉलिटिक्स में बड़ा नाम है. उस साल रीगन के ऊपर एक जानलेवा हमला हुआ. रीगन तो बच गए लेकिन उनके प्रेस सेक्रेटरी जेम्स ब्रेडी को गोली लग गई. इसके चलते उनके आधे शरीर को लकवा मार गया और अपनी बाकी जिंदगी उन्हें व्हीलचेयर में गुजारनी पड़ी. साल 2000 में ब्रेडी के सम्मान में वाइट हाउस के प्रेस रूम का नाम जेम्स ब्रेडी प्रेस ब्रीफिंग रूम रख दिया गया. एक रोचक फैक्ट ये भी सुनिए कि जब 2014 में ब्रेडी की मृत्यु हुई तो इसे होमीसाइड यानी मानव हत्या माना गया. यानी हत्या आज हुई और आदमी की मौत पच्चीस साल बाद हुई.
आज ये किस्सा क्यों?इसी साल अप्रैल महीने की बात है. हमेशा की तरह वाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी जेन साकी प्रेस ब्रीफिंग के लिए आई. इस बीच एक शख्स उनके बगल में खड़ा था. अचानक कुछ पत्रकार इस शख्स के बारे में सवाल करने लगे. जेन साकी ने कहा, ‘हां हम उसे हमेशा आसान काम देते हैं’. बाद में जेन ने हंसते हुए बताया कि दरअसल ये झूठ है. वेद इतने टैलेंटेड हैं कि उनके लिए मुश्किल काम भी आसान हो जाता है.
इस शख्स का पूरा नाम था वेदांत पटेल. अप्रैल तक वेदांत वाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी के असिस्टेंट हुआ करते थे. लेकिन पोडियम पर जाकर बोलने का मौका कभी नहीं आया. फिर 6 सितम्बर की तारीख आई. वेदांत अबकी पास एक दूसरे कमरे में थे. अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट, भारत के हिसाब से विदेश मंत्रालय. मौका इतिहास बनाने वाला था. क्योंकि ये पहली बार हो रहा था कि भारतीय मूल का कोई व्यक्ति अमेरिकी स्टेट डिपार्टमेंट की डेली प्रेस ब्रीफिंग को अड्रेस कर रहा हो. इस मौके की अहमियत आप इस बात से समझ सकते हैं कि अमेरिकी फॉरेन पॉलिसी दुनिया भर के लिए मायने रखती है. इसलिए स्टेट डिपॉर्टमेंट से कहे जाने वाले एक एक शब्द पर दुनियाभर की नजर रहती है. यहां एक भी गलती की संभावना नहीं. तो वेदांत से सवाल क्या पूछे गए?
इस मौके पर वेदांत ने ब्रिटेन की नई प्रधानमत्री के चुने जाने, ईरान न्यूक्लियर डील और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे मसलों पर सवालों के जवाब दिए. डेब्यू के बाद उन्हें वाइट हाउस और स्टेट डिपार्टमेंट के उनके साथियों ने बधाइयां दी. वेदांत वर्तमान में स्टेट डिपार्टमेंट के प्रिंसिपल डेप्युटी सेक्रेटरी हैं. इसके अलावा उनका परिचय क्या है?
33 साल के वेदांत का जन्म गुजरात में हुआ था. 1991 में वो अपने माता-पिता के साथ अमेरिका आए.
साल 2008 में उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफ़ोर्निया में दाखिला लिया. और साल 2012 में बायोलॉजी से ग्रेजुएशन पूरा किया. इसके बाद अगले 3 सालों तक वो अमेरिकी सांसद माइक होंडा के लिए डिप्टी कम्यूनिकेशन्स डायरेक्टर की जिम्मेदारी संभालते रहे. 2015 से 2017 के बीच उन्होंने फ्लोरिडा की एक यूनिवर्सिटी से MBA की डिग्री ली. साथ ही 9 महीनों तक उन्होंने भारतीय मूल की सांसद प्रमिला जयपाल के लिए कम्युनिकेशंस डायरेक्टर का काम किया. 2020 में वो जो बाइडन के चुनावी कैम्पेन से जुड़े. बाइडन के राष्ट्रपति बनने के बाद उन्हें वाइट हाउस के असिस्टेंटन प्रेस सेक्रेटरी का पद मिला. और इसी साल उन्होंने स्टेट डिपार्टमेंट में प्रिंसिपल असिस्टेंट प्रेस सेक्रेटरी की जिम्मेदारी मिली. आने वाले दिनों में वो प्रेस सेक्रेटरी नेड प्राइस की मौजूदगी में ये जिम्मेदारी निभाते रहेंगे.
इराक़ , सद्दाम हुसैन और शिया सुननी की कहानी जानिए!

.webp?width=60)

