ब्लैक ट्राउजर, वाइट शर्ट और ब्लैक ब्लेजर में जब सुभासिनी सनकरन लोगों के सामनेआती हैं, तो लोग उन्हें वकील समझ लेते हैं. जब वो पुलिसवालों को ऑर्डर देती हैं, तबभी लोग उनका रोल नहीं समझ पाते. ऐसी सिचुएशन्स से निकलने का सुभासिनी का अपना तरीकाहै. वो हल्का सा सिर झुकाती हैं और मुस्कुराकर आगे बढ़ जाती हैं. सुभासिनी देश कीपहली महिली IPS ऑफिसर हैं, जिन्हें आजाद भारत में किसी मुख्यमंत्री की सुरक्षा काजिम्मा दिया गया है.असम के मुख्यमंत्री सरबानंद सोनोवाल देश के एक संवेदनशील राज्य के सीएम हैं. जबउन्हें कहीं जाना होता है, तो पहले पुलिस की टीम लोकेशन सिक्योर करती है, आसपास केइलाके की जांच करती है और जहां सीएम को आना होता है, वहां की सेफ्टी सिक्योर करतीहै. और जो टीम ये सब करती है, सुभासिनी उसे लीड करती हैं. उन्हें इस साल जुलाई मेंसोनोवाल की सुरक्षा के लिए अपॉइंट किया गया है.सुभासिनी के घर में कोई भी पुलिस बैकग्राउंड से नहीं है. इसके बावजूद वो कईस्टीरियोटाइप्स तोड़ते हुए इस मुकाम तक पहुंची हैं और अब उनके जिम्मे ऐसा काम है,जिसमें गलती की जरा भी गुंजाइश नहीं है. वो बताती हैं, 'ये हर किसी के लिए नई बातथी. एक लड़की का सीएम की सुरक्षा में लगी टीम को लीड करना सबके लिए अजीब था, लेकिनलोगों ने धीरे-धीरे इसे स्वीकार कर लिया. जब उन्हें अहसास होता है कि सबको एक साथएक ही टीम में काम करना है, तो उनका व्यवहार अच्छा हो जाता है.'मुख्यमंत्री की सिक्योरिटी का काम आसान नहीं है. उनके रूट की जानकारी होना, बहुत हीनजदीक से सुरक्षा देने वालों के साथ कॉर्डिनेट करना, उनके गार्ड्स को निर्देश देनावगैरह वगैरह. ये एक फुल टाइम जॉब है. सुभासिनी दिन के 15 से 18 घंटे तक जॉब पर हीरहती हैं. हां, जब वक्त मिलता है, तो बायोग्राफीज और जैज म्यूजिक में खो जाती हैं.सुभासिनी तमिलनाडु के तंजावुर शहर की एक मिडल क्लास फैमिली से आती हैं. उनके दादाएम. राजगोपालन ने 1950 में 'मोटर इंडिया' और 'टेक्सटाइल मैगजीन' के नाम से दोमैगजीन शुरू की थीं, जो आज भी पब्लिश होती हैं. 1980 में सुभासिनी के पैरंट्स मुबंईआ गए थे. उनकी स्कूलिंग मुंबई में ही हुई और ग्रेजुएशन सेंट जेवियर्स से. मास्टर्सऔर एमफिल के लिए सुभासिनी ने जेएनयू में एडमीशन लिया था. जेएनयू में रहकर हीउन्होंने IPS की तैयारी की. उनके पापा एक प्राइवेट फर्म में काम करते हैं और मांहाउसवाइफ हैं, लेकिन इससे सुभासिनी के सपने पर कोई फर्क नहीं पड़ा. उन्हें जो मुकामहासिल करना था, उन्होंने किया.सुभासिनी की IPS ट्रेनिंग हैदराबाद के सरदार वल्लभभाई पुलिस अकैडमी में हुई और असमवो अपनी मर्जी से पहुंचीं. हर IPS को अपना काडर चुनने का मौका दिया जाता है औरसुभासिनी ने असम चुना. एक महिला पुलिस अधिकारी के लिए असम बेहद चुनौती भरा राज्यहै. लॉ ऐंड ऑर्डर, अपराधियों के साथ जवाबी कार्रवाई, सांप्रदायिक तनाव, स्मगलिंग,जानवरों का अवैध शिकार और ड्रग्स. असम बुरी तरह डूबा हुआ है इन चीजों में. ऐसे मेंसरकार के मुखिया को प्रोटेक्ट करना कितनी बड़ी जिम्मेदारी है, आप खुद समझ सकते हैं.वैसे सीएम की सिक्यॉरिटी में लगाए जाने से पहले भी सुभासिनी असम की अलग-अलग जगहोंपर काम कर चुकी हैं. असम में उन्हें 4 साल हो चुके हैं. उन्होंने गुवाहाटी में बतौरASP शुरुआत की थी. फिर वो अडिशनल एसपी के तौर बिश्वनाथ आ गईं. सुभासिनी बताती हैंकि अलग-अलग जगह रहकर काम करने का उन्हें सबसे ज्यादा फायदा ये हुआ कि अब उन्हेंलोगों को डील करना आ गया है. कहां बोलना है, कितना बोलना है और कब बोलना है,सुभासिनी अच्छी तरह जानती हैं. उनका फंडा है, 'तभी बोलो जब जरूरी हो, तभी एक्शन लो,जब जरूरी हो.'सुभासिनी आज लड़कियों के लिए रोल मॉडल हैं. उन्हें जानने वाले लोग उनके पास आते हैंऔर बड़े गर्व से बताते हैं कि सुभासिनी की वजह से उनकी बेटियां खुद को मजबूत महसूसकरती हैं. सुभासिनी कहती हैं कि अगर उनके काम से स्टीरियोटाइप टूटते हैं औरलड़कियों को हिम्मत मिलती है, तो वो इससे बहुत खुश हैं.