दक्षिण अफ्रीका के लोग कहते हैं कि हिंदुस्तान ने हमें एक वकील भेजा और हमने उसेमहात्मा बनाकर लौटाया. काफी हद तक बात सच भी है. हिंदुस्तान के सियासतदां चरखे औरपुतलों में गांधी को ढूंढते रहे मगर गांधी बनना इतना आसान नहीं है. मदीबा (नेल्सनमंडेला) को गांधी कहलाने के लिए 27 साल जेल में गुज़ारने पड़े, तो किंग (मार्टिनलूथर किंग जूनियर) को अमेरिकी गांधी की पदवी पर पहुंचने के लिए गोली खानी पड़ी.--------------------------------------------------------------------------------मार्टिन लूथर किंग यानी अमेरिकी सिविल राइट्स मूवमेंट का नायक. 15 जनवरी को पैदाहुए किंग को 1964 में शांति का नोबेल पुरस्कार मिला. उनके नस्लभेद विरोधी आंदोलन सेलोग इतना खफा हो गए थे कि अप्रैल 1968 में गोली मारकर किंग की हत्या कर दी गई. किंगकी हत्या होती भी क्यों न, बचपन से दोयम दर्जे का व्यवहार झेलता आ रहा एक बच्चाकॉलेज में ‘ईश्वर की अलग-अलग धारणाओं’ पर पीएचडी करता है. 1955 में जब 15 साल की एकअश्वेत, प्रेगनेंट और अविवाहित लड़की बस में एक गोरे को सीट देने से मना कर देती हैतो उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है. किंग बस बॉयकॉट शुरू करवाते हैं. 385 दिन लंबाबॉयकॉट गोरों को इतना परेशान कर देता है कि उनके घर पर बम फेंका जाता है. इस बमकांड के बाद अश्वेतों को बस में बराबर हक मिलते हैं.अमेरिका की गांधी सोसायटी के साथ किंग बराबरी के हक की मांग करते हैं. कैनेडी सेमांग करते हैं कि वो राष्ट्रपति के तौर पर लिंकन का अनुसरण करें. कैनेडी मना करदेते हैं. एफबीआई उनकी जासूसी करवाती है. किंग पर वामपंथी, देशद्रोही होने के आरोपलगे. मगर किंग अहिंसा से ही देश में बराबरी लाने के विश्वास के साथ डटे रहते हैं.1961 में एल्बेनी में किंग शहर के लोगों के साथ आंदोलन चलाते हैं. किंग को 178 डॉलरया 45 दिन की जेल की सज़ा होती है. किंग जेल जाना चुनते है. मगर शहर में अशांतिफैलने के डर से पुलिस किंग को तीसरे दिन ही जमानत पर रिहा कर देती है.7 मार्च 1965 को ब्लडी संडे कहा जाता है. शांति से प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पुलिसऔर गोरों की भीड़ हमला करती है. किंग इस प्रदर्शन में शामिल नहीं थे. इसके 2 दिनबाद 9 तारीख को किंग फिर पर्दशन करते हैं. लोगों के अंदर का आक्रोश और बढ़ जाता है.वियतनाम युद्ध शुरू होता है. किंग युद्ध का खुल कर विरोध करते हैं. अपने प्रसिद्धभाषण ‘बियॉन्ड वियतनाम’ में किंग कहते हैं इस युद्ध को टालने से जो पैसे बचेंगेउससे तमाम भलाई के काम हो सकते हैं. किंग अमेरिका पर लाखों बेगुनाहों के कत्ल काइल्ज़ाम लगाते हैं. इस बार किंग को रंग और नस्ल से परे समर्थन मिलता है, उन सभी काजो युद्ध नहीं चाहते हैं. मगर मीडिया के कुछ तबके किंग के इस भाषण की खिल्ली उड़ातेहैं. आज की तारीख में किंग का ये भाषण तमाम अंतर्राष्ट्रीय रिसर्च सेंटर्स मेंस्लेबस का हिस्सा है.वियतनाम पर भाषण देते किंगवैसे किंग का सार समझने के लिए उनके प्रसिद्ध भाषण आई हैव अ ड्रीम के एक हिस्से कोपढ़ना चाहिए.--------------------------------------------------------------------------------मेरे दोस्तों, आज और कल की तमाम मुश्किलातों के बाद भी मेरे पास एक सपना है. येअमेरिका के सपने की जड़ों में गहरे तक जमा हुआ सपना है. मेरा सपना है कि देश खड़ाहोगा और अपनी नस्ल के सच्चे अर्थों को जिएगा. हम सच में ऐसे जिएंगे कि सारे इंसानएक हैं. मेरा सपना है कि पुराने गुलामों के लड़के और उनके मालिकों की संतानेजॉर्जिया की किसी पहाड़ी पर भाईचारे की मेज पर साथ बैठेंगे. ... मेरा सपना है किमेरे चार छोटे बच्चे उनके रंग और नाक-नक्श से नहीं बल्कि उनके कैरेक्टर से पहचानेजाएंगे. मेरे पास एक सपना है. ...--------------------------------------------------------------------------------1963 में दिए गए इस भाषण को अमेरिकी इतिहास का सर्वश्रेष्ठ भाषण माना जाता है. इसभाषण का प्रभाव ऐसा था कि 1964 के सिविल राइट ऐक्ट के समय समान अधिकारों के मुद्देको टॉप पर रखा गया.29 मार्च 1968, किंग बेहतर इलाज की मांग कर रहे लोगों से मिलने टेनेसी जाते हैं. 3अप्रैल को भाषण देते हैं. 4 अप्रैल की सुबह किंग 'लॉरैन मोटल' के कमरा नंबर 306 कीबालकनी के बाहर खड़े हैं. एक गोली चलती है और दुनिया में गांधी को जीने वाला आदमीभी गांधी की नियति को प्राप्त हो जाता है.'लॉरैन मोटल', इसे अब म्यूज़ियम बना दिया गया है.इसके बाद पूरे अमेरिका में दंगे हुए. किंग की मौत सिविल राइट्स मूवमेंट को वो ऊंचाईदेती है जिस पर चलकर लोग नस्लभेद खत्म करने के लिए खुलकर सामने आते हैं. जब बराकओबामा राष्ट्रपति बनते हैं तो उसकी नींव में किंग का सपना होता है. वैसे किंग इसमुद्दे को लेकर कितना चिंतित थे इसको ऐसे समझा जा सकता है कि 39 साल के किंग केपोस्टमार्टम में पता चला कि उनके दिल की हालत किसी 60 साल के आदमी जैसी थी.