"6 घंटे मेरे शरीर के साथ जो चाहे करो" महिला आर्टिस्ट ने ऑफर दिया तो लोगों ने हद पार कर दी?
मेज पर रखी चीजों में एक तरफ तो, गुलाब, पंख, इत्र, अंगूर और वाइन वगैरा थीं. वहीं दूसरी तरफ इस पर कैंची, चाकू, लोहे की छड़, बंदूक और कारतूस जैसी चीजें भी रखी थीं. महिला कलाकार ने दर्शकों को पूरी छूट दे रखी थी.

आज से पचास साल पहले. इटली के नेपल्स में एक कमरा. धीमी रौशनी के नीचे खड़ी एक महिला कलाकार. जो मरने के लिए भी तैयार थीं. महिला के सामने एक मेज, जिस पर सफेद कपड़ा पड़ा था. और ऊपर 72 अलग-अलग चीजें रखी थीं. इनमें से कुछ आनंद देने वाली थीं. और कुछ दर्द. कुछ चीजें दर्द से आगे की भी थीं. दरअसल मेज पर रखी चीजों में एक तरफ तो, गुलाब, पंख, इत्र, अंगूर और वाइन वगैरा थीं. वहीं दूसरी तरफ इस पर - कैंची, चाकू, लोहे की छड़, बंदूक और कारतूस जैसी चीजें भी थीं. महिला कलाकार ने दर्शकों को पूरी छूट दे रखी थी. कि वो इस सामान को लेकर - उनके शरीर के साथ जो करना चाहें, कर सकते हैं. ये फिल्मी सीन, सर्बियन कलाकार मरीना अब्रामोविक के एक परफॉर्मेंस का हिस्सा था. जो कुल छह घंटे चला. इस दौरान लोग आते गए.
एक-एक करके मेज पर रखी चीजों का इस्तेमाल, मरीना के शरीर पर करते गए. परफॉर्मेंस से पहले मरीना ने कहा था,
6 घंटे बीते. सिर पर बंदूक ताने जाने के बावजूद खुशकिस्मती से मरीना जीवित रहीं. मरीना कमरे से बाहर निकलीं. खून और आंसू जमीन पर टपक रहे थे. पर इन छह घंटों में लोगों ने उनके साथ जो किया, वो कला की दुनिया में एक मिसाल तो बना ही. साथ ही अगर इंसानों को छूट दी जाए, तो वो क्या-क्या कर सकते हैं, किस हद तक जा सकते हैं, ये पहलू भी पता चला. ये प्रयोग खूब चर्चा में आया. आज भी इस पर बात की जाती है. मानवता के स्याह पहलू को बताती ये परफॉर्मेंस थी, रिदम ज़ीरो.
तीस बाई इक्कीस इंच की एक पेंटिंग. आंकी गई कीमत करीब 8 हजार करोड़. हम बात कर रहे हैं, लियोनार्डो दा विंची की मशहूर पेंटिंग, मोनालिसा की. हालांकि इसकी ये कीमत भी दूर का अनुमान ही है. क्योंकि ये उन चीजों में से है, जो खरीदी और बेची नहीं जाती हैं. ऐसे में इस कला की कीमत का अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. फिर भी ये तस्वीर है, जो आज भी मौजूद है. इसे बनाने के पांच सौ साल बाद भी इसे महसूस किया जा सकता है, सामने से देखा जा सकता है. पर कुछ कला ऐसी भी रही हैं, जो एक बार के लिए ही अंजाम दी गईं, एक बार ही परफॉर्म की गईं. पर उनका प्रभाव इतना था कि वो अमर हो गईं. हम बात कर रहे हैं, परफॉर्मिंग आर्ट्स की. यानी प्रदर्शन की ऐसी कला, जिसमें शरीर ही कैनवास होता है. कहें तो कलाकार ही कला होता है.
कहानी शुरुआत से. मरीना के रिदम जीरो से कुछ दस साल पहले, साल 1964 में न्यूयॉर्क में ‘योको ऑन’ की परफॉर्मेंस चर्चा में आई थी. योको प्रसिद्ध बैंड - बीटल्स के संगीतकार ‘जॉन लेनन’ की पत्नी भी थीं. ‘कट पीस’ नाम की इस परफॉर्मेंस में - दर्शकों को स्टेज पर बुलाया गया था. और उन्हें योको के कपड़े काटने की छूट दी गई. जब लोगों ने कपड़े काटना शुरू किया, योको चुप-चाप, बेसुध बैठी रहीं. इस परफॉर्मेंस के बारे में उन्होंने कहा था,
अंत तक योको के शरीर के सभी कपड़े लोगों ने काट कर रख दिए, और वो अपने हाथों से बदन छिपाए, चीथड़ों के साथ बैठी रहीं. ये फेमिनिस्ट आर्ट मूवमेंट के शुरुआती और सबसे प्रभावशाली प्रयोगों में था. योको की परफॉर्मेंस का ये दृश्य भी डराने वाला था. पर मरीना अपनी परफॉर्मेंस में योको से एक कदम आगे निकल गईं.
मरीना अब्रामोविक ने सत्तर के दशक में सर्बिया के बेलगार्ड से अपने करियर की शुरुआत की. दूसरे विश्व युद्ध के ठीक बाद के समय में इनका बचपन बीता. और ऐसे परिवेश में इन्होंने परफॉर्मेंस आर्ट के क्षेत्र में काम करना शुरू किया. वहीं, कागज़, कैनवास या बोर्ड से इतर, अपने ही शरीर को इन्होंने कला का माध्यम बनाया. इनकी कला में परित्याग और प्रतिबंध केंद्र में रहते हैं. ऐसी ही परफॉर्मेंस में इन्होंने रिदम नाम की एक सीरीज़ की. जिसमें रिदम 10 से लेकर रिदम 0 तक के परफॉर्मेंस शामिल हैं. जो अपने बॉडी की लिमिट को परखने के इर्द-गिर्द रहीं.
मसलन रिदम 10 एक शराब के साथ खेले जाने वाले गेम पर आधारित थी जो कि रूस और युगोस्लाविया के किसान खेला करते थे. इसमें लोग अपने हाथ को किसी लकड़ी के बोर्ड पर रखते और चाकू से उंगलियों के बीच वार करते. जितनी बार वो चूकते और खुद को कट लगाते, उतनी बार उन्हें शराब पीनी पड़ती. और लोग जितना नशे में होते जाते, उतनी ही चोट लगती.
दूसरी तरफ रिदम 5 को लीजिए. इसमें इन्होंने खुद को एक जलते हुए, सितारे के बीच लिटा दिया था. इनके सांस लेने के लिए एक ऑक्सीजन सप्लाई भी लगाई गई थी. लेकिन आग की वजह से इनकी ऑक्सीजन पाइप को नुकसान पहुंचा. और ये बेहोश हो गईं. जिसके बाद दर्शकों ने इनकी जान बचाई. अपनी तमाम परर्फार्मेंस में मरीना अपनी शारीरिक क्षमताओं को आजमाती रहीं.
लेकिन इनकी रिदम-जी़रो, सबसे ज्यादा चर्चा में आई. क्योंकि इसमें कलाकार मरीना ने टेक्निकली कोई परफार्मेंस नहीं दी. बल्कि आम लोगों पर सब छोड़ दिया था. परफॉर्मेंस के 35 साल बाद. मरीना ने साल 2009 में बयान दिया था,
गन, रोज़ एंड ब्लडकल्पना कीजिए एक कमरे की, जो भीड़ से भरा है. जहां महिला कलाकार बेजान सी खड़ी हैं. और लोगों को बता दिया गया है कि वो छह घंटे के लिए मर्जी के मालिक हैं. और सामने रखी 72 चीजों का बेधड़क इस्तेमाल कर सकते हैं. अब बात करते हैं, इसके बाद लोगों ने क्या-क्या किया. जैसा कि हमने आपको बताया - मेज पर रखा सामान दो तरह से इस्तेमाल किया जा सकता था. या तो आनंद पहुंचाने के लिए, या फिर कष्ट.
बहरहाल परफॉर्मेंस की शुरुआत होती है. लोग एक -एक करके आगे बढ़ते हैं. शुरुआत में लोग हिचक रहे होते हैं. कुछ मरीना को ब्रेड का टुकड़ा खिलाते हैं. कुछ परफ्यूम, फूल, लिप्सटिक का इस्तेमाल करते हैं. मरीना बेजान सी सिर्फ खड़ी रहीं. धीरे-धीरे लोगों में असहजता खत्म होने लगी. लोग समझ रहे थे कि वो कुछ भी करें, मरीना का कोई रिएक्शन नहीं आ रहा. माने उन्हें रोकने वाला कोई नहीं था. ऐसे में एक शख्स ने पहले मरीना को चूमा. फिर उन्हें थप्पड़ मारा. पर मरीना का कोई रिएक्शन नहीं आया. वो अपनी किताब, ‘वॉक थ्रू वाल्स’ में लिखती हैं,
पर लोग इतने में नहीं रुके. एक शख्स ने धारदार औजार से उनके कपड़े फाड़े. कुछ घंटों के भीतर ही उनके कपड़े, चीथड़ों में बदल गए थे. कपड़ों के बाद चाकू के निशाने पर उनकी त्वचा थी. उनके शरीर पर कई जगह कट लगाए गए. एक शख्स ने तो उनकी गर्दन पर निशान लगाया और उनका खून चखा. कुछ लोगों ने उनका शारीरिक शोषण करने का प्रयास भी किया. वो निर्वस्त्र बैठी रहीं. 72 चीजों में एक इंस्टेंट कैमरा भी शामिल था. जिससे लोग मरीना की तस्वीरें निकालते रहे. उनकी नग्न तस्वीरों को भी उनके ऊपर चिपकाया जाता रहा. इस दौरान उनका यौन उत्पीड़न करने की कोशिश भी की गई. बाद में मरीना ने इस बारे में कहा,
खैर जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा था. भीड़ बेकाबू होती जा रही थी. और कला पर कलाकार से ज्यादा हक दर्शकों का होता जा रहा था. हालात हाथ से निकल रहे थे. आर्ट क्रिटिक थॉमस मक्विले लिखते हैं,
एक शख्स नेे उनके माथे पर END लिख दिया. पर उन्हें इस सब से भी इतना डर नहीं लगा. जितना एक छोटे कद के शख्स सेे. जो बस उनके पास खड़ा लंबी-लंबी सांसेें ले रहा था. बकौल मरीना, मुझे उससेे डर लगा, बाकी किसी शख्स या किसी चीज़ से नहीं. थोड़ी देर में वो उठा और पिस्तौल में गोली भरी और मेरे हाथ में थमा दी. फिर उसे लेकर मेरी गर्दन की तरफ किया और ट्रिगर छुआ. फिर भीड़ बुदबुदाने लगी. जिसके बाद अचानक किसी ने उसे पकड़ा और लोगों में झगड़ा होने लगा. जाहिर सी बात है कुछ दर्शक मरीना को बचाना भी चाहते थे. पर कई परफॉर्मेंस को जारी रखना चाहते थे. लेकिन फिर किसी तरह 6 घंटे बीत गए. गैलरी मालिक आया और बताया कि समय खत्म हो गया है. दर्शकों को भी आवाज दी गई. कि परफॉर्मेंस खत्म हुई. शुक्रिया. फिर मरीना ने दर्शकों की तरफ भी देखा. और अपनी जगह से खड़ी हुईं. बाद में इस बारे में वो बताती हैं,
मरीना की ये परफॉर्मेंस एक मिसाल बनी. कला जगत के समीक्षकों ने इसकी तुलना आधुनिक शिकार से की. साल 2013 में कॉम्प्लेक्स मैग्जीन ने ‘ऑल टाइम बेस्ट परफॉर्मेंस आर्ट’ की लिस्ट निकाली. इसमें रिदम जीरो को नौवें नंबर पर रखा गया. योको की ‘कट पीस’ और मरीना की ‘रिदम जीरो’, कला के ये दोनों नमूने विचारों की नींव हिलाने वाले थे. जिन्होंने शक्ति, हिंसा और आर्टिस्टिक एक्सप्रेशन की हद तक - लोगों की मानसिकता को टटोला. लोग क्या कुछ कर गुज़रने को तैयार हो सकते हैं, अगर उन्हें छूट दी जाए.
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