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प्यारे देशवासियों, बार में मिल रही ये ड्रिंक आपके पेट में छेद कर देगी

स्वस्थ रहो. मस्त रहो. लेकिन ऐसी दारू न पीना. प्लीज़.

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5 जुलाई 2017 (अपडेटेड: 5 जुलाई 2017, 01:57 PM IST)
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अंक 7. बहुत मज़ेदार अंक. कुछ इसे अपशकुनी मानते हैं तो कुछ इसके कायल हैं. ब्रैड पिट, मॉर्गन फ्रीमैन और केविन स्पेसी की एक बेहतरीन थ्रिलर फ़िल्म थी सेवेन (Se7en). धोनी का जन्मदिन - सातवें महीने का सातवां दिन. धोनी का जर्सी नम्बर.  सात सुर, सात तारे, सात वचन, सात चक्र, सात समुंदर, सात महाद्वीप, सात रंग. पीएच स्केल की मैक्सिमम वैल्यू सात. इन्टरनेट के बेसिक मॉडल की सात लेयर.  हफ़्ते के दिन सात. 007 यानी जेम्स बांड. और बचपन में पढ़ी किताबों की सीरीज़ सीक्रेट सेवेन. इसी के साथ एक चीज और. पीरियॉडिक टेबल में सातवां एलिमेंट. नाइट्रोजन. हमारे आस पास सबसे ज़्यादा मात्रा में मौजूद गैस. ग्रीक शब्द नाइटर (nitre) से बना. नाइटर का ग्रीक में मतलब होता है 'निर्माण करना'. नाइट्रोजन के दो ऐटम मिलकर डाईनाइट्रोजन बनाते हैं और हमारे आस-पास मौजूद हवा (अगर किसी ने पादा न हो तो) में 78% हिस्सा इसी का होता है. लेकिन अगर इसकी मौजूदगी आपकी शराब में हो तो ये आपके पेट में छेद कर सकता है. ऐसा हुआ है गुड़गांव में. 30 साल का अच्छा भला आदमी, बार में पहुंचा. ड्रिंक ऑर्डर की. एक ही झटके में गले से उतार ली. थोड़ी देर में पेट में दर्द उठा. पसीना निकलने लगा. ब्लड प्रेशर में समस्या आने लगी. अस्पताल ले जाया गया. डॉक्टर ने बताया कि अगले के पेट में छेद हो चुका है. लड़का (30 साल का) अपने नाम बताने को तैयार नहीं है लेकिन कहानी बता रहा है. उसने एक ड्रिंक पी जिससे धुआं निकल रहा था. उसको पीने की जल्दी थी, झटके में पी गया. यहीं नहीं रुका. अगली ड्रिंक ऑर्डर की. वो भी पी गया. मिनटों के अन्दर पेट में सूजन हुई. आंख अस्पताल में खुली. ये सब कुछ उस एक ड्रिंक की वजह से हुआ जिससे धुआं निकल रहा था. इतिहास गवाह है कि इंसान ने ड्रिंक्स के साथ एक्पेरिमेंट्स किये हैं. ये एक्सपेरिमेंट्स होते रहे हैं और होते रहेंगे. अब हुआ ये कि इसी क्रम में ड्रिंक्स के साथ नाइट्रोजन गैस को भी इस्तेमाल किया जाने लगा. ये गैस लिक्विड फॉर्म में इस्तेमाल की जाती है. ड्रिंक्स को फटाक से जमा कर उसे कुल्फ़ीनुमा मिठाई बनाकर परोसा जाता है. लिक्विड नाइट्रोजन यानी नाइट्रोजन गैस को इतना ठंडा किया गया कि वो लिक्विड फॉर्म में आ  जाए. नाइट्रोजन गैस, हम इंसानों के लिए 'नॉर्मल' टेम्परेचर पर गैस बनी रहती है. यानी वो लिक्विड फॉर्म में महाठंडी होगी. और इसी महाठंडे लिक्विड से बार और रेस्टोरेंट में खाने-पीने की चीज़ों को ठंडा किया जाता है. साथ ही कई ड्रिंक्स भी ऐसे ही बनाई जाती हैं. नमूना हाज़िर है:
गुड़गांव के बार में जो खतरनाक ड्रिंक सर्व की गई थी, उसमें लिक्विड नाइट्रोजन का इस्तेमाल किया गया था. चूंकि लिक्विड नाइट्रोजन -196 डिग्री सेंटीग्रेड पर गैस बनने लगती है इसलिए 'नॉर्मल' टेम्परेचर पर इसका गैस बनना लाज़मी है. गुड़गांव के बार में जो ड्रिंक परोसी गई थी उसमें लिक्विड नाइट्रोजन का छौंका जैसा लगाया गया था. साथ ही उस लड़के (30 साल के) को ये हिदायत भी दी गई थी कि जब ड्रिंक के ऊपर से जब धुआं हट जाए तो ही उसे पिया जाए. ये धुआं असल में नाइट्रोजन गैस ही थी जिसे पिए जाने से पहले पूरी तरह से हट जाना था. लड़के (30 साल के) ने ये बहुत महत्वपूर्ण निर्देश स्किप कर दिया. धकेल लिया वो तरल अपने गले के नीचे. एक नहीं, दो बार. पहुंच गए अस्पताल. लिक्विड नाइट्रोजन जब देह के अन्दर घुसता है तो अन्दर सभी टिश्यू और सब कुछ जम जाता है. इसके अलावा जब लिक्विड नाइट्रोजन गैस में तब्दील होती है तो खूब सारी गैस रिलीज़ होती है. ये ऐसा होता है कि अगर एक कप लिक्विड नाइट्रोजन हो तो उससे इतनी गैस रिलीज़ होगी कि 2-3 बड़े डब्बे भर सकते हैं. ये गैस जब पेट से बाहर नहीं निकल पाती तो वो पेट की सतह को फाड़ देती है. यही उस लड़के (30 साल के) के साथ हुआ. भाई के पेट में छेद हो गया. लोचा-ए-उल्फ़त हो गया. (गाना था, गा दिया.) ऐसा ही वाकया अक्टूबर 2012 में लैंकेस्टर, यूनाइटेड किंगडम में 18 साल की एक लड़की ने अपने बर्थडे पार्टी में नाइट्रोजन गैस वाली ड्रिंक पी ली. उसका हाल भी वही हुआ जो इस 30 साल के गुड़गांव के लड़के का हुआ. उसके पेट में भी छेद हो गया था. उस विदेशी बार को तो 1 लाख पाउंड का ज़ुर्माना भरना पड़ना था. यहां तो बार के ही बारे में मालूमात नहीं मिल पा रहे हैं. खैर, दारू पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है. सिर्फ बापू अकेले नहीं हैं. बस बापू के साथ ये है कि वो एक बार गरम हुए तो उन्हें ठंडा करने के लिए लिक्विड नाइट्रोजन भी काम नहीं आएगी.

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