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हिंदुस्तान के कोने-कोने में किस-किस नाम से मनाई जाती है मकर संक्रांति, जान लीजिए

यही पंजाब में लोहड़ी है तो तमिलनाडु में पोंगल और यूपी में खिचड़ी.

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14 जनवरी 2021 (अपडेटेड: 14 जनवरी 2021, 09:40 AM IST)
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मकर संक्रांति जैसा ही पर्व देश भर में अलग अलग नामों से मनाया जाता है.
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सर्दियों का पहला त्योहार आ गया है. इसके बाद गांवों में ठेलमठेल मेले लगते हैं. मकर संक्रांति है नाम इसका. जो जगह और भाषा के हिसाब से बदलता रहता है. लेकिन मनाया जाता है पूरे इंडिया में. अलग नामों और तरीकों से. सब मौसमी त्योहारों की तरह इसका भी फंडा है कि फसल कटने के बाद आता है. अनाज घर आने की खुशी में चौड़ाए लोग सेलिब्रेट करते हैं. आध्यात्मिक थिंकटैंकों से पूछो तो वो दूसरा पहलू बताएंगे. कि इसी दिन सूरज धनु राशि से मकर राशि पर आता है. मुख्य मुद्दा है सूरज की घुमक्कड़ी पर बेस्ड है ये. पूरा साल दो पार्ट में बटा है. आधे में सूरज दक्षिणायन रहता है. इस दिन से उत्तरायण होने लगता है. जनवरी 14-15 में इसकी तारीख पड़ती है. त्योहार किस हिस्से में कैसा होता है जान लीजिए-
पतंगबाजी का खेल मुख्य है
पतंगबाजी का खेल मुख्य है
1. उत्तर प्रदेशः दान, खिचड़ी, पतंग और मेला का रेला ऐसा है कि हम यूपी से हैं, इसी वजह से पहला नंबर इसका रखा है. तो भैया यूपी वाले इसको दान पुन्न का त्योहार कहते हैं. इलाहाबाद में एक महीने का माघ मेला लगता है. 14 दिसंबर से 14 जनवरी तक आमतौर पर खर मास चलता है. बूढ़े बुजुर्ग बताते हैं कि इन दिनों में कायदे के काम नहीं करने चाहिए. फिर इस त्योहार के साथ अच्छे दिन आ जाते हैं. यूपी वालों ने इसका प्यार का नाम खिचड़ी रखा है. जमकर खिचड़ी खाई जाती है. और हां, पतंग उड़ाने का कंपटीशन जियरा उघार होता है इस दिन. 2. पंजाब और हरियाणा वालों की लोहड़ी पंजाब-हरियाणा वाले बड़े फास्ट हैं. वो एक दिन पहले, 13 जनवरी को ही मना डालते हैं 'मकर संक्रांति'. इसे लोहड़ी कहकर बुलाते हैं. शाम को अंधेरा होते ही हरकत में आ जाते हैं लोग. आग की पूजा करके तिल, गुड़, चावल और मक्के को आग में डाल स्वाहा स्वाहा किया जाता है. फिर गुड़, तिल और मूंगफली की गोल गोल मिठाई बंटती है. मक्के दी रोट्टी ते सरसों दा साग भी इसी दिन फैशन में आ जाता है.
पंजाब में लोहड़ी. तस्वीर: रॉयटर्स
पंजाब में लोहड़ी. तस्वीर: रॉयटर्स
3. बिहार.....आंय!  हियां भी खिचड़ी बिहार वाले यूपी के पड़ोसी हैं. वो भी खिचड़ी मनाते हैं. खिचड़ी में जित्ता भी आइटम पड़ता है. चावल, उड़द, नमक, तिल वगैरह दान किया जाता है. और बड़के वालों का त्योहार भी बड़का होता है. वो गाय बछिया, सोना चांदी वगैरह दान करते हैं. 4. महाराष्ट्रः गुड़ खाके मीठा बोलो महाराष्ट्र वाले इस दिन संत के गेटप में आ जाते हैं. वो आपस में तिल गुड़ बांटते हैं. औरतें उसमें हल्दी रोली भी ऐड कर लेती हैं. फिर बोलते हैं 'लिळ गूळ ध्या आणि गोड़ गोड़ बोला'. मने गुड़ खाओ और इसके जैसा मिट्ठा मिट्ठा बोलो. 5. पश्चिम बंगालः गंगासागर एक बार इस दिन गंगासागर में कर्रा मेला लगता है. बुजुर्ग कहते हैं सारे तीरथ बार बार गंगा सागर एक बार. तिल का दान भी कॉमन है सबकी तरह. उधर माना जाता है कि इस दिन गंगा भागीरथ को पिछुवा के चली थी. जाकर मिलीं समंदर के अंदर.
गंगासागर का मेला
गंगासागर का मेला. (फाइल फोटो)
6. राजस्थानः हियां भी पतंग उड़ती है सनन राजस्थानी इस त्योहार को संक्रात कहते हैं. खाना पीना जकड़ कर होता है. फीनी नाम की एक डिलीशियस डिश बनती है. दूध और चीनी से. धरम करम मानने वाली औरतें अपनी सास को वायना देती हैं. ढेर सारा दान पुण्य और फिर पतंग उड़ा कर मौज की जाती है. 7. तमिलनाडुः चार दिन का पोंगल तमिलनाडु वाले पोंगल मनाते हैं. नाम अलग है लेकिन त्योहार एक ही है. वहां चार दिन मनाया जाता है. पहले दिन भोगी पोंगल, दूसरे दिन सूर्य पोंगल, तीसरे दिन मट्टू पोंगल और आखिरी दिन कन्या पोंगल. खुले आंगन में जलता है चूल्हा. मिट्टी के बर्तन में पकती है खीर. फिर सब में बंटता है परसाद. बेटियों और दामादों के लिए लक्की वाला त्योहार है ये क्योंकि दोनों के नाज नखरे उठाए जाते हैं.
तमिलनाडु में पोंगल, तस्वीर: ANI
तमिलनाडु में पोंगल, तस्वीर: ANI
8. गुजरातः काय पो चे निकला है यहां से दो दिन का प्रोग्राम है ये गुजरात के लिए. कहते हैं इसको उत्तरायण का त्योहार. काहे कि सूरज नॉर्थ में जाना शुरू होता है न इस दिन. पतंगबाजी होती है फिर हियां. 'काय पो चे' फिलिम देखे हो न. वहीं की पतंगबाजी का डायलॉग है ये. फिरकी वेट फिरकी की तरह. 9. उड़ीसाः मकरचौला से मनती है मकरसंक्रांति उड़ीसा में मकरचौला बनाकर त्योहार का मजा लिया जाता है. कच्चा चावल, केला, नारियल, रसगुल्ला, छैना वगैरह छनता है. बालासुर में मकर मुनि का मंदिर है. वहां मेला लगता है. सूरज की पूजा होती है. 10. हिमाचल प्रदेश में माघ साजी माघ साजी. ये नाम है मकर संक्रांति का. जो हिमाचल प्रदेश के लोग रखे हैं इस त्योहार का. साजी पहाड़ी लैंग्वेज का शब्द है. मतलब जिसका संक्रांति. यहां भी खिचड़ी, घी, छाछ खा पीकर सेलिब्रेट किया जाता है. इस मौसम के आते ही यहां से परदेस गए पक्षी वापस घरवापसी करने लगते हैं.
ये तो अपने देश की मकर संक्रांति का पत्तरा है. बाहर नेपाल, तिब्बत, म्यांमार, कोलंबिया और श्रीलंका वाले भी बड़े इंट्रेस्ट से मनाते हैं ये त्योहार.

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