नोट बंदी की तमाम बातों के बीच एक आम धारणा है कि कैशलेस इकॉनमी में ब्लैक मनी कीजगह नहीं है. अगर सब कुछ डिजिटल हो तो सब कुछ ट्रैक होता रहेगा. बिना किसी लाग लपेटके कहा जाए तो ये सबसे बड़ा वहम है.--------------------------------------------------------------------------------सबसे पहली बात कि कोई पैसा ब्लैक या वाइट नहीं होता, उसका इस्तेमाल इसे ब्लैक यावाइट बनाता है. जैसे मेरी सैलरी वाइट मनी है, मैं इसे किसी दुकानदार को दूं और वोअपना टैक्स न चुकाए तो वो ब्लैक कहा जाएगा. ई-वालेट के आने से ये समस्या और बढ़जाएगी. विदेशों में तो बिट कॉइन और डार्क वेब जैसी खतरनाक चीजें आ गई हैं जोवालेट्स से कई हाथ ऊपर हैं. पर हिंदुस्तान में इस्तेमाल हो रहे तमाम ई-वॉलेट्स मेंभी इतने लूप होल तो हैं ही कि थोड़ी सी प्लानिंग और बिना किसी खास टेक्निकल जानकारीके आसानी से पैसा गैरकानूनी कामों में इस्तेमाल किया जा सकता है. इसमें लोग दिमागलगाकर फ्रॉड भी कर सकते हैं.एक सामान्य इंसान कुछ यूं फ्रॉड कर सकता है-1. सबसे पहले आपने कुछ सिम कार्ड लिए किसी अनजान शख्स की आईडी पर. (इंडिया में येकरना बहुत मुश्किल नहीं है.) 2. उन सभी आईडी से कुछ ईमेल एकाउंट बनाए. ऐसे ब्राउज़रसे जिसमें आपके कंप्यूटर का आईपी ऐड्रेस पता न चले. (बड़ा आसान है ये भी करना) 3.माना ऐसे 20 ईमेल अकाउंट से 10 पेमेंट वाली वेबसाइट पर बीस-बीस हज़ार रुपये भेजे.मतलब कुल दो लाख रुपए. (इतना पैसा एक साल में किसी भी बैंक अकाउंट से भेजा जाए तोइनकम टैक्स की निगाह में नहीं आएगा) 4. वॉलेट से वॉलेट ट्रांसफर में सिर्फ भेजनेवाले की लोकेशन ही पता चलती है. (पर इस मामले में वो मिलेगी नहीं, क्योंकि बिनाआइपी के इंटरनेट सर्फ किया जा रहा है) 5. अब कुल 20 आईडी हैं. तो इतनेपरम्युटेशन-कॉम्बिनेशन बनेंगे कि पता करना मुश्किल हो जाएगा कि किसने किसको कितनेपैसे भेजे. उदाहरण के लिए मानें कि एक आईडी से बाकी 19 को पैसा भेजा गया. और ऐसा हरआईडी से किया जाये तो ये गुणा होते चला जाएगा. 6. एक वॉलेट से दूसरे वॉलेट में भेजेजाने के कुछ एक ट्रांजैक्शन के बाद ये पैसा पूरी तरह से गायब हो जाएगा. क्योंकि इनसभी आईडी को कौन एंजल प्रिया या कूल बॉय नेकराम चला रहा है आप नहीं जान पाएंगे. 7.आप कहेंगे कि इन सारे ट्रांजैक्शन्स का रिकॉर्ड तो होगा. बेशक होगा. मगर फिर भी एकहफ्ते में 20 आईडी से हुए हजारों ट्रांजैक्शन का रिकॉर्ड उसे ट्रैक करना कितनामुश्किल होगा सोच लीजिए. इसके साथ ही एक और समस्या है. इन सारी आईडी की लोकेशनदुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिखती है. मतलब एड्रेस प्रूफ का कोई झंझट नहीं है.हैं दिल्ली में, लोकेशन लुसियाना की है. कौन जाएगा पकड़ने? किसको? 8. रही बात वापसबैंक अकाउंट तक पहुंचने की तो इसे करने में इतना समय लगेगा कि प्रैक्टिकली जब तककोई एजेंसी बैंक अकाउंट तक पहुंचेगी बहुत देर हो चुकी होगी. तो वॉलेट लाने से पहलेसब कुछ सही भी करना होगा. इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त होना चाहिए. तभी कुछ हो पाएगा.वरना लूट मच जाएगी.