रिश्तों के हिंदी नाम लेने में जबान लड़खड़ा जाएगी
संस्कृत पर बहस जारी है. कि उसको इंजीनियरिंग इंस्टीट्यूट में पढ़ाया जाए. संस्कृत का तो बाद में देखेंगे. पहले देख लो हिंदी आती है कि नहीं.
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Source: Pinterest
बहुत लोग कह रहे हैं सस्कृत को हर स्कूल कॉलेज में अनिवार्य कर दिया जाए. कुछ तो इसे राष्ट्रभाषा भी बनाना चाहते हैं. नै भाषा का ज्ञान होने और उसे बढ़ाने में कोई बुराई नहीं. जितनी भाषाएं सीख लोगे उतनी काबिल बन जाओगे याद रखो. लेकिन बिना सीखे नहीं. अब हम हिंदी की बात करते हैं. जो संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली हिंदी पहले भारत में बोली जाती है. उसमें अब उर्दू, अरबी, फारसी, अंग्रेजी, सब मिक्स हो जाती हैं. संस्कृत भी उसमें घुसी होती है. लेकिन कायदे की हिंदी भी नहीं आती बहुत लोगों को. अमिताभ बच्चन को आती है. कौन बनेगा करोड़पति में कैसा गजब बोलते हैं. आशुतोष राणा हिंदी के गजब जानकार हैं. नहीं हम उनसे कोचिंग नहीं दिलाने जा रहे तुमको. हम तो बस छोटा सा मौका दे रहे हैं. इतना ही सीख लो.
'ससुराल सिमर का' या 'यहां मैं घर घर खेली' सीरियल देखे हो? सीरियल का शौक नहीं तो सूरज बड़जात्या की पिच्चर जरूर देखी होगी. फिर पता चल गया होगा कि रिश्तों से भी इंपॉर्टेंट होते हैं उनके नाम. जो हर सीरियल में अलग होते है जैसे भावो और बाऊ जी वगैरह. देस दुनिया के हिसाब से रिश्तों के नाम अलग होते हैं. लेकिन इन रिश्तों के एंटीक नाम पता हैं क्या? जो कोई यूज नहीं करता. ये है एक छोटी सी लिस्ट जिसमें मेन रिश्तों के शुद्ध साहित्यिक संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली हिंदी वाले नाम हैं.
1: बिटिया का नाम सबसे पहले. क्योंकि फिल्मों का तो पता नहीं. असल जिंदगी में इनका होना बड़ी खुशी देता है.
2: बहू तो सूर्यवंशम के ठाकुर भानुप्रताप सिंह की है. एक चैनल पर 5469वीं बार वो कलक्टर बन चुकी हैं.
3: दामाद का तो पता नहीं राष्ट्रीय दामाद को हम जानते हैं. जानते तो तुम भी होगे गुरू.
4: ननंद भौजाई का रिश्ता पुरानी फिल्मों के साथ खतम हो गया. वो जो मल्होत्रा और पुरी फैमिली वाले सीरियल्स में दिखती हैं. ओरिजनल नहीं हैं
5: जीजा नखरे के लिए मशहूर होते हैं. और पता है कि जीजा को हिंदी में क्या कहते हैं?
6: साला ऐसी जीव है जो अब गाली की तरह यूज होने लगा है. घरों में कम फिल्मों में ज्यादा मिलते हैं साले. अभी नई पिच्चर आई है न साला खड़ूस.
7: साली का रिश्ता न होता भोजपुरी गानों से रस न टपकता. देवर भाभी के बाद साली ने ही इज्जत बचाई है.
8: मामा और भांजे की बहुत भयंकर जोड़ी होती है. वेस्ट यूपी के किसी गांव में चले जाओ. जहां मिलते हैं भांजा और मामा वहीं गिर पड़ता है हंगामा.
9: भतीजा का नाम लो तो अखबार की सुर्खियां दिमाग में घूमती है. भाई भतीजावाद और भतीजे ने चाचा से लड़ाई की टाइप से. बात ये है कि असल में चाचा भतीजों में बनती बहुत कम है.
10: सास का नाम बहू के इतनी देर बाद लेने के लिए सॉरी. लेकिन ससुर से पहले लिख दिया है.
11: अक्सर ऐसा होता है कि ससुर जी पूरे घर के मुखिया होते हैं. इसलिए उनका नाम सबसे आखिर में रखा है.
हम अपनी तरफ से जितना जानते थे, कुछ बता दिए हैं. आगे तुम जो जानते हो वो बताओ. उसको आगे बढ़ाएंगे.
2: बहू तो सूर्यवंशम के ठाकुर भानुप्रताप सिंह की है. एक चैनल पर 5469वीं बार वो कलक्टर बन चुकी हैं.
3: दामाद का तो पता नहीं राष्ट्रीय दामाद को हम जानते हैं. जानते तो तुम भी होगे गुरू.
4: ननंद भौजाई का रिश्ता पुरानी फिल्मों के साथ खतम हो गया. वो जो मल्होत्रा और पुरी फैमिली वाले सीरियल्स में दिखती हैं. ओरिजनल नहीं हैं
5: जीजा नखरे के लिए मशहूर होते हैं. और पता है कि जीजा को हिंदी में क्या कहते हैं?
6: साला ऐसी जीव है जो अब गाली की तरह यूज होने लगा है. घरों में कम फिल्मों में ज्यादा मिलते हैं साले. अभी नई पिच्चर आई है न साला खड़ूस.
7: साली का रिश्ता न होता भोजपुरी गानों से रस न टपकता. देवर भाभी के बाद साली ने ही इज्जत बचाई है.
8: मामा और भांजे की बहुत भयंकर जोड़ी होती है. वेस्ट यूपी के किसी गांव में चले जाओ. जहां मिलते हैं भांजा और मामा वहीं गिर पड़ता है हंगामा.
9: भतीजा का नाम लो तो अखबार की सुर्खियां दिमाग में घूमती है. भाई भतीजावाद और भतीजे ने चाचा से लड़ाई की टाइप से. बात ये है कि असल में चाचा भतीजों में बनती बहुत कम है.
10: सास का नाम बहू के इतनी देर बाद लेने के लिए सॉरी. लेकिन ससुर से पहले लिख दिया है.
11: अक्सर ऐसा होता है कि ससुर जी पूरे घर के मुखिया होते हैं. इसलिए उनका नाम सबसे आखिर में रखा है.
हम अपनी तरफ से जितना जानते थे, कुछ बता दिए हैं. आगे तुम जो जानते हो वो बताओ. उसको आगे बढ़ाएंगे.

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