साल 2004 में मनमोहन सिंह देश के प्रधानमंत्री बने थे. उसी साल एक और चीज हुई थीजिसने हिंदुस्तान के इतिहास पर असर डाला. तब मोबाइल इतना आम नहीं हुआ था. तो प्रेमीका ख़त आने पर लड़कियां उसे चूमकर सीने के किसी संवेदनशील कोने में सजा लेती थीं.जिन लड़कों की मूंछों पर पहली बार की हरियाली आनी जस्ट शुरू हुई थी. उन सबके लिएयादगार साल था ये. देश के किसी भी कोने में जाती ट्रेन में बीच में मांग खोले खासहेयर स्टाइल में लड़के नजर आते थे. इस पीढ़ी ने सलमान खान और भूमिका चावला की फोटोफ्रेम कराकर उसकी पूजा शुरू कर दी थी. इसी साल फिल्म आई थी 'तेरे नाम'. जिसके गानेहर प्रेम कहानी को मुकम्मल करते थे. लड़की का पीछा करने से लेकर दुखद अंत तक हरगाना उस पीढ़ी को रटा हुआ है. बस अतीत का बटन दबाकर प्ले करना पड़ेगा और रिकॉर्डबजने लगेगा "तुमसे मिलना... बातें करना...बड़ा अच्छा लगता है."प्रेमियों को ये संजीवनी गीतकार समीर अनजान ने सौंपी थी.Image: Facebookसमीर के किस्से कम मशहूर हैं लेकिन उनके गानों की तरह ही जानदार हैं. उनकी एकपंचलाइन है. "हर गीत के पीछे एक कहानी है." समीर का पैदा हुए तो नाम था शीतलापांडे. प्यार का नाम घर में मम्मी पापा ने रखा राजन. आगे चलकर समीर हो गए. इनकेपापा कौन? उनके नाम भले अनजान (लाल जी पांडे) था लेकिन वो संगीत के शौकीनों के लिएअनजान नहीं हैं. अपने टाइम के टॉप गीतकारों में शुमार होता है उनका. तो समीर बतातेहैं कि वो जो कुछ भी हैं अपने पिता की वजह से हैं. उन्होंने ही राह दिखाई. लेकिनइनके करियर के दिनों में पापा का नाम इनके काम के साथ जबरदस्ती चिपकाया जा रहा था.कहीं कहीं तो वह शक इतना बढ़ा कि अपनी क्रिएटिविटी प्रूव करने के लिए ऑन द स्पॉटगाना लिखना पड़ा.ये दौर लंबा नहीं चला. 1983 में बेखबर फिल्म से करियर का आगाज़ हुआ. जब समीर नेअपने को साबित कर लिया तो आगे गिनीज बुक में सबसे ज्यादा गाने लिखने का रिकॉर्डदर्ज करवा के भी नहीं रुके. पिछले साल 17 फरवरी को उनको ये सम्मान हासिल हुआ था.बीच में कभी कभी कंट्रोवर्सी का शिकार भी हुए. उन पर लिरिक्स चुराने का आरोप लगा.आदेश श्रीवास्तव ने उन पर इल्जाम लगाया था कि 'हमको दीवाना कर गए' का टाइटल सॉन्गउनके लिरिक्स से कॉपी किया है. तो समीर ने कहा कि बोलने से क्या होगा, प्रूव करनापड़ेगा. डेमोक्रेसी है. कोई भी किसी के ऊपर कैसा भी आरोप लगा सकता है.उदित नारायण के साथ, तस्वीर-फेसबुकसमीर ने लोगों को बनाया है. अलका यागनिक, उदित नारायण, कुमार शानू, सोनू निगम. इनसब लोगों को समीर के गीतों ने बनाया है. लेकिन समीर खुद क्या बनने चले थे? वहीजिसकी तैयारी आज भारत का अधिकांश युवा कर रहा है. बैंकिंग की तैयारी. समीर की नौकरीतो बैंक में लग भी गई थी. इनके दादा बैंक में थे. पापा चाहते थे कि बेटा चार्टर्डएकाउंटेंट बने. इसलिए कॉमर्स की मास्टर डिग्री भी दिलवाई. लेकिन बैंक में लग जानेके बाद समीर को लगा कि बड़ी पकाऊ जगह है यार. यहां जिंदगी का सबसे ज्यादा एक्टिवहिस्सा कैसे काटा जा सकता है? तो निकल लिए मुंबई.आनंद मिलिंद की जोड़ी के साथइतने प्यारे गाने इनकी कलम से निकले कैसे? इसका राज समीर को उनके पापा ने बताया था.कहा था कि "तुम गाने नहीं लिखते. ये किसी का प्यार हैं. प्यार जब खयालों की शक्लमें ढलता है तो गानों के रूप में बाहर आता है." समीर की खुद की प्रेम कहानी का बड़ाजोर है उन्हें बनाने में. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि "कोई ऐसा नहीं जिसेप्यार न हुआ हो. सबको होता है, मुझे भी हुआ. लेकिन मुझे अपना करियर बनाने के लिएउसे छोड़कर जाना पड़ा. कामयाब होने के बाद लौटा तो वो नहीं थी. उसकी डेथ हो चुकीथी. मेरी सफलता में उसका बहुत बड़ा हाथ है. उसका नाम बताकर छवि धूमिल नहीं करूंगा."देश के मक़बूल गीतकार समीर के फेवरेट हमपेशा कौन लोग हैं? समीर बताते हैं किशैलेंद्र और साहिर लुधियानवी. उनसे काफी कुछ सीखा. और आनंद बख्शी के लिखे एक गानेसे जलन जैसी है. चिट्ठी आई है, नाम फिल्म का. कहते हैं काश ऐसा गाना लिखने कीसिचुएशन मुझे मिली होती.अपनी बायोग्राफी पेश करते हुएसिचुएशन की बात की जाए तो समीर इंडस्ट्री के अंदर का एक भेद खोलते हैं. कान इधरलाओ, बताएं. गाने कैसे और किस सिचुएशन में लिखे जाते हैं? समीर के मुताबिक हरगीतकार के पास 90 परसेंट गानों का ऐसा कलेक्शन होता है जो कभी यूज नहीं होता. हरबार गाने लिखने का तरीका लगभग एक होता है. डायरेक्टर पूरी कहानी सुनाता है. उसमेंमार्क करके बता देता है कि यहां यहां ये सीन हैं, ये सिचुएशन है और यहां एक गानाचाहिए. बस उसी पर लिख दिया जाता है. कई बार गाने की कंपोजीशन के समय वहीं बैठे बैठेलिरिक्स चेंज कराई जाती है. ये ऐसा है जैसे शैतान की बेगार. बहुत चैलेंजिंग काम है.लेकिन है तो काम ही, करना पड़ेगा.संगीतकार जोड़ी लक्ष्मीकांत प्यारेलाल के साथनदीम श्रवण की जोड़ी समीर की फेवरेट संगीतकार जोड़ी है. उनके साथ काम का एक यादगारकिस्सा समीर अक्सर सुनाते हैं. साजन फिल्म की शूटिंग पूरी हो चुकी थी. लेकिन उसमेंकोई टाइटल सॉन्ग नहीं था. पूरी फिल्म देखकर लग रहा था कि नहीं यार, इसमें टाइटलसॉन्ग तो होना ही चाहिए. लेकिन कहीं जगह नहीं मिल रही थी गाना डालने की. तो एक दिननदीम श्रवण के साथ घूमते हुए "देखा है पहली बार साजन की आंखों में प्यार" कीलिरिक्स दिमाग में आईं. संगीतकार जोड़ी को बताया, उनको पसंद आ गया. प्रड्यूसर कोबताया तो उखड़ गए. कहा कि सलमान और माधुरी भला क्यों डेट्स देंगे इसे शूट करने केलिए? लेकिन प्रड्यूसर साब को बुलाया गया गाना सुनने के लिए. सलमान और माधुरी को भी.वो दोनों बड़े खुश हुए. शेड्यूल बना और सात घंटे के लगातार शूट के बाद गाना फिल्ममें आ गया.कायदे से कामयाब करियर की शुरुआत आशिकी से हुई. साल 1990 था. ये फिल्म केवल अपनेगानों की वजह से हमेशा याद रखी जाएगी. फिर साजन, दीवाना, बेटा, दिलवाले, बरसात,राजा हिंदुस्तानी, संघर्ष, सिर्फ तुम, मन, कुछ कुछ होता है, धड़कन, कसूर, राज़, हांमैंने भी प्यार किया, तेरे नाम, धूम, भूल भुलैया, सांवरिया के गानों से लेकर हिमेशरेशमिया के तेरा सुरूर तक समीर का सुरूर कामयाब रहा. दीवाना और हम हैं राही प्यारके गानों के लिए फिल्म फेयर अवॉर्ड मिल चुका है. आज जवान हो चुकी पीढ़ी में शायद हीकोई ऐसा हो जिसने उनके गाने न गुनगुनाए हों. छोड़ते हैं आपको उनके एक गाने के साथ.https://www.youtube.com/watch?v=Fb6kw36Ap-w--------------------------------------------------------------------------------ये भी पढ़ें:समीरः 'मन में आता है कि क्या इस नई पीढ़ी के आगे मुझे हथियार डाल देने चाहिए..'आपको मनोज बाजपेयी याद हैं, नवाज और इरफान भी याद हैं, तो विनीत कुमार क्यों नहींलैजेंडरी एक्टर ओम प्रकाश का इंटरव्यू: ऐसी कहानी सुपरस्टार लोगों की भी नहीं होती!तो क्या राजा हरिश्चंद्र नहीं थी भारत की पहली फिल्म?राहुल रॉयः जिसकी 'आशिकी' ने 90s के दौर की जवानी को सपनों में कैद किया था27 साल बाद 102 Not Out में साथ दिखेंगे Amitabh Bachchan और Rishi Kapoor