ये ललित शर्मा हैं, दिल्ली में रहते हैं. फेसबुक पर एक ग्रुप चलाते हैं, नाम हैजनमत. ये हमारे टाइम के उन लोगों में से हैं जो अपने बच्चों से भी ज्यादा युवा होरखे हैं. ज्यादा कूल हैं. यारी-दोस्ती निभाते हैं. और मजाक-मस्ती करते हैं. इसकार्ड का किस्सा उन्हें से जुड़ा है क्योंकि ये कार्ड उन्होंने ही बनाया था.--------------------------------------------------------------------------------कुछ महीने पहले की बात है, अपने दोस्तों के साथ आगरा जा रहे थे. ऐसे ही चुहल चल रहीथी. कहा गया कि कुछ रोज़ में ऐसा होगा कि लोग शादियों में नहीं आएंगे, पेटीएम सेशादी की बधाइयां स्वीकारी जाएंगी, माने नकद पैसों की जगह, उपहार की जगह लोग पेटीएमकरेंगे. मिठाइयां भी डिजिटल मंगा ली जाएंगी. ललित जी को इस बात पर आइडिया आया.ग्राफिक डिजाइनिंग में उनका हाथ लगता है ही. आते ही शादी का एक कार्ड बना डाला.इसमें दिखाया गया कि उपहार आप पेटीएम से भेज सकते हैं. शादी में न आ पाए तोमिठाइयां सोडेक्सो से ले सकते हैं. जगह का नाम रखा जनमत लॉन. पहले अपनी एकरिश्तेदार का नाम कार्ड में लिखने जा रहे थे, फिर रैंडम नाम लिख दिए. बताते हैं येतक नहीं देखा था कि जो तारीख लिख रहे हैं, वो दिन से मैच कर भी रही है या नहीं. फिरक्या हुआ? कार्ड रिवाजानुसार वायरल हो गया. तमाम वेबसाइट्स ने स्टोरीज की. पेजेज परतस्वीर शेयर हुई. पेटीएम कुछ महीने बीते फिर एक वो दिन आया जब देश के प्रधानमंत्रीने हजार-पांच सौ के पुराने नोट बंद कर दिए. रुपये की कमी पड़ने लगी, लोगों के हाथमें पैसे नहीं हैं. खुल्ले की दिक्कत है, काम नहीं चलता. काम निकालना होता है तोपेटीएम याद आता है. सब्जी भी पेटीएम से खरीदनी होती है. सोडेक्सो जैसे ग्रुप्स कीपौ-बारह हो गई. अब सच में ये दिन आ गए कि किसी के ब्याह में जाइए तो शगुन के पैसेट्रांसफर करने होते हैं. गिफ्ट ऑनलाइन मंगाने पड़ते हैं. इस कार्ड में जो लिखा था,वो हकीकत बन ही गया. अब एक बार तारीख पर गौर कीजिए. बीस नवंबर. बनाने वाले को भीनहीं पता था. ठीक उसी समय पैसे का अकाल चरम पर होगा. मजाक भी कभी-कभी सच निकल जातेहैं. और ये वाला मजाक ऐसे सच निकला कि हम सब भुगत ही रहे हैं.--------------------------------------------------------------------------------बारात में आना जरूरी नहीं, Paytm से पैसे दो Sodexo से मिठाई लो