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जो यहां के लिए आम है, उस बात पर राष्ट्रपति की कुर्सी जा रही है

कोरिया काग़ज में पढ़िए अविश्वसनीय पॉलिटिकल स्कैंडल, छात्रों का प्रोटेस्ट कैसे सारे देश का आंदोलन बन गया.

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Source-si.wsj.net
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लल्लनटॉप
21 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 23 नवंबर 2016, 07:42 AM IST)
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साउथ कोरिया. यहां से लगभग पांच हजार किलोमीटर दूर. कोरिया हमारे लिए क्या है? सैमसंग और किमची? वो जगह जहां के मर्द भी मेकअप में खूब हाथ आजमाते हैं. लेकिन अब कोरिया को और पास से जानने का मौक़ा है. सत्यांशु दी लल्लनटॉप के दोस्त हैं. JNU के कोरियाई अध्ययन केंद्र में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. अभी कोरिया फ़ॉउंडेशन रिसर्च फेलो के तौर पर सौउल नेशनल यूनिवर्सिटी, साउथ कोरिया में काम कर रहे हैं. कोरियाई साहित्य और अनुवाद इनकी रिसर्च के सब्जेक्ट्स हैं. घूमने-फिरने, तस्वीरें लेने और क्रिकेट​ में दिलचस्पी रखते हैं. सत्यांशु हमारे लिए कोरिया के हाल लिख भेजते हैं. क्योंकि चिट्ठी साउथ कोरिया से आती है. इसलिए नाम है कोरिया कागज. आज पढ़िए दूसरी किस्त.
Satyanshu

क्यों उतरे लाखों लोग सौउल की सड़कों पर

लोग तो अपने यहां भी सड़कों पे हैं, लाइनों में हैं बैंकों की, पर क्या हो रहा है साउथ कोरिया में कि लाखों की तादाद में लोग सड़कों पर उतर आएं हैं और ऐसा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं जैसा दशकों में नहीं हुआ?

'कोरिया कागज़' के इस दूसरे अंक में आज बात करेंगे यहां चल रहे अविश्वसनीय पॉलिटिकल स्कैंडल की.




President Park Geun-Hye Source - korea.net

पार्क गन ह्ये Source - korea.net

आजकल एक बड़ा राजनीतिक संकट छाया हुआ है यहां, लोग चाहते हैं कि राष्ट्रपति  स्टेप डाउन करें और तुरंत करें. कोरिया की पहली महिला प्रेसिडेंट, पार्क गन ह्ये फंस गई हैं बड़ी मुश्किल में. मामले को शुरू हुए कुछ दिन हो चुके हैं. खबर है कि प्रेसिडेंट पार्क की एक हमराज मिस छ्वे सुन शिल ने काफी करप्शन फैला रखा था. वो सैमसंग सरीखे बड़ी कंपनियों से प्रेसिडेंट पार्क से अपनी करीबी का फायदा उठाते हुए करीब 70 मिलियन डॉलर के आस-पास ऐंठ चुकी थीं.
न सिर्फ इतना, सुना है कि देश और सरकार की गोपनीय नीति और राष्ट्रपति की स्पीच के ड्राफ्ट भी पहले मिस छ्वे के पास ही पहुंचते थे. और तो और मिस छ्वे ने अपनी बेटी के एडमिशन के लिए कोरिया की एक जानी-मानी यूनिवर्सिटी (Ehwa Woman's University) का एडमिशन प्रोसेस भी रिग करवाया था. ये आखिरी वाला काम ही अंत की शुरुआत बना गया. यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स ने मिस छ्वे के खिलाफ प्रोटेस्ट किया. और इन्वेस्टिगेशन शुरू हुई जो कि अब और भी बड़े लेवल पर जारी है. और हर रोज नए खुलासे हो रहे हैं.
करप्शन स्कैंडल कोई नई बात नहीं है यहां के लोगों के लिए. इससे पहले भी बड़े-बड़े घोटाले हुए हैं और कोरिया के सारे पूर्व राष्ट्रपति इसमें फंसते रहे हैं, जी हां, 'सारे पूर्व राष्ट्रपति'. तो ऐसा क्या हुआ इस बार कि लोग इसे पचा नहीं पा रहे हैं? असल में लोग इस बात से ज़्यादा परेशान नहीं हैं कि प्रेसिडेंट पार्क करप्ट हैं, लोग तो इसलिए बौखलाए हुए हैं कि वो तर्कशून्य तरीके से करप्ट हैं और अनजान और बेसमझ होकर अपनी सरकार चला रही हैं. और प्रेसिडेंट पार्क अपनी सरकार और पूरा पॉलिटिकल करियर मिस छ्वे के लिए दांव पर क्यों लगा रहीं हैं. यही सबसे बड़ा सवाल है. इस सवाल के जवाब के लिए हमे इतिहास की खाक थोड़ी छाननी पड़ेगी.

कोरियाई रासपुतिन

बताया जाता है कि ‘पार्क गन ह्ये’ और ‘छ्वे सुन शिल’ की जान-पहचान ‘छ्वे सुन शिल’ के पिता ‘छ्वे थै मिन’ की वजह से हुई थी. ‘छ्वे थै
Choi Soon-sil, Source-chosun

छ्वे सुन शिल, Source-chosun

मिन’ ने एटर्नल लाइफ चर्च की स्थापना की थी और एक सूडो क्रिस्चियन कल्ट के लीडर थे. खुद को पादरी कहते थे. और लोगों का मानसिक उपचार करने का दावा करते थे. ‘पार्क की छ्वे’ से पहचान 1975 में पहली बार हुई जब वो महज 23 वर्ष की थीं. उसी समय उन्होंने अपनी मां को खोया था जिन्हें एक नार्थ कोरियाई एजेंट ने मार दिया था (हालांकि, उस एजेंट का असली टारगेट पार्क के पिता और तत्कालीन राष्ट्रपति पार्क चौंग ही थे). इसी दौरान छ्वे ने पार्क को कई चिट्ठियां लिखी और बताया कि पार्क की मां की आत्मा उनसे बात करती है. और वो भी चाहें तो अपनी मां से बात कर सकती हैं. इसमें छ्वे उनकी मदद करेंगे.
पार्क ने छ्वे को राष्ट्रपति भवन बुलवाया और वहीं से शुरू हुआ ‘पार्क गन ह्ये’ और ‘छ्वै’ परिवार के संबंध. मां की मृत्यु के बाद पार्क फर्स्ट लेडी बन चुकी थीं. और पार्क से इन संबंधों का फायदा छ्वे परिवार ने खूब उठाया. यहां तक कि ‘छ्वे थै मिन’ को कोरिया का रासपुतिन समझा जाने लगा था. 1979 में ‘पार्क चौंग ही’ की हत्या हो गई और उसके बाद पार्क और छ्वे भी पॉलिटिकल सीन से लगभग गायब से हो गए. 1994 में ‘छ्वे थै मिन’ की मृत्यु के बाद पार्क और ‘छ्वे सुन शिल’ काफी करीब आ गए.
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छ्वे थै मिन (दाईं ओर) पार्क चौंग ही से मिलते हुए पार्क गन ह्ये बीच में

विकीलीक्स के खुलासे से पता चलता है कि 2007 में जब पार्क पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव में उतरी तो तत्कालीन अमेरिकी राजदूत ने एक नोट में लिखा, "ऐसी अफवाहें जोरों पर हैं कि शुरुआती दिनों में एक पादरी का पार्क के दिलो दिमाग पर पूरा कंट्रोल था जिसकी मदद से पादरी और उसके परिवार ने अपार संपत्ति जुटाई है". 2012 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ये मुद्दा उठा लेकिन पार्क ने इसे मनगढंत अफवाह बताते हुए सिरे से खारिज कर दिया.
लेकिन अब जैसे खुलासे हो रहे हैं उससे ऐसा लगता है की ‘मिस छ्वे’ ने भी ‘प्रेसिडेंट पार्क’ पर अपने पिता जितना ही प्रभाव बना रखा है. सरकार और प्रशासन में छ्वे के दखल को देख कर लोग मान रहे हैं कि असली राष्ट्रपति तो वो ही हैं. और पार्क सिर्फ एक कठपुतली मात्र है. इस बात से लोगों में भारी गुस्सा है.

अंत की शुरुआत

कोरियाई लोग अगर किसी चीज़ की सबसे ज़्यादा परवाह करते हैं तो वो है अपने बच्चों की पढ़ाई और उनकी डिग्री. Ehwa Womans University के एडमिशन प्रोसेस में ‘मिस छ्वे’ की बेटी को अनियमित तरीके से मदद दी गयी. इस खुलासे के बाद छात्रों और स्थानीय लोगों ने खूब विरोध प्रदर्शन किए, मामला बढ़ता गया. सबसे बड़ा खुलासा हुआ 24 अक्टूबर को जब एक स्थानीय केबल TV नेटवर्क, JTBC, ने ‘छ्वे सुन शिल’ का एक टैब बरामद किया. ये टैब एक पैंडोरा का डब्बा था. इसमें प्रेसिडेंट के स्पीच ड्राफ्ट्स, कैबिनेट मीटिंग्स के ब्यौरे, राष्ट्रपति के सहायकों की नियुक्ति की जानकारियां, प्रेसिडेंट के साथ किए गए चैट मेसेजेज़, राष्ट्रपति की छुट्टियों की सभी जानकारी, और भी बहुत सारी जानकारियां थीं. और वो भी बिना किसी सिक्योरिटी एन्क्रिप्शन के. मतलब इतनी आंतरिक सूचनाएं किसी के टैब में थीं. जिसका 'टेक्निकली' सरकार और प्रशासन से कोई नाता नहीं था.
अगले ही दिन, यानी कि 25 अक्टूबर को, ‘प्रेसिडेंट पार्क’ ने राष्ट्र के नाम संदेश में देश से माफ़ी मांगी और ये माना की ‘छ्वे सुन शिल’ उनकी करीबी हैं. और उनके बुरे वक़्त में उन्हें सहारा देती रही हैं. प्रेसिडेंट पार्क ने ये भी माना कि छ्वे ने उनकी प्रेसीडेंसी के शुरुआती दिनों में उनके स्पीच के ड्राफ्ट वगेरह रिव्यु कर उनकी मदद किया करती थीं. पर यह मदद सिर्फ़ तब तक जारी रही जब तक उनका ऑफिस सुचारू रूप से चालू नहीं हो गया था. हालांकि कई खुलासों से पता चला की प्रेसिडेंट पार्क के इस कथन में पूरी सच्चाई नहीं है. ‘प्रेसिडेंट पार्क’ की अप्रूवल रेटिंग गिरकर 17% रह गयी. यहां का एक प्रमुख अख़बार 'चोसन इल्बो', जिसे पार्क का पक्षधर समझा जाता है, उसने हररोज़ डेली एडिटोरियल निकाले और प्रधान मंत्री और पूरी कैबिनेट के इस्तीफ़े की मांग कर दी.
25 अक्टूबर को ‘प्रेसिडेंट पार्क’ ने राष्ट्र के नाम संदेश में देश से माफ़ी मांगी Source-insight.co

25 अक्टूबर को ‘प्रेसिडेंट पार्क’ ने राष्ट्र के नाम संदेश में देश से माफ़ी मांगी Source-insight.co

कोरिया एक बहुत ही उथल-पुथल भरे लोकतांत्रिक इतिहास से गुज़रा है, करप्शन को भी बहुत झेला है, यहां के लोग दुनिया के सबसे सिनिकल लोगों में से हैं अगर बात पॉलिटिक्स की हो रही है तो. पर इस बार तो सबसे सिनिकल लोग भी समझ नहीं पा रहे हैं की ये हो क्या रहा है. गज़ब का गुस्सा है इस बार. 12 नवंबर को देश का सबसे बड़ा कैंडल लाइट प्रोटेस्ट मार्च निकाला गया.
Source- Reuters

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ये प्रोटेस्ट मार्च राजधानी सौउल के ग्वांगह्वामुन स्क्वायर में निकाला गया. इस मार्च में करीब 10 लाख लोगों ने शिरकत की और ये विरोध प्रदर्शन बड़े ही शान्ति पूर्वक तरीके से किया गया. बच्चे बूढ़े और जवान सभी पोस्टर और कैंडल लिए अपने राष्ट्रपति के इस्तीफ़े की मांग करते नज़र आए. लोग गा रहे थे नाच रहे थे. कैंडल लाइट वेव बना रहे थे, उनकी मानें तो लोकतंत्र का जश्न मना रहे थे. नज़ारा देखने लायक था, दुनिया के हर बड़े अख़बार ने इसे कवर किया, आप भी देखिए.
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सच क्या है और क्या नहीं ये तो पूरे मामले की जांच-पड़ताल के बाद ही सामने आएगा, फ़िलहाल, ‘छ्वे सुन शिल’ अरेस्ट हो चुकी हैं, कैबिनेट को रिशफल भी किया जा चुका है, लेकिन लोग और विपक्षी लॉ मेकर्स प्रेसिडेंट से इस्तीफ़े की मांग पर अडिग हैं. पार्क चाहती हैं की वो फरवरी 2018 तक का अपना कार्यकाल पूरा करें. बहरहाल, सौउल की ये पॉलिटिकल क्राइसिस हाल फ़िलहाल में ख़त्म होती नज़र नहीं आ रही है. हां, मगर लोगों का जश्न जारी है. लोकतंत्र का जश्न.


पहली किस्त यहां पढ़िए.

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