साउथ कोरिया. यहां से लगभग पांच हजार किलोमीटर दूर. कोरिया हमारे लिए क्या है?सैमसंग और किम्छी? वो जगह जहां के मर्द भी मेकअप में खूब हाथ आजमाते हैं. लेकिन अबकोरिया को और पास से जानने का मौक़ा है. सत्यांशु दी लल्लनटॉप के दोस्त हैं. JNU केकोरियाई अध्ययन केंद्र में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. अभी कोरिया फ़ॉउंडेशन रिसर्चफेलो के तौर पर सौउल नेशनल यूनिवर्सिटी, साउथ कोरिया में काम कर रहे हैं. कोरियाईसाहित्य और अनुवाद इनकी रिसर्च के सब्जेक्ट्स हैं. घूमने-फिरने, तस्वीरें लेने औरक्रिकेट में दिलचस्पी रखते हैं. सत्यांशु हमारे लिए कोरिया के हाल लिख भेजते हैं.क्योंकि चिट्ठी साउथ कोरिया से आती है. इसलिए नाम है कोरिया कागज. आज पढ़िए तीसरीकिस्त. और आज बात किम्छी की जिसका नाम हमने आपने भी सुन ही रखा है. सत्यांशु आज कीकिस्त में किम्छी का सारा स्वाद समेट लाए हैं.से चीज़ नहीं से 'किम्छी'!कोरियन लोग जब फ़ोटो खिंचाते हैं तो 'चीज़' नहीं 'किम्छी' बोलते हैं. कोरिया कोकिम्छी लैंड के नाम से भी जाना जाता हैं. किम्छी और कोरिया को अलग नहीं किया जासकता.तो है क्या ये बला? आओ जानेंकिम्छी कोरिया के सबसे परंपरागत फूड्स में से एक है. एक तरह से नेशनल फूड ही मानलो. ये एक किण्वित खाद्य पदार्थ यानि फरमेंटेड फूड है. कई तरह की तरकारी भाजी सेबनाया जाता है पर मुख्यत: पत्ता गोभी (नापा कैबेज) का बनता है जिसे 'बेछू किम्छी'कहते हैं. पत्ता गोभी के पत्तों में नमक, लाल मिर्च, अदरक, लहसुन का पेस्ट और बारीककटा हरा प्याज़ और मूली इत्यादि का लेप लगाकर इसे फरमेंट होने के लिए 3 से 5 दिन केलिए छोड़ दिया जाता है. (पूरी रेसिपी के लिए आप समझदार हैं, गूगल कर सकते हैं)किम्छी बनाने की इस क्रिया को 'किमजांग' कहते हैं और इसे UNESCO ने 2013 मेंIntangible Cultural Heritage of Humanity यानि मानव सभ्यता की अप्रत्यक्षसांस्कृतिक धरोहर के रूप में स्वीकार किया.किमजांग करती हुई कोरियाई महिलाएंवैसे तो साइड डिश की श्रेणी में आती है जैसे हम भारतीयों के लिए अचार होता है परकोरियन लोगों के लिए एकदम मेन डिश ही है. समझ लो कि किम्छी के बिना खाना अधूरा. कुछभी त्याग सकते हैं कोरिअन्स पर किम्छी नहीं. बताते हैं कि वियतनाम वॉर के समयकोरियाई राष्ट्रपति पार्क चौंग ही ने अमेरिकी राष्ट्रपति लिंडन बी जॉनसन सेरिक्वेस्ट की थी कि हमारे सैनिकों को खाने में किम्छी ज़रूर उपलब्ध कराई जाए. उनकाकहना था कि ये कोरियाई सैनिक बल के मोराल बूस्ट के लिए बहुत ही आवश्यक है. इतना हीनहीं, 2008 में, कोरिया की पहली महिला एस्ट्रॉनॉट, ई सो-यौन, जब अपनी पहली अंतरिक्षयात्रा पर जा रहीं थीं तो सवाल था की बिना किम्छी के कैसे रहेंगी स्पेस में? इसकेलिए किम्छी पर भारी रिसर्च हुई और बताते हैं कि किम्छी को स्पेस फ़ूड बनाने के लिएकोरिया ने कई मिलियन डॉलर खर्च किए. आपको अगर कोई ऐसा कोरियन मिले जो किम्छी न खाताहो तो तत्काल इसकी सूचना दें, ये इस सदी की सबसे बड़ी खोज हो सकती है. किम्छीकोरियाई संस्कृति का प्रतीक है और लोगों के सामाजिक जीवन में भी बड़ी अहमियत रखताहै. किसी को अपने घर आमंत्रित करते हुए "इस बार किम्छी बड़ी स्वादिष्ट बनी है हमारेघर ज़रूर पधारे", मेज़बानी करते हुए "माफ़ कीजिए आपको स्वादिष्ट किम्छी नहीं खिलापाया" जैसी भावाभिव्यक्तियां इसे दर्शाती हैं. पर अब किम्छी ग्लोबल हो चुकी है औरदुनिया भर में लोग इसे खा रहे हैं. अमेरिका की फर्स्टं लेडी मिशेल ओबामा ने तो अपनेगार्डन में नापा कैबेज उगाए, उसकी किम्छी बनाई और ट्विटर पे फ़ोटो भी शेयर की.किम्छी पर रिसर्च के लिए और इसे एक ग्लोबल प्रोडक्ट बनाने के लिए कोरियाई सरकार नेबाक़ायदा एक रिसर्च सेंटर की स्थापना भी कर दी. जिसे World Institute of Kimchi केनाम से जाना जाता है.मौसम, स्थान और इंग्रीडिएंट्स के आधार पर किम्छी के 180 से अधिक प्रकार मौजूद हैं.बेछू किम्छी (पत्ता गोभी किम्छी), काक्तूगी (मूली किम्छी), ओइसोबागी (खीरा किम्छी)और फा किम्छी (हरा प्याज़ किम्छी) आदि मुख्य रूप से लगभग हर जगह मिलती हैं. उत्तरीकोरिया चूंकि ज़्यादा ठंडा रहता है वहां की किम्छी में नमक और मिर्च की मात्रा कमरहती है वहीं दक्षिणी भाग की किम्छी में नमक, मिर्च और सीफ़ूड (अन्चोवी, श्रिम्प)सीज़निंग अधिक होती है.बेछू किम्छी (पत्ता गोभी किम्छी), काक्तूगी (मूली किम्छी), ओइसोबागी (खीरा किम्छी)और फा किम्छी (हरा प्याज़ किम्छी)किम्छी का इतिहासकोरिया नार्थ ईस्ट एशिया में है और यहां कड़ाके की ठण्ड पड़ती है. 70 % क्षेत्र पहाड़ीहैं और उपजाऊ ज़मीन बहुत कम. इस वजह से फ़ूड प्रिजर्वेशन यहां की एक अहम ज़रूरत रहाहै. इस क्षेत्र के लोग शुरू से ही सब्ज़ियों की सॉल्टिंग वगैरह में माहिर थे. नसिर्फ़ पिकल, सोयाबीन को प्रिज़र्व कर सोयाबीन पेस्ट और सोयाबीन सॉस भी बनाते थे.किम्छी बनाने की तकनीक भी यहीं से पैदा हुई. बताया जाता है कि किम्छी बनाने कीशुरुआत 7वीं शताब्दी में हुई. किम्छी के बारे में पहला लिखित रिकॉर्ड 'कोर्यो'कालावधि (918-1392) में मिलता है और माना जाता है कि उसी काल में किम्छी बनाने केलिए विभिन्न प्रकार की सब्ज़ियों का प्रयोग भी शुरू हुआ. पारंपरिक तौरतरीके से बनाईगयी किम्छी को मिट्टी के घड़ों में डालकर ज़मीन के अंदर दबाकर फ़रमेन्ट किया जाता है.आजकल विज्ञान ने तरक्की कर ली है और मार्किट में स्पेशल 'किम्छी रेफ्रीजिरेटर'उपलब्ध हैं. अब किम्छी बनाने समय नहीं लगता. हर घर में एक अलग किमची रेफ्रीजिरेटरहोता है.किमची रेफ्रीजिरेटरकिम्छी के फ़ायदेफ़ायदे तो इतने हैं की पूछो मत. सुपर फ़ूड है किम्छी. कोरियाई लोग करीब औसतन 40 पाउंड(18 किलो) किम्छी खाते हैं साल भर में. और कितने फुर्तीले और कमेरू होते हैं ये तोसबको पता ही है. कई लोगों का मानना है कि उनकी एनर्जी का राज़ ही किम्छी है. किम्छीमें विटामिन A, B, C भरा पड़ा है कैल्शियम और आयरन भी है. पर इसकी सबसे बड़ी खूबी हैइसका हैल्थी बैक्टीरिया, लैक्टोबैसीली. यह वही बैक्टीरिया है जो दही में भी होता हैऔर निहायती फ़ायदेमंद है. पाचन में मदद करता है और यीस्ट इन्फ़ेक्शन से बचाव भी करताहै. 2003 में जब SARS फैला था पूरे एशिया में तब यहां के लोगों का मानना था किकिम्छी उन्हें इन्फेक्शन से बचा सकती है, हालांकि इसका कोई वैज्ञानिक तथ्य नहीं था,लेकिन किम्छी की बिक्री 40% तक बढ़ गई थी. 2014 में जर्नल ऑफ़ मेडिसिनल फ़ूड में छपीएक स्टडी के मुताबिक किम्छी में गुणों का भंडार है और नीचे दी गयी चमत्कारिकप्रॉपर्टीज हैं इसमें.जब मैं कोरिया आया था पहली बार, मेरे लिए बहुत मुश्किल था किम्छी खाना. फरमेंटेडफ़ूड होने के कारण इसकी एक टिपिकल महक है जो मेरे लिए काफ़ी अजीब थी. पर धीरे धीरेखाना सीख गया. मैं मानता हूं कि हर जगह की आबोहवा के हिसाब से वहां का खान पान होताहै और अगर आप वहां लंबे समय से रह रहें हैं तो आपको उसे अपना लेना चाहिए. ये आपकेके लिए ही सेहतमंद सिद्ध होता है. और अब तो किम्छी मेरे फेवरेट फ़ूड्स में से एक है.अब जब इंडिया जाता हूं तो कभी-कभी मेरे दोस्त सब बोलते हैं कि तू कोरियन किम्छीजैसा महक रहा है. शायद कोरियाई कल्चर और ट्रेडिशन में मैं भी थोड़ा फ़रमेन्ट हो गयाहूं.--------------------------------------------------------------------------------जो यहां के लिए आम है, उस बात पर राष्ट्रपति की कुर्सी जा रही हैसाउथ कोरिया: यहां तो कूड़ा-कचरा पैदा करने के भी पैसे लगते हैं