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ATM की लाइन में लगने से पहले यहां जान लो, पैसे मिलेंगे या नहीं

ATM के बाहर सैकड़ों की कतार है, लेकिन पैसे किसी को नहीं मिल रहे. जानिए क्यों.

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विशाल
14 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 14 नवंबर 2016, 09:00 AM IST)
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बैकिंग सिस्टम में जो चीज लोगों की परेशानी सबसे कम करती है, इंडिया में वही चीज लोगों को सबसे ज्यादा रुला रही है. एटीएम मशीन. कितनी सही चीज है. कहीं भी हो, किसी भी हाल में हो... झट से पैसे निकाल लो. लेकिन 500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद से ये मशीनें राजाओं के उन खजानों सरीखी हो गई हैं, जिनमें होता कुछ नहीं है, लेकिन उनकी पहरेदारी हमेशा होती है, उनके आगे लाइन हमेशा लगी रहती है.

खैर, तकनीक है. इसके फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं. इन्हीं नुकसानों के बीच ये भी समझ लीजिए कि इतनी परेशानी आखिर हो क्यों रही है.

क्यों हो रही है परेशानी

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RBI कह रहा है कि देशभर में इसके चार हजार करंसी चेस्ट्स हैं. यानी वो जगहें, जहां पैसे रखे जाते हैं. वहीं से पैसे बैंकों और एटीएम तक भेजे जाते हैं. लेकिन लॉजिस्टिक्स सर्विस खराब होने की वजह से और ATM रीकैलिबरेशन में ज्यादा टाइम लगने की वजह से परेशानी हो रही है.

लॉजिस्टिक्स सर्विस और ATM रीकैलिबरेशन क्या है

लॉजिस्टिक्स सर्विस मतलब नोटों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना वगैरह. इसमें वक्त और लोगों, दोनों की जरूरत होती है. ATM रीकैलिबरेशन मतलब ATM की क्षमता दोबारा सेट करना. जैसे अभी तक ATM से हजार की नोट निकलती थी, लेकिन वो तो अब रही नहीं. ऊपर से दो हजार की नोट और आ गई. तो अब ATM की सेटिंग बदलनी पड़ेगी, ताकि दो हजार और पांच सौ के नए नोट निकल सकें. इसमें भी वक्त लगेगा.

ATM काम कैसे करता है

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हर ATM में तीन से चार ड्रॉर होती हैं. कुछ में दो ही होती हैं. इन ड्रॉर को कैसेट भी कहते हैं. इन अलग-अलग कैसेटों में 100, 500 और हजार के नोट रखे जाते थे अभी तक. नोटों की कुछ खास पहचान होती हैं, जिनकी सेटिंग ATM में कर दी जाती है. इन्हीं सेटिंग्स की वजह से ये कैसेट नोट पहचान जाते हैं और पैसे निकालते हैं. लेकिन अब ATM से पांच सौ की नई नोट और दो हजार की नोट निकालने के लिए कैसेट की सेटिंग्स बदलनी पड़ेगी. तभी सही कॉम्बिनेशन में पैसा निकल पाएगा मशीन से.

जब तक इन ATM कैसेटों को 500 की नई नोट और दो हजार की नोट के हिसाब से दोबारा सेट नहीं कर दिया जाता, तब तक इनसे 100 के नोट ही निकलेंगे. यानी आप चाहें पांच सौ निकालें, चाहें हजार या दो हजार, रुपए आएंगे सौ-सौ के नोटों में ही.

तो 100 की नोट निकलने में क्या परेशानी है

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आप सोचेंगे कि ये तो अच्छी बात है, क्योंकि 100 का नोट लेने से तो कोई मना नहीं करेगा. लेकिन दोस्त, दिक्कत ये है कि ATM की हर कैसेट में सिर्फ ढाई हजार नोट ही आते हैं. ऐसे में जब तीनों कैसेट 100, 500 और हजार के ढाई-ढाई हजार नोटों से फुल होती थीं, तो ATM में कुल 40 लाख रुपए रहते थे. अब अगर तीनों कैसेटों में 100 के ढाई-ढाई हजार नोट भी भर दिए जाएं, तो सिर्फ साढ़े सात लाख रुपए ही आएंगे.

दूसरी बात, अलग-अलग कैसेट अलग-अलग नोटों के लिए बनी होती हैं, तो सभी कैसेट 100 की नोटों से भरी भी नहीं जा सकतीं. ऐसे में अभी हर ATM में सिर्फ दो से ढाई लाख रुपए ही भरे जा रहे हैं. अब अगर नए नियम के हिसाब से हर कोई ढाई हजार रुपए निकालने लगे, तो सिर्फ 100 लोगों के ट्रांजैक्शन करते ही ATM खाली हो जाएगा. अगर साढ़े सात लाख रुपए भी डाल दिए जाएं, तब भी 300 लोगों से ज्यादा किसी का भला नहीं हो सकता.

इस सबकी शुरुआत कहां से हुई

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बैंकर्स का कहना है कि अगर सरकार और RBI नोट बंद वाले फैसले के दो महीने पहले से 100 के नोटों का सर्कुलेशन बढ़ा देती, तो अभी इतनी परेशानी नहीं होती. टेक्नॉल्जी संभालने वाले एक बैंकर का कहना है कि अगर 2000 के नोट को पहचानने वाले पॉइंटर्स पहले ही दे दिए जाते, तो उसी हिसाब से ATM मशीनें बदल दी जाती हैं. लेकिन, बिना बैकअप और बिना तैयारी के फैसला ले लिया गया और अब लोग भुगत रहे हैं.

कई बैंकों को नोट बंद होने वाली बात नहीं बताई गई थी और इसीलिए अब वो कोई मदद नहीं कर पा रहे हैं. एक नेशनल बैंक के CEO ने कहा है कि बैंकों को इसकी जानकारी पहले दी जानी चाहिए था, लेकिन बैंकों, RBI और सरकार के बीच कोई कॉर्डिनेशन नहीं था.

अभी कितना वक्त लगेगा परेशानी कम होने में

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भारत के 650 शहरों में कुल दो लाख 20 हजार ATM हैं. इन तक पैसे पहुंचाने का काम कैश लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री करती है. इस इंडस्ट्री में 40 हजार लोग काम करते हैं और 8800 कैश वैन हैं, जो पैसे इधर-उधर ले जाती हैं. ये 40 हजार लोग पिछले कई दिनों से ओवरटाइम कर रहे हैं. एक दिन में ज्यादा से ज्यादा 25 हजार ATM तक पहुंचा जा सकता है और ये इंडस्ट्री जितना कर सकती है, कर रही है.

ATM की क्षमता बढ़ाने वाला जो काम है, उसमें तीन सप्ताह तक लग सकते हैं. ये कोई अंदाजा नहीं है, बल्कि वित्त मंत्री अरुण जेटली खुद ये स्वीकार कर सकते हैं. जब ATM मशीन बनाने वाली कंपनियों को नई नोटों की जानकारी दे दी जाएगी, उसके बाद ही इंजीनियर कैसेटों में बदलाव कर सकेंगे और ये सभी 2.20 लाख ATM मशीनों में होना है. एक और बात, मेट्रो शहरों के 50% ATM और कस्बाई इलाकों के 75% ATM मशीनें काम नहीं करती हैं.


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