नई शिक्षा नीति यानी न्यू एजुकेशन पॉलिसी. शिक्षा नीति का मतलब ये समझिए कि कब तकस्कूलों में पढ़ना है, ग्रेजुएशन कितने साल को होगा, बोर्ड की परीक्षाएं कौन सीक्लास में होंगी. इस तरह के नियम तय करने वाली नीति. और इन नियमों की एक नई नीतिमोदी सरकार लेकर आई है, जिसे न्यू एजुकेशन पॉलिसी, 2020 नाम दिया गया है. नई शिक्षानीति 2020 के ड्राफ्ट को 29 जुलाई को केंद्रीय कैबिनेट ने मंजूरी दी. हालांकि सरकारको ये खयाल अचानक से आया हो, ऐसा नहीं है. 2014 के लोकसभा चुनाव में नई शिक्षा नीतिबीजेपी के घोषणपत्र का हिस्सा था. और सरकार में आने के बाद भी बीजेपी ने ये एजेंडाछोड़ा नहीं. नई शिक्षा नीति तैयार करने के लिए 31 अक्टूबर, 2015 को सरकार ने पूर्वकैबिनेट सचिव टी.एस.आर. सुब्रह्मण्यन की अध्यक्षता में पांच सदस्यों की कमिटी बनाई.कमिटी ने अपनी रिपोर्ट दी 27 मई, 2016 को. इसके बाद 24 जून, 2017 को ISRO के प्रमुखरहे वैज्ञानिक के कस्तूरीगन की अध्यक्षता में नौ सदस्यों की कमेटी को नई शिक्षानीति का ड्राफ्ट तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. 31 मई, 2019 को ये ड्राफ्टएचआरडी मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक को सौंपा गया. ड्राफ्ट पर एचआरडी मंत्रालय नेलोगों के सुझाव मांगे थे. इस पर दो लाख से ज्यादा सुझाव आए. और इसके बाद 29 जुलाईको केद्रीय कैबिनेट ने नई शिक्षा नीति के ड्राफ्ट को मंजूरी दे दी. शिक्षा कीनीति में बदलाव की जरूरत क्यों? नई शिक्षा नीति में क्या बदलाव हुए, इसकी बातेंविस्तार से आपको बताएंगे. लेकिन इसे लाने की जरूरत क्यों पड़ी, अभी वाले सिस्टम मेंक्या खराबी थी? इसके पीछे दलील है कि बदलते वक्त की जरूरतों को पूरा करने के लिए,शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए, इनोवेशन और रिसर्च को बढ़ावा देने और देश कोज्ञान का सुपर पावर बनाने के लिए नई शिक्षा नीति की जरूरत है. अभी देश में जोशिक्षा नीति चल रही है, वो 1986 में राजीव गांधी सरकार के दौरान लागू की गई थी औरउसके बाद 1992 में इसमें थोड़ा बदलाव किया गया था. लेकिन वो सिस्टम अब मोदी सरकारबदल देगी.. Cabinet Briefing @PrakashJavdekar @DrRPNishank https://t.co/47u5S0pH6f— Dr. Ramesh Pokhriyal Nishank (@DrRPNishank) July 29, 2020 मानव संसाधन विकासमंत्रालय अब शिक्षा मंत्रालय मानव संसाधन मंत्रालय का नाम बदलकर शिक्षा मंत्रालय करदिया है. अब एचआरडी मंत्री को शिक्षा मंत्री कहा जाएगा. जब देश आजाद हुआ, तब सेलेकर 1985 तक शिक्षा मंत्री और शिक्षा मंत्रालय ही हुआ करता था, लेकिन फिर राजीवगांधी सरकार ने इसका नाम बदलकर मानव संसाधन मंत्रालय कर दिया था. इस नाम को लेकरआरएसएस से जुड़े संगठन भारतीय शिक्षण मंडल ने आपत्ति जताई थी और साल 2018 केअधिवेशन में इस नाम बदलने की मांग उठाई थी. दलील ये थी कि मानव को संसाधन नहीं मानसकते, ये भारतीय मूल्यों के खिलाफ है. क्या-क्या बदलेगा? नई शिक्षा नीति 2020लागू होने के बाद क्या बदलाव आएगा, इसकी मोटी-मोटी बातें आपको बिंदुवार बताते हैं.पहले बात करते हैं उच्च शिक्षा में बदलावों की. उच्च शिक्षा मतलब 12वीं के बाद कीकॉलेज- यूनिवर्सिटी की पढ़ाई. #मल्टीपल एंट्री एंड एक्जिट होगा- इसका मतलब ये हैकि मान लीजिए किसी ने बीटेक में एडमिशन लिया और दो सेमेस्टर बाद मन उचट गया कुछ औरपढ़ने का. तो उसका साल खराब नहीं होगा. एक साथ के आधार पर सर्टिफिकेट मिलेगा और दोसाल पढ़ने पर डिप्लोमा मिलेगा, कोर्स पूरा करने पर डिग्री मिलेगी. इस तरह कीव्यवस्था होगी. और कहीं और भी एडमिशन लेने के लिए ये रिकॉर्ड कंसीडर किया जाएगा.इसे सरकार की पॉलिसी में क्रेडिट ट्रांसपर कहा गया है. आपका कोर्स पूरा नहीं कियालेकिन जितना किया उसका क्रेडिट आपको मिल जाएगा. #NEP2020 The UG degree will have multiple exit options. An Academic Bank ofCredit shall be established which would digitally store the academic creditsearned from various recognized HEIs so that the degrees from an HEI can beawarded taking into account credits earned. pic.twitter.com/yf5h2ai6UI— Ministry of HRD (@HRDMinistry) July 29, 2020 #ग्रेजुएशन अभी बीए, बीएससी जैसेग्रेजुएशन कोर्स तीन साल के होते हैं. अब नई वाली पॉलिसी में तो तरह के विकल्पहोंगे. जो नौकरी के लिहाज से पढ़ रहे हैं, उनके लिए 3 साल का ग्रेजुएशन. और जोरिसर्च में जाना चाहते हैं, उनके लिए 4 साल का ग्रेजुएशन, फिर एक साल पोस्टग्रेजुएशन और 4 साल का पीएचडी. एमफिल की जरूरत भी नहीं रहेगी. एम फिल का कोर्स भीखत्म कर दिया गया है. #मल्टी डिसिप्लिनरी एजुकेशन होगी यानी कि कोई स्ट्रीम नहींहोगी. कोई भी मनचाहे सब्जेक्ट चुन सकता है. यानी अगर कोई फिजिक्स में ग्रेजुएशन कररहा है और उसकी म्यूजिक में रुचि है, तो म्यूजिक भी साथ में पढ़ सकता है. आर्ट्स औरसाइंस वाला मामला अलग अलग नहीं रखा जाएगा. हालांकि इसमें मेजर और माइनर सब्जेक्ट कीव्यवस्था होगी. # कॉलेजों को ग्रेडेड ऑटोनॉमी होगी. अभी एक यूनिवर्सिटी सेएफिलिएटेड कई कॉलेज होते हैं, जिनकी परीक्षाएं यूनिवर्सिटी कराती हैं. अब कॉलेज कोभी स्वायत्ता दी जा सकेगी. # उच्च शिक्षा के लिए सिंगल रेग्युलेटर बनाया जाएगा.जैसे अभी यूजीसी, एआईसीटीई जैसी कई संस्थाएं हायर एजुकेशन के लिए हैं. अब सबकोमिलाकर एक ही रेग्युलेटर बना दिया जाएगा. मेडिकल और लॉ की पढ़ाई के अलावा सभीप्रकार की उच्च शिक्षा के लिए एक सिंगल रेग्युलेटर बॉडी भारतीय उच्च शिक्षा आयोग(HECI) का गठन किया जाएगा. # नई शिक्षा नीति का लक्ष्य व्यवसायिक शिक्षा सहितउच्चतर शिक्षा में GER (सकल नामांकन अनुपात) को 26.3 प्रतिशत (2018) से बढ़ाकर 2035तक 50 प्रतिशत करना है. जीईआर हायर एजुकेशन में नामांकन मापने का एक माध्यम है.हायर एजुकेशनल इंस्टीट्यूट्स में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी. #NEP2020Targeting a 50% Gross Enrolment Ratio (GER) in higher #education by 2035. Whilea number of new institutions may be developed to attain these goals, a largepart of the capacity creation will be achieved byconsolidating/expanding/improving existing HEIs. pic.twitter.com/fVxPeKmkip —Ministry of HRD (@HRDMinistry) July 29, 2020 # देशभर की हर यूनिवर्सिटी के लिएशिक्षा के मानक एक समान होंगे. यानी सेंट्रल यूनिवर्सिटी हो या स्टेट यूनिवर्सिटीहो या डीम्ड यूनिवर्सिटी. सबका स्टैंडर्ड एक जैसा होगा. ऐसा नहीं होगा कि बिहार केकिसी यूनिवर्सिटी में अलग तरह की पढ़ाई हो रही है और डीयू के कॉलेज में कुछ अलगपढ़ाया जा रहा है. और कोई प्राइवेट कॉलेज भी कितनी अधिकतम फीस ले सकता है, इसके लिएफी कैप तय होगी. # रिसर्च प्रोजेक्ट्स की फंडिंग के लिए अमेरिका की तर्ज पर नेशनलरिसर्च फाउंडेशन बनाया जाएगा, जो साइंस के अलावा आर्ट्स के विषयों में भी रिसर्चप्रोजेक्ट्स को फंड करेगा. # आईआईटी, आईआईएम के समकक्ष बहुविषयक शिक्षा एवंअनुसंधान विश्वविद्यालय (एमईआरयू) स्थापित किए जाएंगे. # शिक्षा में टेक्नोलॉजी केसही इस्तेमाल, शैक्षिक योजना, प्रशासन और प्रबंधन को कारगर बनाने तथा वंचित समूहोंतक शिक्षा को पहुंचाने के लिए एक स्वायत्त निकाय राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकीमंच (NETF) बनाया जाएगा. # विश्व की टॉप यूनिवर्सिटीज को देश में अपने कैम्पसखोलने की अनुमति दी जाएगी. स्कूलों में क्या बदलेगा? ये तो हुई उच्च शिक्षा की बात.अब बात करते हैं स्कूली शिक्षा में बदलावों की बात. यानी नर्सरी से लेकर 12वींतक. #अभी हमारा स्कूली सिस्टम 10+2 है. यानी 10वीं तक सारे सब्जेक्ट और 11वीं मेंस्ट्रीम तय करनी होती है. नए सिस्टम को 5+3+3+4 बताया गया है. इसमें स्कूल के आखिरचार साल यानी 9वीं से लेकर 12वीं तक एकसमान माना गया है, जिसमें सब्जेक्ट गहराई मेंपढ़ाए जाएंगे, लेकिन स्ट्रीम चुनने की जरूरत नहीं होगी मल्टी स्ट्रीम पढ़ाई होगी.फिजिक्स वाला चाहे तो हिस्ट्री भी पढ़ पाएगा. या कोई एक्ट्रा करिक्यूलम एक्टिविटी,जैसे म्यूजिक या कोई गेम है, तो उसे भी एक सब्जेक्ट की तरह ही शामिल कर लिया जाएगा.ऐसी रुचि वाले विषयों को एक्स्ट्रा नहीं माना जाएगा. # सभी बच्चे 3, 5 और 8 कीस्कूली परीक्षा देंगे. ग्रेड 10 और 12 के लिए बोर्ड परीक्षा जारी रखी जाएंगी, लेकिनइन्हें नया स्वरूप दिया जाएगा. एक नया राष्ट्रीय आकलन केंद्र 'परख' स्थापित कियाजाएगा. #NEP2020 Ensuring universal access to high-quality Early Childhood Care and#Education across the country.#ECCE will focus on developing social capacities,sensitivity, good behaviour, courtesy, ethics, personal & public cleanliness,teamwork & cooperation among children. pic.twitter.com/qQ3JVoqHW8— Ministry of HRD (@HRDMinistry) July 29, 2020 # 3 से 6 साल के बच्चों को अलगपाठ्यक्रम तय होगा, जिसमें उन्हें खेल के तरीखों से सिखाया जाएगा. इसके लिए टीचर्सकी भी अलग ट्रेनिंग होगी. # कक्षा एक से तीन तक के बच्चों को यानी 6 से 9 साल केबच्चों को लिखना पढ़ना आ जाए, इस पर खास ज़ोर दिया जाएगा. इसके लिए नेशनल मिशन शुरूकिया जाएगा. # कक्षा 6 से ही बच्चों को वोकेशनल कोर्स पढ़ाए जाएंगे, यानी जिसमेंबच्चे कोई स्किल सीख पाए. बाकायदा बच्चों की इंटर्नशिप भी होगी, जिसमें वो किसीकारपेंटर के यहां हो सकती है या लॉन्ड्री की हो सकती है. इसके अलावा छठी क्लास सेही बच्चों की प्रोजेक्ट बेस्ड लर्निंग होगी. कोडिंग सिखाई जाएगी. # स्कूलों केसिलेबस में बदलाव किया जाएगा. नए सिरे से पाठ्यक्रम तैयार किए जाएंगे और वो पूरेदेश में एक जैसे होंगे. जोर इस पर दिया जाएगा कि कम से कम पांचवीं क्लास तक बच्चोंको उनकी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाया जा सके. किसी भी विद्यार्थी पर कोईभी भाषा नहीं थोपी जाएगी. भारतीय पारंपरिक भाषाएं और साहित्य भी विकल्प के रूप मेंउपलब्ध होंगे. स्कूल में आने की उम्र से पहले भी बच्चों को क्या सिखाया जाए, ये भीपैरेंट्स को बताया जाएगा. #NEP2020 The medium of instruction (preferably) till Grade 8 & beyond, will bethe home language/mother-tongue/local language/regional language. Starting fromthe Foundational Stage, children will be exposed to different languages with aparticular emphasis on the mother tongue. pic.twitter.com/w5hM3riTpF— Ministry of HRD (@HRDMinistry) July 29, 2020 # प्री-स्कूल से माध्यमिक स्तर तकसबके लिए एकसमान पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाएगा. स्कूल छोड़ चुके बच्चोंको फिर से मुख्य धारा में शामिल करने के लिए स्कूल के इन्फ्रॉस्ट्रक्चर का विकासकिया जाएगा. साथ ही नए शिक्षा केंद्रों की स्थापना की जाएगी. नई शिक्षा नीति 2020के तहत स्कूल से दूर रह रहे लगभग 2 करोड़ बच्चों को मुख्य धारा में वापस लाने कालक्ष्य है. # बोर्ड की परीक्षाओं का अहमियत घटाने की बात है. साल में दो बार बोर्डकी परीक्षाएं कराई जा सकती हैं. बोर्ड की परीक्षाओं में ऑब्जेक्टिव टाइप क्वेशनपेपर भी हो सकते हैं. # बच्चों के रिपोर्ट कार्ड में मूल्यांकन सिर्फ टीचर हीनहीं लिख पाएंगे. एक कॉलम में बच्चा खुद मूल्यांकन करेगा और एक में उसके सहपाठीमूल्यांकन करेंगे. # स्कूल के बाद कॉलेज में दाखिले के लिए एक कॉमन इंट्रेसएक्जाम हो, इसके लिए नेशनल एसेसमेंट सेंटर बनाए जाने की भी बात है. # स्कूल सेबच्चा निकलेगा, तो हर बच्चे के पास एक वोकेशनल स्किल होगा. # एनसीईआरटी की सलाहसे, एनसीटीई टीचर्स ट्रेनिंग के लिए एक नया सिलेबस NCFTE 2021 तैयार करेगा. 2030तक, शिक्षण कार्य करने के लिए कम से कम योग्यता 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड डिग्रीहो जाएगी.#NEP2020 Teachers will be recruited through robust and transparent processes.Promotions will be merit-based, and a mechanism will be developed formulti-source periodic performance appraisals. pic.twitter.com/TY1YNTJFYw— Ministry of HRD (@HRDMinistry) July 29, 2020 # शिक्षकों को प्रभावी और पारदर्शीप्रक्रिया के जरिए भर्ती किया जाएगा. प्रमोशन योग्यता आधारित होगी. राष्ट्रीयअध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा शिक्षकों के लिए राष्ट्रीय प्रोफेशनल मानक (एनपीएसटी)2022 तक विकसित किया जाएगा. # इस नीति के जरिए 2030 तक 100% युवा और प्रौढ़साक्षरता के लक्ष्य को प्राप्त करना है. नई शिक्षा नीति की मोटी-मोटी बातें ये हीहैं. अब ये तो बहुत आदर्श स्थिति लगती है, लेकिन हमारे सरकारी स्कूलों की हालत तोहम जानते हैं. खुद सरकार के आंकड़े कहते हैं कि लगभग हर प्रदेश में स्कूलों मेंशिक्षकों की कमी है या फिर कहीं-कहीं तो स्कूल का भवन तक नहीं है. इसमें सुधार केलिए सरकार ने शिक्षा पर खर्च बढ़ाने का भी ऐलान किया है. अब जीडीपी का 6 फीसदीशिक्षा पर खर्च होगा, जो कि अभी 4.3 फीसदी के आसपास है. अभी सिर्फ नई शिक्षानीति का ड्राफ्ट को मंजूरी मिली है, अभी लागू होना बाकी है. उसके बाद भी कईइम्तिहानों से गुजरना होता है. मसलन क्या ये नई शिक्षा नीति की बातें शहरों से दूरगांव-देहात के उन बच्चों तक भी पहुंच पाएंगी? क्या जिन स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकनहीं हैं, वहां अब म्यूजिक के टीचर और वोकेशनल कोर्स और ऐसी बाकी बातें लागू होपाएंगी? --------------------------------------------------------------------------------मोदी सरकार ने नई शिक्षा नीति में क्या ऐतिहासिक बदलाव किए?