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अब ATM के बाहर लाइन मत लगाओ, माइक्रो ATM के पीछे दौड़ो

एटीएम से पैसा मिले या न मिले, लेकिन माइक्रो एटीएम से जरूर मिल जाएगा.

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विशाल
16 नवंबर 2016 (अपडेटेड: 16 नवंबर 2016, 08:08 AM IST)
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500 और हजार के नोट बैन होने के बाद से लोगों का जीना हराम हो गया है. नौकरी करने वाला दिन में नौकरी कर रहा है और रात में एटीएम के बाहर लाइन लगा रहा है. ऊर्जा मंत्री पीयूष गोयल कह रहे हैं कि एटीएम के बाहर लाइन कम होने लगी है. बात सही है. जब एटीएम में पैसा ही नहीं होगा, तो आदमी लाइन में लगकर करेगा भी क्या.

खैर, लोगों की परेशानी बताते रहे, तो पूरा आर्टिकल खत्म हो जाएगा और मुद्दे की बात नहीं हो पाएगी. तो बात ये है कि लोगों का करुण क्रंदन सुनकर सरकार ने माइक्रो एटीएम की व्यवस्था की है. हमारे यहां समस्या ये है कि लोग एक तकनीक तब तक नहीं सीखते, जब तक उसके बिना भूखे मरने या नंगे जीने की नौबत न आ जाए. उत्ती देर में दूसरी तकनीक रावण सरीखा ठठ्ठा मारते हुए आ जाती है. माइक्रो एटीएम के साथ भी ऐसा ही है. इसका यूज तो काफी पहले से हो रहा है, लेकिन जब सरकार ने इसका नाम लिया, तो लोग बौराए हुए हैं. सोच रहे हैं कि अभी एटीएम ढंग से चल नहीं रहा है और एक नया एटीएम और आ गया. लेकिन, एक बात जान लो. ये छोटू एटीएम है बड़े काम की चीज. आसान तो है ही और इससे अभी की नोट वाली समस्या भी काफी हद तक दूर हो जाएगी.

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है क्या ये माइक्रो एटीएम

माइक्रो एटीएम ऐसी डिवाइस है, जिसके जरिए आप कहीं से भी अपने अकाउंट से पैसे निकाल सकते हैं और डाल सकते हैं. आपका अकाउंट चाहे झुमरी तलैया की ब्रांच में हो या पुणे के उस मशहूर गांव में. बैंक चाहें SBI हो या HDFC. हर जगह का पैसा हर जगह से निकलेगा और कहीं से भी खाते में डाला जा सकेगा. दिखने में ये डिवाइस कुछ-कुछ वैसी ही होती है, जैसी दुकानों पर कार्ड से पेमेंट वाली मशीन होती है. अरे वही, जिससे कार्ड स्वाइप करके आप कहीं भी पेमेंट कर देते हैं. सरकार ये मशीन 'बैंकमित्र' को थमाकर गांवों में दौड़ा देती है. लोग बैंकमित्र के पास जाते हैं और अपना काम निपटा लेते हैं.

कैसे काम करती है मशीन

देखो जो बैंकमित्र होता है, वो एक साथ कई बैंकों के लिए काम करता है. तो वो ये मशीन लेकर बताए गए इलाके में जाता है. वहां लोग उसके पास आते हैं अपने-अपने डेबिट कार्ड लेकर. बैंकमित्र को कैश देकर भेजा जाता है हर जगह. जब लोग अपना कार्ड माइक्रो एटीएम में स्वाइप करते हैं, तो बैंकमित्र को उनके अकाउंट की जानकारी मिल जाती है. अगर किसी को पैसे निकालते होते हैं, तो वो मशीन में डीटेल और पासवर्ड वगैरह डाल देता है. उसके खाते से पैसा कट जाता है और बैंकमित्र उसे अपने पास से कैश दे देता है. खाते में पैसे डालने का भी यही तरीका है. अकाउंट की जानकारी बैंकमित्र को देनी होती है. वो माइक्रो एटीएम में डीटेल फीड कर देता है और कैश ले लेता है. आधार कार्ड और किसी दूसरी आईडी से भी खुद की पहचान कराकर पैसे निकाले जा सकते हैं.

इन मशीनों का ज्यादा यूज करने के पीछे सरकार का मकसद है लोगों तक पैसा पहुंचाना. जो लोग लाइन में नहीं लग पा रहे हैं, वो बैंकमित्र से अपने खाते का पैसा हासिल कर सकते हैं. माइक्रो एटीएम से पैसे निकालने के कई तरीके हैं. एक तो आप अपना डेबिट कार्ड स्वाइप करके पैसा निकाल सकते हैं. इसमें आपको मशीन पर अपना अंगूठा भी लगाना पड़ता है, जिससे किसी तरह की धोखाधड़ी न हो. अपने अकाउंट नंबर से भी आप पैसे निकाल सकते हैं. ये सारा सिस्टम आपको बैंकमित्र समझा देगा. और माइक्रो एटीएम बैंकमित्र के पास ही हो, ये जरूरी नहीं है. सरकार इसे गांव के प्रधान या इलाके की किसी दुकानदार के पास भी रखवा सकती है, जो आपके सारे काम निपटा देगा. एटीएम के मुकाबले माइक्रो एटीएम पर बैंकों को बहुत कम खर्चा करना पड़ता है.

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ये क्यों जरूरी है

देखो दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों में बैठकर आप चाहे जित्ता चिल्ला लो कि पेटीएम करो और कार्ड स्वाइप करो. लेकिन, गांवों में तो ऐसा कोई सिस्टम है नहीं. वहां एटीएम 20-25 किलोमीटर दूर होते हैं और लोगों को ढंग से चलाना भी नहीं आता. पेटीएम का क्यूआर कोड अगर किसी दुकान पर लगा मिल गया, तो लौंडे पेमेंट करने के बजाय उसमें पजल खेलने लगेंगे. वो होता है न चौखंटे में से रास्ता निकालने वाला. वही. बैंकों की ब्रांच बहुत कम होती हैं. थोड़े से लोग भी बैंक के बाहर जमा हो जाएं, तो लगता है दो-चार गांव बस गए हैं. तो इन सब दिक्कतों को झेलने के लिए सरकार एक पढ़े-लिखे राजा बाबू को माइक्रो एटीएम देकर भेज देती है गांवों में. हालांकि, ये सिर्फ गांवों के लिए ही नहीं है. अभी जिस समस्या को लेकर इनकी तादाद बढ़ाई जा रही है, उस हिसाब से शहरों में भी इसका खूब यूज किया जाएगा.

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सरकार क्या करने जा रही है

सरकार दो लाख नए माइक्रो एटीएम मार्केट में लाने जा रही है. इनमें से 1.1 लाख ग्रामीण इलाकों में भेजे जाएंगे और 90 हजार शहरी और कस्बाई इलाकों में भेजे जाएंगे. अभी हर हफ्ते करीब 70 हजार ट्रांजैक्शन होते हैं माइक्रो एटीएम से, लेकिन सरकार को लग रहा है कि जब इनकी संख्या बढ़ेगी, तो बैंकों के एटीएम नेटवर्क से दबाव कम हो जाएगा.

माइक्रो एटीएम से और क्या-क्या हो सकता है

माइक्रो एटीएम से अकाउंट से पैसा निकालने और डालने का काम तो हो ही जाता है. कुछ बैंक ऐसे भी हैं, जो माइक्रो एटीएम के जरिए खाता खुलवाने की भी सुविधा देती हैं. बैंकों में बाकी जो भी काम होते हैं, जैसे पैसे ट्रांसफर करना, अकाउंट स्टेटमेंट लेना वगैरह, वो सब भी माइक्रो एटीएम से हो जाते हैं. इसके बारे में थोड़ा और जानना हो, तो ये सरकारी ऐड देख लो. माइक्रो एटीएम के बारे में समझाने के लिए बनवाया था इसे सरकार ने.

https://www.youtube.com/watch?v=skax4Bp0F5M
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