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जानिए अरमानी ब्रैंड के कर्ता-धर्ता की स्टोरी

वो मालिक जिसके पैसों से 2 बार गांव बसाया जा सकता है.

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11 जुलाई 2019 (अपडेटेड: 11 जुलाई 2019, 12:34 PM IST)
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दाएं - वखरा स्वैग गाने का ग्रैब, बाएं - फोटो- Reuters
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की है

गुच्ची अरमानी

पीछे रोल दी जवानी

चेक कर दी ब्रैंडा वाले टैग नी

आजा दस्सा तैनू सोणिये

फैशन की होंदा

तेरा यार दा ते

वखरा स्वैग नी

- नवइंदर के स्वर. अतुकांत कविता बादशाह नामक कवि की.
गुच्ची. एक ब्रैंड. इस पर फिर कभी गुच्च करेंगे. गुच्च एक नया शब्द है. जैसे चुल्ल एक पुराना शब्द था. और लड़की के ब्यूटिफुल होने के चलते नया हो गया. अगर आपको ये चुल्ल रेफरेंस समझ में नहीं आया तो आप पुराने हो गए.
फिर लौटते हैं गुच्ची पर. उसके आगे बढ़ते हैं. अरमानी.
जॉर्जियो अरमानी ब्रेंड (फोटो- Reuters)
जॉर्जियो अरमानी ब्रेंड (फोटो- Reuters)

अरमानी भी एक ब्रैंड. इस पर आज गुच्च करेंगे. ये एक भाई साहब का नाम है. बहुत बडे़ आदमी हैं. ब्रैंड भी लग्जरी है. 66 अरब रुपये है इस ब्रैंड की कीमत. ये कित्ता रुपया है. ऐसे समझें. आंध्र प्रदेश. एक प्रदेश. 2014 में बंट गया. बना तेलंगाना. और उसकी राजधानी हुई हैदराबाद. मगर ये तो आंध्र प्रदेश की राजधानी थी. तो आंध्र को कहा गया. नई कैपिटल बनाओ. बनने लगी. सबसे मॉर्डन कैपिटल. नाम रखा गया अमरावती. कृष्णा नदी के तट पर. नई विधानसभा, सचिवालय, हजारों फ्लैट, सैकड़ों बंगले. पूरा शहर, सीवेज, पानी, बिजली, एयरपोर्ट. इन सबके लिए कई कंपनियों बैकों से सरकार ने उधार लिया. पूरे प्रोजेक्ट की टोटल कीमत. 29 अरब रुपये. अरमानी की कीमत. इसके डबल से भी ज्यादा. 66 अरब रुपये. ये उसी अरमानी की कहानी है.
# जो कठपुतली नचाता था.
# जो डॉक्टर बनना चाहता था, फिर तीन साल की पढ़ाई के बाद रास्ता बदल लिया.
# जो फौजी बन गया, मगर यहां भी नहीं टिका. हालांकि आगे का रास्ता यहीं से निकला. जिसका एक पड़ाव था, सुई धागा.
# आखिर में वो टेलर बन गया. कैंची, इंची टेप, मार्कर और नपाई.
इटली के पियाचेंज़ा शहर में अरमानी 11 जुलाई 1934 को पैदा हुए. हम इस शहर का नाम भूल सकते हैं. याद दुरुस्त करने के लिए दो फैक्ट. मिलान के पास है. बहुत पुराना है. कितना. ईसा मसीह के पैदा होने से भी दो ढाई सौ साल पहले का शहर. फौजी शहर. मॉडर्न रेफरेंस. नेपोलियन ने यहां भयानक लूट मार की. फ्रांस में मिला लिया था. दूसरे वर्ल्ड वॉर में भी खूब बम गिरे.
अब अरमानी की कहानी शुरू करते हैं. बिना व्यवधान. अरमानी तो उसका टाइटिल था. जैसे अपने यहां होते हैं. जाटव, शुक्ला, खान, कौर इत्यादि. नाम था जॉर्जिया.
जॉर्जियो अरमानी (फोटो- Reuters)
जॉर्जियो अरमानी (फोटो- Reuters)

1. जॉर्जियो को कठपुतलियां पसंद थीं. वो पांच साल का था. उसने भाई बहनों संग मिलकर खुद एक शो करने की सोची. उसके मोहल्ले के पादरी ने इस काम में मदद की. सब तैयारी चालू. मगर शो नहीं हो पाया. क्योंकि शहर पर बम गिरने लगे. ये दूसरा वर्ल्ड वॉर शुरू होने का वक्त था.
2. जॉर्जियो ने कॉलेज के बाद मेडिकल की पढ़ाई शुरू की. मगर बीच में छोड़ दी. फौज में चले गए. फौजियों को उन दिनों पीस पोस्टिंग में अलग अलग मनोरंजक जगहों पर भेजा जाता, ताकि वह ताजादम रहें. जॉर्जियो जिस प्लाटून के साथ थे, उसे कई बार फैशन शो देखने का मौका मिलता. यहीं से उसकी कपड़ों में दिलचस्पी हो गई. इतनी कि उसने खाकी वर्दी उतार दी और वर्दी सिलने की दुकान पर नौकरी कर ली. 23 साल की उमर में एक अधूरा कोर्स, और एक अधूरी नौकरी के बाद ये सब हुआ. तीन बरस जॉर्जियो ने सिलाई, कढ़ाई, कटाई सीखी. चलन सीखा. मतलब फैशन. फिर वो एक बड़ी टेलरिंग कंपनी में चले गए. अब वो डिजाइनर के तौर पर धाक जमाने लगे थे. उनके काम की डिमांड होने लगी थी. इस वक्त जॉर्जियो की मुलाकात सैर्जो से हुई. सैर्जो भी फैशन से जुड़ा था. दोनों साथ आ गए. हर तरह से. काम भी और काम भी.
जॉर्जिया अरमानी (फोटो - Reuters)
जॉर्जियो अरमानी (फोटो - Reuters)

13 साल बाद (फास्ट फॉरवर्ड, जैसा फिल्मों में होता है)
मिलान, इटली की फैशन राजधानी
यहां एक डिजाइन ऑफिस खुलता है. कुछ ही हफ्तों में शहर में, मीडिया में, बायर्स में उसकी चर्चा होने लगती है. ये अरमानी और सैर्जो का ऑफिस था. उन्होंने अरमानी के नाम से आदमियों के कपड़े लॉन्च कर दिए थे. उसके बाद की कहानी तो सबको पता है. पूरी दुनिया में, फिल्मी सितारों से लेकर, कलाकारों तक, अरमानी के कपड़े पहनने का एक ही मतलब होता है. कि उनका टाइम आ गया.
और रही बात कवि की. तो जब अगली बार वो पूछे. की है गुच्ची अरमानी.
तो ये कहानी सुना देना. अरमानी की. गुच्ची की कहानी, फिर कभी.

ये स्टोरी हमारे साथ इंटर्नशिप कर रही ख्याति ने की है.




 

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