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मौलवी ने बच्चों का रेप किया, लेकिन उसकी सजा के लिए कश्मीर में कायदे का कानून नहीं

अंधविश्वास ने कब किसका भला किया है?

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25 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 25 सितंबर 2017, 08:31 AM IST)
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छोटी उम्र में शारीरिक शोषण का शिकार बनने वाले बच्चों पर इसका मनौवैज्ञानिक असर लंबे समय तक रहता है. कई तो कभी उबर ही नहीं पाते.
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मैं 11 साल का था तब. मेरे चाचा मुझे एजाज शेख के पास लेकर गए थे. कई बार मेरा रेप किया गया. एक रात की बात है. मौलवी के घर उस दिन 11 से 14 की उम्र के करीब 10-11 बच्चे थे. उसने हम सबको मजबूर किया. शाम से लेकर सुबह तक हमसे सेक्शुअल चीजें कराईं. हम ये सब करते और वो हमें देखता. उसे जो सबसे आकर्षक बच्चा लगता, उसके साथ बलात्कार करता.
                                                                                                       - एक बच्चा



उसे बच्चों का रेप करने की लत थी. वो बाकी बच्चों के सामने ही रेप करता. अलग-अलग पॉजीशन में.
                                                                                                                 - एक और बच्चा


ऊपर लिखी पंक्तियां आपबीती हैं. बचपन में रेप के शिकार हुए लड़कों की. इल्जाम है एक मौलवी पर. एजाज शेख. मामला कश्मीर के सोपोर जिले का है. आस-पास के इलाकों में एजाज का बहुत नाम था. वो कहता, उसके पास जिन्न है. लोग कहते हैं - जिनके पास जिन्न होते हैं, उनके वारे-न्यारे हो जाते हैं. मौलवी कहता, मेरा जिन्न 14 साल से कम उम्र के लड़कों से ही मुखातिब होता है. लोग अपने बेटों, भतीजों, भांजों को मौलवी के यहां छोड़ जाते. फिर मौलवी घिनौनापन दिखाता. छोटी उम्र के उन मासूम लड़कों का बलात्कार करता. मौलवी सबसे खूबसूरत दिखने वाले लड़के को चुनता. बड़ी बेरहमी से रेप करता. हालांकि अभी ये केवल आरोप है. साबित नहीं हुआ है.
अंधविश्वास की आड़ में बच्चों का बलात्कार करने वाला मौलवी अगर दोषी है, तो बच्चों के मां-बाप और रिश्तेदार भी कम दोषी नहीं हैं. आखिरकार, बच्चे पहला शिकार तो अपने परिवारवालों के अंधविश्वास का ही बने.
अंधविश्वास की आड़ में बच्चों का बलात्कार करने वाला मौलवी अगर दोषी है, तो बच्चों के अंधविश्वासी मां-बाप और रिश्तेदार भी कम दोषी नहीं हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

सालों तक चुप रहने के बाद अब बोल रहे हैं पीड़ित बच्चे ऐसा एक-दो के साथ नहीं हुआ. कई बच्चों के साथ हुआ. सालों की चुप्पी के बाद अब कुछ आवाजें निकली हैं. जिन्होंने भुगता, अब बोल रहे हैं. वो तब भी बोलना चाहते थे. लेकिन डरते थे. मौलवी का इतना माहौल था. लोग बड़ी इज्जत करते थे उसकी. कुरान पढ़ाता था. अरबी की तालीम देता था. बच्चों के साथ मनमानी करने के बड़े तरीके थे उसके पास. ऐसे सवाल करता कि बच्चे शर्मसार हो जाते. जैसे, हस्तमैथुन करते हो? किसी के नजदीक आए हो? सेक्स किया है?
कई भुक्तभोगी बच्चों ने अदालत को बताया कि मौलवी उन्हें डराता था. कहता था कि अगर इस बारे में किसी को बताया, तो जिन्न सजा देगा.
कई बच्चों ने अदालत को बताया कि मौलवी उन्हें डराता-धमकाता था. कहता था कि अगर इस बारे में किसी को बताया, तो जिन्न सजा देगा.

जिन्न आने की इस वाहियात थ्योरी पर भरोसा करने वाले अधेड़ों पर लानत है बच्चे हड़बड़ा जाते. 12-14 साल की उम्र ही ऐसी होती है. करते हैं, लेकिन कह नहीं पाते. ग्लानि लादे घूमते रहते हैं. कितनी अधपकी बातें दिमाग में घूमती हैं. तो मौलवी इसका ही फायदा उठाता. बच्चों से उनकी बातें उगलवाता. और फिर ब्लैकमेल करता. कहता, तुमने गुनाह किया है. फिर नाटक करता. कहता, उस पर जिन्न आया है. इसी आड़ में बच्चों के साथ रेप करता. कई बार तो बाकी बच्चों के सामने ही. बारी-बारी से. अगर मौलवी ने ये सब किया है, तो भी वो अकेला दोषी नहीं. पहली सजा तो बच्चों के परिवारवालों को मिलनी चाहिए. अपने अंधविश्वास और लालच में क्या कर गए, ये एहसास तो हो उन्हें. कभी लॉजिक इस्तेमाल नहीं किया?
मौलवी ने अदालत में कहा कि उसे अपने बचाव के लिए और खुद को निर्दोष साबित करने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए.
मौलवी ने अदालत में कहा कि उसे अपने बचाव के लिए और खुद को निर्दोष साबित करने के लिए थोड़ा वक्त चाहिए.

बचपन से ही ब्रेनवॉश होता है: बहादुर लड़के रोते नहीं, लड़कियां रोती हैं लड़कों को बचपन से सिखाया जाता है कि वो मजबूत हैं. लड़के रोते नहीं. लड़के कमजोर नहीं होते. ऐसी परवरिश में ये बच्चे भला कैसे मुंह खोल पाते! खुलकर अपनी बात कैसे कह पाते? दूसरी बात थी मौलवी का रुतबा. पीड़ितों के अपने परिवारवाले अंधा भरोसा करते थे मौलवी पर. लोग सीधे होते हैं. ऐसी अस्वाभाविक बातों की कल्पना नहीं कर पाते. एक ने अपनी आपबीती सुनाई:
एक बार रेप के दौरान मैं जमीन पर गिर गया. मुझे बहुत चोट आई. मैं इतना मासूम था कि मुझे लगता था कहीं प्रेग्नेंट तो नहीं हो जाऊंगा? अगर ऐसा हुआ, तो अपने मां-बाप से क्या कहूंगा? कई सालों तक मुझे डर सताता रहा. लगता, कोई बीमारी तो नहीं हो जाएगी?
कई ऐसे पीड़ित अब बालिग होने की दहलीज पर खड़े हैं. अब भी वो इस सदमे से नहीं निकल सके हैं. ऐसे ही एक लड़के ने बताया कि 4 साल तक मौलवी उसका रेप करता रहा. पीड़ित ने बताया:
मुझे स्कूल से नाम कटवाना पड़ा. पढ़ाई छोड़नी पड़ी. मुझे मौलवी की बातें माननी पड़तीं. मुझे स्कूल की याद आती है. उसकी कमी महसूस होती है. काश कि मैं कभी मौलवी के पास गया ही नहीं होता. मैं वापस स्कूल जाना चाहता हूं. दोबारा अपनी पढ़ाई शुरू करना चाहता हूं. पढ़ाई पूरी करना चाहता हूं.
एक और आपबीती:
मैं चौथी क्लास में था, जब मौलवी से मिला. एक दिन वो मुझे डांगरपोर वाले अपने घर पर ले गया. वो लोगों से कहता कि 12 या इससे कम उम्र के किसी बच्चे को लेकर आएं. कहता, रात के वक्त बच्चे को मेरे साथ छोड़ जाओ. जब मैं उसके घर पर था, तो उसने कहा कि मुझे उसके कमरे में सोना होगा. उसने कहा कि इसके बदले पैसे मिलेंगे. जल्द ही मुझे उसकी असलियत मालूम चल गई. वो ऐसा दिखावा करता कि उसके ऊपर जिन्न आ गया है. फिर मेरे साथ रेप करता. एक दिन गलती से उसने सच उगल दिया. मुझे बहुत गुस्सा आया. मैंने हिम्मत जुटाई और उसे धमकाया.
कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से करीब 60 किलोमीटर दूर सोपोर के पास एक गांव है- मोंडजी. ये वहीं की घटना है.
कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से करीब 60 किलोमीटर दूर सोपोर के पास एक गांव है- मोंडजी. ये वहीं की घटना है (सांकेतिक तस्वीर)

फिलहाल जमानत पर रिहा है मौलवी एजाज शेख के खिलाफ मामला दर्ज हो चुका है. रणबीर पीनल कोड के सेक्शन 377 के अंतर्गत. कश्मीर में प्रॉटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंसेज ऐक्ट (POCSO) नहीं है. ऐसे किसी खास कानून के न होने से काफी परेशानियां होती हैं. शारीरिक शोषण के शिकार बच्चों को पूरा न्याय नहीं मिल पाता. फिलहाल वो जमानत पर रिहा है. उसने खुद को बेगुनाह बताया है. उसका कहना है कि उसे झूठे केस में फंसाया जा रहा है. बहरहाल, जांच के बाद तस्वीर साफ हो जाएगी.
आरोपी मौलवी शादीशुदा है. उसके 3 बच्चे हैं, दो बेटे और एक बेटी. मौलवी का कहना है कि अगर उसके पास पहले जिन्न था, तो अब भी होता (सांकेतिक तस्वीर)
आरोपी मौलवी शादीशुदा है. उसके 3 बच्चे हैं, दो बेटे और एक बेटी. मौलवी का कहना है कि अगर उसके पास पहले जिन्न था, तो अब भी होता (सांकेतिक तस्वीर)

फिलहाल तो एक ही सिल्वर लाइनिंग दिख रही है फिलहाल तो एक ही सिल्वर लाइनिंग दिख रही है इस केस में. वो ये कि अगर आरोप सच्चे हैं, तो पीड़ितों का यूं आगे आना थोड़ी राहत तो जरूर देता है. लड़का हो या लड़की, अपने साथ हुए बलात्कार की बात कह पाना बहुत मुश्किल है. इस समाज के सिस्टम में तो बहुत ही ज्यादा मुश्किल है. कच्ची उम्र में अगर कोई ऐसे अपराध का शिकार बने, तो उबरना बहुत मुश्किल साबित होता है. बहुत कुछ दांव पर लगा होता है. ऐसे में जब कुछ लोग साहस दिखाते हैं, तो सुकून तो मिलेगा ही.


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