भारत को हर ओलंपिक में एक गोल्ड पक्का करने के लिए 16 देशों को राजी करना होगा
कबड्डी टीम के हर खिलाड़ी, कोच को अब 10-10 लाख रूपए दिए गए हैं.

एशियन गेम्स में उतरने से पहले ही भारत के 2 गोल्ड मेडल पक्के होते हैं. अगर भारत थोड़ी सी कोशिश करे तो बहुत ज़ल्द ओलंपिक में भी भारत के 2 गोल्ड पक्के हो जाएंगे – महिला और पुरूष कबड्डी का मेडल. इसके लिए सिर्फ 16 देशों का समर्थन और चाहिए. खेल मंत्री विजय गोयल ने कबड्डी चैंपियन टीम के सम्मान समारोह में कहा, ‘कबड्डी को ओलंपिक में शामिल करने के लिए कम से कम 50 देशों का कबड्डी खेलना ज़रूरी है. फिलहाल यह 34 देशों में खेला जाता है. हमारा फेडरेशन दूसरे देशों से संपर्क कर रहा है. थोड़े दिनों पहले इटली में यूरोपियन चैंपियनशिप का आयोजन किया गया. हम ईरान-कोरिया जैसे देशों के संपर्क में हैं और मुझे उम्मीद है कबड्डी ओलंपिक में शामिल हो जाएगा.’
कप्तान अनूप कुमार ने खेल मंत्रालय की कोशिशों पर वादा करते हुए कहा, 'अगर कबड्डी ओलंपिक में शामिल होती है तो देश के लिए एक मेडल पक्का हो जाएगा. अहमदाबाद में कबड्डी वर्ल्ड के दौरान हमें खूब समर्थन मिला. स्टेडियम खचाखच भरा रहता था, कहीं ना कहीं इस बात ने भी हमारे पक्ष में काम किया.’
लेकिन इस मौके पर सबसे पते की बात निकली कोच बलवान सिंह के दिल से, ‘मैं चाहता हूं कि जवान लोग इस खेल को खेलें. यह बहुत आसान और रोमांचक खेल है. योग का इस खेल में बड़ा महत्वपूर्ण स्थान है. फेफड़े, ह्रदय, दिमाग मज़बूत बनते हैं. मैं इस उम्र में भी 3 मिनट सांस रोक सकता हूं और लड़कों के साथ दौड़ सकता हूं. हमारे देश में कबड्डी महाभारत काल से खेली जा रही है.' कोच बलवान सिंह ने अलग-अलग स्टाइलों में 7 वर्ल्डकप, 3 एशियाड गोल्ड जीता रखे हैं. इस बार के कबड्डी वर्ल्ड कप में अंटार्कटिका को छोड़कर हर महाद्वीप से टीम आई थी.
कबड्डी वर्ल्ड कप जीतने पर खबर आई थी कि पूरी टीम को 10 लाख रूपए दिए गए हैं. इस ईनाम पर कबड्डी वर्ल्ड कप का फाइनल जीताने वाले रेडर अजय ठाकुर ने नाराज़गी जताई थी. कल विजयी टीम के हर खिलाड़ी और कोचों को 10-10 लाख रूपए दिए गए.
कबड्डी को अंतरराष्ट्रीय जगत में आए हुए करीब 30 साल हो गए हैं. भारत ने अब तक बड़े मंच पर सिर्फ 2 मैच हारे हैं. मेडल हारने का तो ख्वाब ही छोड़ दीजिए. वैसे भारत के अलावा बांग्लादेश का तो ये राष्ट्रीय खेल है ही, ईरान, पाकिस्तान, कोरिया भी ज़ोरदार कबड्डी खेलते हैं. कुल मिलाकर इसका आज वो दर्जा है जो कोई 4-5 दशक पहले क्रिकेट का होता था जब क्रिकेट सिर्फ इंग्लैंड-ऑस्ट्रलिया में खेला जाता था. लेकिन 2020 तोक्यो ओलंपिक में कबड्डी का शामिल होना असंभव है. पर वह वक्त दूर नहीं जब कबड्डी भी ओलंपिक में शामिल हो जाएगी. आखिर ओलंपिक में कई ऐसे खेल हैं जो देखने में कंचों के खेल के तुल्य हैं, उनसे कबड्डी बहुत आला खेल है.

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