कबड्डी वर्ल्ड कप के फाइनल में भारत पिछड़ रहा था. अपने देसी खेल की प्रतिष्ठा और30 सालों तक लगातार अजय रहने का रिकॉर्ड दांव पर लगा था. तभी दूसरे हाफ की शुरूआतमें अजय ठाकुर ने एक ऐसी रेड मारी कि मैच का पासा ही पलट गया. भारत कबड्डी वर्ल्डकप जीता, हम लोगों ने ट्वीट किए, खुश हुए. प्रधानमंत्री ने भी बधाई दी. लेकिनकबड्डी के अखाड़े में कोई परिवर्तन नहीं हुआ.वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम को सरकार ने इतने पैसे दिए हैं कि कबड्डी टीम का दो महीनेका दूध-बादाम का खर्चा भी न चले. 14 खिलाड़ियों की टीम को कुल 10 लाख रूपए मात्रदिए गए हैं. अगर कोच और सपोर्ट स्टाफ को इसमें से एक भी पैसा न दिया जाए और सारीइनामी धनराशि खिलाड़ियों में ही बांट दी जाए तो प्रति खिलाड़ी 71428 रूपए मात्रपांती आते हैं.वर्ल्ड कप स्टार अजय ठाकुर इसी बात से नाराज़ हैं. एक इंटरव्यू में अजय ने बताया,‘सबसे पहले तो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि मैं कभी वर्ल्ड कप भी जीतूंगाऔर कबड्डी भारत में इतना लोकप्रिय होगी. खचाखच भरे स्टेडियम में देश के लिए खेलनाशानदार एहसास था. ये बहुत अचंभे की बात है कि हमारी टीम के किसी भी खिलाड़ी कोराज्य सरकारों ने कोई भी इनाम नहीं दिया. बस खेल मंत्रालय ने पूरी टीम को 10 लाखरूपए दिए हैं. अगर पूरी टीम इसको बांट ले तो नाममात्र का इनाम मिलेगा. मैं ये नहींकह रहा कि हमारे ऊपर इनामों की बारिश हो जाए लेकिन खेल के मैदान में मिली जीतों कोनिष्पक्ष होकर सम्मानित करना चाहिए.’सौजन्य: IKFऔर ये मांग सही भी है. कबड्डी खिलाड़ी की खुराक ऐसी होती है कि इस धनराशि का आधा तोएक महीने सिर्फ दूध-बादाम में चला जाए. मीडिया अपनी कवरेज में खेलों के साथ पक्षपातकरे तो करे लेकिन सरकारों को नहीं करना चाहिए.इससे ठीक 2 महीने पहले ओलंपिक में अच्छा करने वाले खिलाड़ियों को इनाम देने के लिएसरकारी महकमों की लाईन लगी हुई थी. राज्य सरकारें खिलाड़ियों को अपनी सरकार का दूतसाबित करने पर तूली हुई थीं. तो फिर कबड्डी के साथ ऐसा क्यों है ?अगर कबड्डी ओलंपिक खेल नहीं है इसलिए ऐसा हो रहा है तो क्रिकेटरों को राज्य सरकारेंडीएसपी, अधिकारी क्यों बनाती हैं. क्रिकेट भी तो ओलंपिक में नहीं है. कबड्डी टीममें कई खिलाड़ी उस हरियाणा से हैं जो खिलाड़ियों को सम्मानित करने में सबसे आगेरहता है. बाहर रह रहे खिलाड़ियों की भी हरियाणवी जड़ें ढूंढकर सम्मानित किया जाताहै. फिर आप कहें कि कबड्डी लोकप्रिय नहीं है तो ये बात गले से नहीं उतरने वाली अब.कबड्डी भारत का दूसरा सबसे ज्यादा देखा जाने वाला खेल हो गया है. इतना लोकप्रिय किखुद खेल मंत्री कबड्डी वर्ल्ड कप का फाइनल देखने गए थे.फिलहाल स्थिति ये है कि कबड्डी के खिलाड़ी प्रो-कबड्डी लीग से इतना कमा लेते हैं किस्टार टीवी और टीम मालिकों को भी फायदा हो और खुद भी सम्मान और सुविधाओं के साथ जीसकें. खिलाड़ियों के लिए कबड्डी वर्ल्ड कप में खेलना और जीतना देश के लिए रहा. जबकबड्डी लोकप्रिय नहीं थी तब भी खेलते थे और आगे भी खेलते रहेंगे.हज़ार बर्क़ गिरे लाख आंधियां उट्ठें, वो फूल खिल के रहेंगे जो खिलने वाले हैं