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सीमा से लगे गांवों में खोल दिए 40 स्कूल, अब बने हैं मोदी सरकार में मंत्री

जोधपुर नरेश की बहन को चार लाख वोट से हरा चुके हैं. गांवों के दौरे करते हैं और कोरा पर बहुत लोकप्रिय हैं.

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3 सितंबर 2017 (अपडेटेड: 4 सितंबर 2017, 08:14 AM IST)
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गजेन्द्र सिंह शेखावत.
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नाम: गजेंद्र सिंह शेखावत

कृषि राज्य मंत्री 

सांसद: जोधपुर, राजस्थान

जोधपुर के भूतपूर्व नरेश गजसिंह की बहन चंद्रेश कुमारी को 2014 के चुनाव में 4,10,051 से हराया था.
फिलहाल संसद की फाइनेंस पर बनी कमिटी पर बनी स्टैंडिंग कमिटी के सदस्य हैं.
बीजेपी किसान मोर्चा के राष्ट्रीय महासचिव.

शिक्षा:  जय नारायण व्यास यूनिवर्सिटी से दर्शनशास्त्र से एमफिल किया है.


छात्र जीवन से ही RSS के साथ जुड़े रहे हैं. 1992 में राम मंदिर आंदोलन के वक़्त जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के अध्यक्ष थे. बीती 28 अगस्त को जेएनवीयू छात्र संघ के चुनाव हुए थे, पांच सितम्बर को इसके नतीजे आने हैं. शेखावत आज भी इस चुनाव में सक्रिय है.संगठन के काम देखे जाते थे. स्वदेशी जागरण मंच के सह-संस्थापक रहे हैं. 

राजस्थान से लगी अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे गांवों में काफी दौरा करते हैं. 'सीमा जन कल्याण समिति' नाम का एक संगठन  के संस्थापक सदस्य रहे. यह संघ का ही एक अनुषांगिक संगठन है. इस संगठन का लक्ष्य देश की सीमा पर नागरिकों की सहायता से दूसरी लाइन का सुरक्षा तन्त्र स्थापित करना. घुसपैठ और जासूसी की खबर सुरक्षा बालों तक पहुंचाने काम यह संगठन करता है.
इस संगठन ने सीमा क्षेत्रों में 40 स्कूल और चार छात्रावास खोले हैं. गांवों का लगातार दौरा करते रहते हैं.
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में टीम अमित शाह का हिस्सा रहे.
कोरा पर काफी सक्रिय हैं. 55 हजार से ज्यादा फॉलोअर्स हैं. संसद के अलावा यहां काफी सक्रिय दिखाई देते हैं.
कोरा पर एक भारत-चीन के बीच संभावित युद्ध से जुड़े एक सवाल को शतरंज और गो के खेल की तुलना करके समझाया. शतरंज भारत की मानसिकता दिखाता है. चीन की सरकार और सेना 'गो' गेम के अंदाज में सोचती है'.
कहते हैं, 'पाकिस्तान पर फोकस न करे भारत. फिलहाल चीन है सबसे 'बड़ा दुश्मन'.
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गजेंद्र सिंह शेखावत

विवाद 

रानी पद्मावती फिल्म पर हुए विवाद पर भी की थी टिप्पणी. कोरा पर लिखा, 'भावनाओं को नज़रअंदाज करते हैं फिल्म डायरेक्टर. राजपूत मर्यादा की प्रतीक हैं रानी पद्मावती. ऐसे नियम बनें कि फिल्म के निर्माता-निर्देशक जनता की भावना को चोट न पहुंचा सकें.'

क्यों बनाए गए 

2018 में राजस्थान में विधानसभा चुनाव है.
राजस्थान में भैरोसिंह शेखावत के समय से राजपूत समाज बीजेपी का सबसे भरोसेमंद वोटर है. आनंदपाल सिंह एनकाउंटर मामले में सूबे की बीजेपी सरकार पर राजपूत समाज के बड़े हिस्से की नाराजगी है. ऐसे में गजेन्द्र सिंह राजपूतों की नाराजगी शांत करने के लिए मंत्रिमंडल में लाए गए.
आनंदपाल के एनकाउंटर की जांच को लेकर राजपूत समाज ने 20 दिन लंबा आंदोलन किया. इसके बाद राज्य सरकार ने पार्टी के राजपूत विधायक और सांसदों का एक दल आंदोलनकारियों से बातचीत के लिए भेजा. गजेन्द्र सिंह इस दल की अहम कड़ी रहे.
राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के बाद राजस्थान के राजपूत समुदाय से ताल्लुक रखने वाले दूसरे शख्स जिनको मंत्रिमंडल  में जगह मिल रही है.
वसुंधरा राजे के साथ ख़ास बनती नहीं है. सूबे में होने वाले पार्टी के किसी भी कार्यक्रम के पोस्टर में स्थान नहीं मिलता. हालत यह है कि जब भी वसुंधरा राजे का जोधपुर में कार्यक्रम होता है ये दिल्ली में रहना पसंद करते हैं.
सार्वजानिक मंचो पर सिर्फ केंद्र सरकार की उपलब्धियों का जिक्र करते. राज्य सरकार के काम पर बात नहीं करते थे. 2016 में हुई पार्टी की संभागीय मीटिंग के दौरान वसुंधरा राजे से इनकी तनातनी हो गई थी. वसुंधरा ने तब इनसे कहा था, "क्या आपको राज्य सरकार के काम नजर नहीं आते ? " इसके बाद से सूबे के संगठन से दूरी बना कर चलते हैं.
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