क्या है जेवर एयरपोर्ट का पूरा मामला, जिसे लेकर किसानों ने SDM पर पत्थरबाजी की
हरे-भरे गांव की जगह कुछ साल में एयरपोर्ट दिखेगा.

नोएडा से करीब 40 किलोमीटर दूर एक इलाका है- जेवर. गौतम बुद्ध नगर ज़िले में आता है. 27 जनवरी को जेवर की SDM गुंजा सिंह कुछ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों के साथ दयानतपुर और रोही गांव गई थीं. जेवर एयरपोर्ट के लिए जमीन का अधिग्रहण करने. तभी करीब दो दर्जन गांववालों ने उन पर पत्थरबाजी कर दी, जिसमें गुंजा और कुछ अधिकारी घायल हो गए. उन्हें पास के अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा. घटना 27 जनवरी की सुबह 11.30 बजे के आस-पास की है.
पत्थरबाजी क्यों हुई? किसने की? जेवर एयरपोर्ट का मामला क्या है? इन सारे सवालों के जवाब जानना जरूरी है. एक-एक करके बताते हैं.
दावा है कि जेवर में देश का सबसे बड़ा एयरपोर्ट होगा. इसे जेवर एयरपोर्ट या नोएडा इंटरनेशनल ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट कहा जा रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, 5100 हेक्टेयर जमीन पर बनेगा. इसमें 6 रनवे होंगे. ये दुनिया के भी बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल होगा. इसका निर्माण चार चरणों में होगा. जेवर के 8 गांवों की जमीन पर एयरपोर्ट बनेगा. पहले चरण में दो रनवे ही बनेंगे. 2020 की शुरुआत में निर्माण कार्य शुरू होने की बात कही गई थी. खत्म होने का समय 2023-24 निर्धारित किया गया है.

जेवर के हरे-भरे कई खेतों में अब आपको ऐसे बोर्ड दिखेंगे.
आठ में से छह गांव- रोही, दयानतपुर, किशोरपुर, परोही, रानहेरा और बनवारी बास की जमीन पर पहले चरण के तहत काम होना है. इस चरण के तहत 1,334 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण होना था. 27 जनवरी, 2020 के पहले तक निर्धारित जमीन के बड़े हिस्से का अधिग्रहण करके यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA)को सौंप दिया गाय था. रोही और दयानतपुर गांव की 18 हेक्टेयर जमीन बाकी थी. इन्हीं का अधिग्रहण करने के लिए SDM गुंजा सिंह अधिकारियों के साथ वहां गई थीं. तभी कुछ गांववालों ने उन पर हमला किया था.
Greater Noida: SDM Gunja Singh injured in a clash which broke out between a group of locals and the district administration when the latter had gone to take transfer of the acquisition of land for the proposed Jewar Airport. pic.twitter.com/40pqIgKS8a
— ANI UP (@ANINewsUP) January 27, 2020
क्यों हमला किया?
कुछ किसान जमीन अधिग्रहण के बदले मिलने वाले मुआवजे की रकम से खुश नहीं हैं. इसलिए यूपी सरकार का विरोध कर रहे हैं. 'द हिंदू' की रिपोर्ट के मुताबिक, दयानतपुर गांव में किसान जमीन अधिग्रहण के विरोध में प्रदर्शन कर रहे थे. जब उन्हें पता चला कि 27 जनवरी को SDM आने वाली हैं, तो वो रोही गांव पहुंच गए, जहां उन्होंने विरोध में अधिकारियों पर पत्थरबाजी की.
खैर, बाद में गांव के बाकी लोग भी वहां पहुंचे. किसी तरह मामले को शांत किया गया और रोही-दयानतपुर गांव की 18 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण कर लिया गया. ये एयरपोर्ट निर्माण के पहले चरण के तहत किए जाने वाले जमीन अधिग्रहण का आखिरी हिस्सा था.

हरे-भरे गांव की जगह कुछ साल में एयरपोर्ट दिखेगा.
विरोध करने वालों की मांगें क्या हैं?
जमीन अधिग्रहण एक्ट, 2013 के मुताबिक, अगर सरकार किसी काम से लोगों की जमीन लेती है, तो सर्कल रेट से ज्यादा पैसे मुआवजे के तौर पर दिए जाते हैं. शहरी इलाके की जमीन के लिए सर्कल रेट से दोगुना पैसा दिया जाता. ग्रामीण इलाके की जमीन के लिए सर्कल रेट से चार गुना ज्यादा रकम दी जाती है.
अब जो 6 गांव हैं, उन्हें सरकार ने शहरी इलाके में काउंट किया है. इसी के आधार पर उन्हें पैसे दिए गए हैं. जेवर के विधायक हैं धीरेंद्र सिंह. उनके PRO ने हमें बताया कि पहले 1800 रुपए प्रति मीटर वर्ग के तौर पर मुआवजा दिया जा रहा था. किसानों ने विरोध किया, तो सीएम योगी आदित्यनाथ ने रकम बढ़ाकर 2481 रुपए कर दी. 6 गांव के करीब 80 फीसद किसानों ने पिछले साल कंसेंट दे दिया था. यानी जमीन अधिग्रहण करने के लिए मंजूरी दे दी थी. इसलिए अधिग्रहण का काम शुरू कर दिया गया था.
किसानों द्वारा जेवर एयरपोर्ट हेतु दी गई भूमि प्रमाण-पत्र, मुख्यमंत्री श्री @myogiadityanath
— CM Office, GoUP (@CMOfficeUP) October 30, 2019
जी को सौंपते हुए। https://t.co/iiS23UmqYi
#JewarAirport
— Dhirendra Singh (@DhirendraGBN) October 30, 2019
के किसान #MLAJewar
@DhirendraGBN
के नेतृत्व में, 5 कालिदास मार्ग लखनऊ स्थित मुख्यमंत्री आवास, श्री @myogiadityanath
जी से मिलने के लिए रवाना। सोपेंगे 80% जमीनों के कब्जे के प्रमाण पत्र। pic.twitter.com/3Da6SnNptZ
सरकार क्या दे रही है-
# जिन किसानों की जमीन ली जा रही है, उन्हें 2481 रुपए प्रति मीटर वर्ग के तौर पर मुआवजा मिल रहा है.
# जिसके नाम पर जमीन है, उस व्यक्ति को मुआवजे के इतर साढ़े पांच लाख रुपए दिए जा रहे हैं.
# किसान के परिवार में जो भी व्यक्ति 18 साल से ज्यादा उम्र का है, उसे भी साढ़े पांच लाख रुपए दिए जाएंगे या फिर उन्हें जेवर एयरपोर्ट में शिक्षा के मुताबिक नौकरी दी जाएगी. नौकरी या साढ़े पांच लाख रुपए, इनमें से कोई एक ही मिलेगा.
# कुछ गांव पूरी तरह से अधिगृहीत किए जाएंगे. ऐसे में वहां रहने वाले लोगों के लिए उसी नाम का दूसरा गांव बनाया जाएगा, जहां उन्हें रहने की जगह दी जाएगी.
कितना पैसा किसानों को मिला?
पहले चरण के तहत जिन किसानों की जमीन ली गई है, हमने उनमें से कुछ से बात की. एक दयानतपुर के रहने वाले हैं. नाम हरविंदर है. इनका कहना है,
'हमारी 3 एकड़ जमीन का अधिग्रहण हो गया है. हम उस पर खेती करते थे. हमने जेवर के विकास के लिए अपनी जमीन दे दी. RTGS के जरिए हमारे अकाउंट में पैसे भी आ गए. लेकिन अभी केवल जमीन की रकम मिली है. अलग से मिलने वाले साढ़े पांच लाख रुपए अभी नहीं मिले हैं. ये सच है कि हमारी जमीन का हमें सही दाम नहीं मिला है. सर्कल रेट का दोगुना दाम मिलना था. लेकिन जेवर के विकास के लिए हमने अपनी जमीन दे दी.'
District administration Gautam Budh Nagar aquires additional 22.28 hec land from village Kishorepur and 13.64 hec land from village Ranhera in favour of Noida International Greenfield Airport at Jewar and handed over it's physical possession to YEIDA today @jewar_airport
— Jewar_Airport (@jewar_airport) September 2, 2019
pic.twitter.com/jJI4tzK5X5
साल 2018 में इन 6 गांव के बहुत से किसानों ने जमीन देने से मना कर दिया था. कहा था कि मुआवजे की सही रकम नहीं मिल रही है. उनका कहना था कि भूमि अधिग्रहण एक्ट के तहत उन्हें उनकी जमीन के सर्कल रेट का चार गुना मुआवजा मिलना चाहिए. उनके गांव को शहरी इलाका मानने पर भी दिक्कत जताई थी, क्योंकि शहरी इलाके की जमीन के अधिग्रहण में सरकार सर्कल रेट का दोगुना मुआवजा ही देती है. दो साल के अंदर सरकार बहुत से किसानों को मनाने में कामयाब रही, लेकिन कई किसान अभी भी इसके विरोध में हैं.
रोही के किसान रवेंद्र से हमारी बात हुई. उन्होंने अभी तक अपनी जमीन नहीं दी है. उन्होंने बताया कि हर साल जमीन का सर्कल रेट अपडेट होना चाहिए था, लेकिन DM ने पिछले 7 साल में इन गांवों की जमीन का रेट अपडेट नहीं किया, जिसकी वजह से किसानों को घाटा हो रहा है. रविंद्र कहते हैं,
'7 साल से जमीन का दाम 900 रुपए प्रति मीटर वर्ग ही चला आ रहा है. अगर इसे अपडेट करते रहते, तो आज इसका दाम 1400 रुपए प्रति मीटर वर्ग होता. सरकार ग्रामीण इलाके की जमीन ले रही है, लेकिन इसे ग्रामीण इलाका माना ही नहीं जा रहा है. अगर मानते तो जमीन के सर्कल रेट का चार गुना मुआवजा मिलता. आप हिसाब लगाइए, अगर हर साल सर्कल रेट अपडेट होते और सरकार चार गुना मुआवजा देती, तो हमें 5600 रुपए प्रति मीटर वर्ग के हिसाब से मुआवजा मिलता, जो कि सही दाम था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. न तो सर्कल रेट अपडेट हुए और न ही सरकार ने जमीन को ग्रामीण इलाके का माना. शहर जैसा कुछ भी नहीं है यहां, लेकिन फिर भी शहरी इलाके में कंसिडर करते हुए हमें मुआवजा दे रहे हैं.'
आगे कहा कि अगर सरकार शहरी इलाके के हिसाब से भी मुआवजा दे रही है, तो दोगुना मुआवजा मिलना चाहिए था, जो कि 2800 रुपए प्रति वर्ग मीटर होता, लेकिन ऐसा नहीं किया क्योंकि सर्कल रेट अपडेटेड नहीं था. सरकार 2481 रुपए प्रति मीटर वर्ग के हिसाब से पैसे दे रही है. रवेंद्र ने अपनी मांग रखते हुए कहा,
'हम चाहते हैं कि सरकार 4900 रुपए प्रति मीटर वर्ग के हिसाब से मुआवजा दे. यही हमारी मांग है. हमारे हरे-भरे खेत जा रहे हैं और हमें उसका सही मुआवजा भी नहीं मिल रहा. हम तब तक अपनी जमीन नहीं देंगे, जब तक हमें सही मुआवजा नहीं मिलेगा. मेरे जैसे बहुत से किसानों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में केस भी कर रखा है. लेकिन हमें डर है कि कोर्ट भी सरकार के हिसाब से ही न चले. किसानों को 3200 करोड़ रुपए का नुकसान हो जाएगा.'

मुआवजे का विरोध करते किसान. जेवर की ही तस्वीर है (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट)
इसी मांग का विरोध किसान कर रहे हैं. जेवर के विधायक धीरेंद्र सिंह के PRO ने जानकारी दी कि अभी किसी किसान का विस्थापन नहीं हुआ है. प्रोजेक्ट की शुरुआत के साथ ही नए गांव बनाए जाएंगे, जहां किसानों की रहने की व्यवस्था होगी.
विदेशी कंपनी बना रही है एयरपोर्ट
एयरपोर्ट बनाने का ठेका स्विटजरलैंड की ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल AG कंपनी के पास है. नवंबर 2019 में ही इस कंपनी को ये ठेका मिला. दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड और अडानी इंटरप्राइजेज भी रेस में थे, लेकिन जीत नहीं सके.
@jewar_airport
मुख्यमंत्री जी ने राज्य सरकार की ओर से उन्हें पूर्ण सहयोग देने के लिए आश्वस्त किया है। @Skb76etw
, जेवर के विकासकर्ता @zrh_airport
इन्टरनेशनल एजी के CEO श्री Daniel Bircher ने Conditional Letter of Award प्राप्त कर CM श्री @myogiadityanath
जी को धन्यवाद दिया।
pic.twitter.com/5g6iON0Er9
— Jewar_Airport (@jewar_airport) December 16, 2019
17 साल बाद अप्रूवल क्यों?
जेवर में एयरपोर्ट बनाने का प्रस्ताव पहली बार राजनाथ सिंह ने रखा था. साल 2001 में. उस वक्त उत्तर प्रदेश के सीएम थे, लेकिन राज्य से बीजेपी की सरकार जाने के बाद प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया. 2010 में तत्कालीन यूपी की सीएम मायावती ने भी इस प्रोजेक्ट को फिर से शुरू करने की कोशिश की. लेकिन केंद्र ने भारत की एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर पॉलिसी के नियम के आधार पर परमिशन नहीं दी. नियम ये है कि किसी भी दो एयरपोर्ट के बीच 150 किलोमीटर से कम की दूरी नहीं होनी चाहिए. IGI एयरपोर्ट को GMR कंपनी ने बनाया है, इस कंपनी ने भी इस नियम का हवाला देते हुए जेवर एयरपोर्ट के निर्माण का विरोध किया था. ये बात साल 2007 की थी. साथ ही ये भी कहा गया कि इससे IGI एयरपोर्ट के बिजनेस में फर्क पड़ने लगेगा.
फिर कैसे मिली परमिशन?
2014 में जब केंद्र में BJP की सरकार आई, तो कहा कि जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनाना उनकी प्राथमिकता है. साल 2017 में यूपी में बीजेपी की सरकार आई. सीएम बने योगी आदित्यनाथ. केंद्र ने एयरपोर्ट बनाने की मंजूरी दी. योगी ने प्रोजेक्ट में काम शुरू कर दिया. सरकार की तरफ ये कहा गया कि जेवर एयरपोर्ट से IGI एयरपोर्ट पर पड़ने वाला बोझ कम होगा. एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नियम में ये भी कहा गया है कि केवल ट्रैफिक कम करने के मकसद से ही 150 किलोमीटर से कम की दूरी में दूसरा एयरपोर्ट बन सकता है. इसी आधार पर केंद्र ने स्वीकृति दी. जमीन की पहचान की गई. कैसे और कितने चरणों में बनेगा, इसे लेकर पूरी प्लानिंग हुई. राज्य सरकार का दावा है कि जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट (IGI) पर पड़ने वाला बोझ कम होगा.
वीडियो देखें:

