शरद यादव का कभी पीछा नहीं छोड़ेगा ये बयान
24 साल पहले शरद यादव ने एक ऐसी बात कही थी, जिसके बारे में आज पूछ लो शायद कतराकर निकल जाएं.
Advertisement

शरद यादव. Photo: Reuters
Quick AI Highlights
Click here to view more
कागजी तौर पर ही सही, लेकिन गांधी और उनके विचार हमेशा अपने देश की राजनीति के केंद्र में रहे हैं. कोई न कोई विवाद उनके गिर्द खड़ा होता ही रहता है.
नरेंद्र मोदी अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपना गांधी प्रेम जताते रहते हैं. लेकिन उनकी पार्टी के 'अतिवादी' समर्थक सोशल मीडिया पर गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे का गुणगान करते दिख जाते हैं. गांधी को लेकर यह एक विरोधाभास है. ऐसे कई हैं और सिर्फ मोदी नहीं, कई नेता इसकी चोट सह रहे हैं.
इनमें एक नाम वरिष्ठ जेडीयू नेता शरद यादव का है. शरद यादव इस साल गांधी की पुण्यतिथि पर उस समय भड़क गए जब सुरक्षाकर्मियों ने गांधी स्मृति में कथित तौर पर उन्हें नहीं घुसने दिया, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उस समय अंदर थे.
इसके बाद जेडीयू प्रवक्ता केसी त्यागी ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ बताते हुए कहा कि अहिंसा के सिद्धांतों को लंबे समय से मानने वाले शरद यादव को सुरक्षा कारणों से गांधी के स्मारक में श्रद्धांजलि देने की अनुमति नहीं दी गई.
अब जरा फ्लैशबैक में लौटते हैं. अक्टूबर 1992 में शरद यादव ने हिंदी अखबार 'अमर उजाला' से कहा था, 'गांधी ने जो रास्ता दिखाया है वह आज के परिप्रेक्ष्य में बहादुरी का नहीं कायरता का रास्ता है.'जी हां, ये शरद यादव का बयान था. 31 अक्टूबर 1992 के 'इंडिया टुडे' अंक में भी यह बयान छपा था. शरद यादव राजनीति में कितने भी दिग्गज हो जाएं, लेकिन यह बयान शायद हमेशा उन्हें चुभता रहेगा.

