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अगर आप गो-हत्या रुकवाना चाहते हैं, तो आपको सिर्फ नेहरू की बात सुननी चाहिए

बेटी इंदिरा को लिखे पत्रों में भारत का गुणगान करने वाले नेहरू गाय पर हिंदुओं की संवेदनशीलता बखूबी समझते थे. पढ़िए वह क्या कहते थे.

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20 मार्च 2019 (अपडेटेड: 20 मार्च 2019, 08:17 AM IST)
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साल 1957 में डेनमार्क के कृषिमंत्री के साथ गायों की नस्ल पर चर्चा करते प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू (फोटो स्रोत: फिल्म ऐंड फोटो डिविजन, भारत सरकार)
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देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू. एक ऐसा नेता, जिसकी छाप देश के हर प्रधानमंत्री में नज़र आती है. वह शख्स, जिसने एक आजाद मुल्क की जड़ों में लोकतंत्र को हमेशा के लिए धंसा दिया. यही नेहरू गोवध पर भी खुलकर विचार रखते थे, जो इन दिनों देश में बड़ा मुद्दा है और कइयों की जान ले चुका है. नेहरू का ये भाषण 1921 में झांसी आयोजित बुंदेलखंड सम्मेलन के दौरान दिया गया था. करीब एक घंटे के इस भाषण में 32 साल के जवान नेहरू ने बताया था कि गो-रक्षा क्या है और इसे कैसा होना चाहिए. देश के हर गो-प्रेमी और गो-रक्षक को नेहरू के ये विचार जरूर सुनने चाहिए. इसके बाद उसे किसी और की प्रेरणा या विचारों की जरूरत नहीं पड़ेगी.


''दूसरी चीज, जो हमारे दिमाग को परेशान किए हुए है, एक पुराना सवाल है. इसका वास्ता गोकशी से है. आप जानते ही हैं कि हिंदू और मुसलमान इस सवाल को लेकर कई वर्षों से लड़ते चले आ रहे हैं. हम अपनी जानें गंवा देते हैं. आपको पता ही है कि हिंदू के लिए गाय पवित्र और पूज्य पशु है. जब कोई गाय काटी जाती है, तो हिंदुओं को बहुत ज्यादा दुख होता है. हर हिंदू चाहता है कि गाय का मारा जाना बंद किया जाए.

आप यह भी जानते हैं कि इस्लाम में गोकशी की इजाजत है. इसके बावजूद मैं मुसलमानों से अपनी तरफ से कुछ भी नहीं कहूंगा. मुसलमान उलेमाओं और नेताओं ने जो कुछ कहा है और मैंने उनसे जो कुछ सुना है, सिर्फ वही दोहराऊंगा. वे कहते हैं, 'गोकशी का मतलब यह है कि हर मुसलमान को गाय की कुर्बानी करने या न करने की पूरी आजादी है!'

हिंदुओं के लिए गोकशी को बंद करना किस तरीके पर मुमकिन हो? जरा इसके बारे में सोचिए! क्या होगा अगर आप मुसलमानों को लाठियों या धमकियों से रोकने जाएंगे? जरा सोचिए कि इस तरह की कार्रवाई का नतीजा क्या होगा? अगर आप किसी शख्स के पास जाएं, जो बुजदिल नहीं है और जिसमें थोड़ी-बहुत हिम्मत है और उसे आप धमकाकर अपनी बात मनवाना चाहें, तो उसका नतीजा क्या होगा? झुकेगा नहीं, उलटे कहेगा, 'ये मुझे बुजदिल समझते हैं, मैं इनके आगे झुकूंगा नहीं.' और वह बेशक कुर्बानी करेगा.

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इस तरीके से गोकशी बंद करना गैर-मुमकिन ही है! ऐसी गो-हत्या नर-हत्या बन जाएगी. हिंदू मुसलमानों को मारेंगे. इसका सिर्फ एक ही हल है. इस काम को हिंदू और मुसलमान मिल-जुलकर प्रयत्न करने से ही कर सकते हैं. हिंदुओं को यह बात मुसलमानों पर छोड़ देनी चाहिए और उनसे दोस्ताना तौर पर कहना चाहिए, 'भाइयों, गोकुशी से हमें तकलीफ होती है. आप तो जानते ही हैं कि हम गाय को कितना ज्यादा प्यार करते हैं. हमें यकीन है कि चूंकि हम आपके भाई हैं, आप अपने भाइयों को तकलीफ देना नहीं चाहेंगे. हम इसे आप पर ही छोड़ते हैं. हमें पूरा विश्वास है कि आप हमारे साथ धोखा नहीं करेंगे और ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जिससे हमें तकलीफ हो.'

अगर हिंदू, हिंसा या धमकियों का सहारा न लें, तो आपकी भलमनसाहत उन्हें वही दोस्ताना रवैया अपनाने को मजबूर कर देगी, जो आप उनके प्रति अपनाएंगे. आपके साथ भाईचारा बरतना उनका फर्ज हो जाएगा.

मुसलमान गोकशी बंद करें या न करें, खिलाफत के मामले में मुसलमानों की मदद करना हिंदुओं का फर्ज है. अपने धर्म के अनुसार आचरण करना आपका कर्तव्य है, दूसरे चाहे ऐसा करें या न करें. मुसलमानों के प्रति अपनी मोहब्बत की वजह से उनकी मदद करने में हम कुछ भी उठा न रखेंगे और कभी भी किसी तरह का जोर, जुल्म या जबरदस्ती नहीं करेंगे. तब यह मुसलमानों के लिए भी लाजिमी हो जाएगा कि वे आपकी भलाई का ख्याल रखें और ऐसा कोई काम न करें, जिससे आपको तकलीफ हो.

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पिछली साल की बकरीद का एक उदाहरण है. आप तो जानते ही हैं कि बकरीद के मौके पर गायों की कुर्बानी दी जाती है. पिछले साल दिल्ली और मुंबई में, जहां हर साल हजारों गायें काटी जाती हैं, मुस्लिम नेताओं ने मुसलमानों को कुर्बानियां न करने की सलाह दी. नतीजा यह हुआ कि दिल्ली में इस मौके पर जहां दस-बारह हजार गायें कटती थीं, पिछले साल चालीस-पचास गायों की कुर्बानी हुई. ये चालीस गायें भी सरकारी नौकरों ने, पुलिस के सिपाहियों और उनके दोस्तों ने ही काटीं.

गोकशी करने के पीछे उनका मकसद यही था कि हिंदुओं और मुसलमानों के बीच झगड़ा खड़ा किया जा सके. यह उन्होंने सिर्फ इसीलिए किया कि हिंदुओं से कहा जा सके कि देखो, मुसलमानों ने गोकशी की और हिंदुओं को उनसे दोस्ताना ताल्लुक नहीं रखने चाहिए. इसी तरह मुंबई में भी पहले के मुकाबले बहुत कम गायें काटी गईं और वह भी सिर्फ सरकारी दबाव के कारण.

भाइयों, इस बात को अच्छी तरह समझ लीजिए कि अगर आप अपना फर्ज पूरा करना चाहते हैं, तो आपको मुसलमानों को उकसाना नहीं चाहिए. अगर आपने जरा सी भी उग्रता दिखाई, तो आप जो पाना चाहते हैं, उसे कभी पा न सकेंगे. मैं इस पर इसलिए जोर दे रहा हूं कि मेरे सुनने में आया है कि बुंदेलखंड में हिंदुओं ने कुछ जुल्म किए हैं और गोवध को बंद करने का प्रण किया है और नाकामयाब होने पर ताकत से काम लेने की बात भी कही गई है.

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मैं भी हिंदू हूं और गोवध को पसंद नहीं करता. मैं तो चाहता हूं कि एक भी गाय न मारी जाए. गोवध को बंद करने का मुझे सिर्फ एक ही रास्ता दिखाई देता है और वह है सहयोग. मुझे उम्मीद है कि आप लोग यही करने की कोशिश करेंगे और यह सहयोग सिर्फ आपसी प्रेम और सद्भावना से हो सकता है. मैं आपसे जो कहना चाहता हूं, वह यह कि यहां बहुत सा गोवध अंग्रेजी फौज की वजह से होता है. आप मुसलमानों से लड़ने को तैयार हैं और उन पर लाठी लेकर टूट पड़ना चाहते हैं. क्या आपको यह नहीं मालूम कि अगर मुसलमान दस, बीस, पचास या सौ गायें काटता है, तो यूरोपियन सिपाहियों के लिए लाखों गायें काटी जाती हैं?

क्या आपको याद नहीं कि मध्य प्रांत में क्या हुआ? मैंने भी सिर्फ सुना है, कितना सच है, कह नहीं सकता. ठीक तादाद तो मुझे मालूम नहीं, सिर्फ इतना मालूम है कि मध्य प्रांत में अंग्रेजों के लिए हजारों गायें काटी जाती हैं. लगता है कि यूरोपियन सैनिक गोमांस के बगैर रह नहीं सकते. एक ओर वे आपको गुलाम बनाते हैं, दूसरी ओर हजारों गायों को कत्ल कर आपके धर्म का नाश करते हैं और आप हैं कि शांति से सह रहे हैं.

आप गोवध के सवाल पर ध्यान दीजिए और देखिए कि कितनी बड़ी तादाद में गायें काटी जाती हैं. फिलहाल आपको अपने धर्म का कोई ख्याल नहीं है और इसलिए मुल्क बर्बाद हुआ जा रहा है. अपने मुल्क में आपको खालिस दूध नहीं मिलता. हजार तरह से खेती के काम का हर्ज हो रहा है. हर रोज गायें काटी जाती हैं. यहां तक कि उम्दा नस्ल की गायें भी कत्ल कर दी जाती हैं और उनका मांस फौज में खाने के लिए भेज दिया जाता है. उन्हें एक जगह से दूसरी जगह भेजा जाता है. बसरा और उससे भी दूरदराज की जगहों में चालान कर दिया जाता है.

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अगर आप कुछ करना चाहते हैं, तो इसे रोकिए. आप इसे किस तरह रोक सकते हैं? इसे रोकने का एक ही रास्ता है. हिंदू और मुसलमानों को मिल-जुलकर और प्रेम के साथ सबसे पहले अंग्रेजी फौज के लिए लाखों गायों का कत्ल किया जाना रुकवाना चाहिए. हमें अंग्रेजी फौज से कुछ भी लेना-देना नहीं है, जिसे हमारे सिर पर थोप दिया गया है और जो हमारा खून चूस रही है. ब्रिटिश फौज को अलग करने के बाद ही हमें स्वराज्य मिलेगा.

इसलिए मैं फिर अदब के साथ आपसे कहता हूं कि हमेशा मिल-जुलकर रहिए. हिंदू और मुसलमानों में फूट डालने की कोशिशें की जा रही हैं. पुलिस और CID के आदमी आपके पास तरह-तरह के भेस में आएंगे. हिंदुओं में वे पंडित और साधू के भेस में और मुसलमानों में मौलाना बनकर जाएंगे और आप लोगों को झगड़े के लिए उकसाएंगे. मैं आपको बता देना चाहता हूं कि जो ऐसा काम करे और आप लोगों में फूट डाले और झगड़ा करवाए, वह हिंदू हो या मुसलमान, हिंदुओं का दुश्मन है और मुसलमानों का दुश्मन है और मुल्क का दुश्मन है! आप उसे अपने दुश्मनों के खेमे का आदमी समझें. वह उनका भेजा हुआ है और इसलिए उसे निकालकर बाहर कर दिया जाना चाहिए.''


यह भाषण सीनियर जर्नलिस्ट पीयूष बबेले के ब्लॉग 'बबेलॉजी' से लिया गया है, जिसका मूल स्रोत 'जवाहरलाल नेहरू वाड्मय' है.


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