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मोदी सरकार ने NSA अजीत डोभाल के बेटे की कंपनी को फायदा पहुंचाया था?

एक खबर में आरोप लगा था कि मोदी सरकार के कई मंत्री इंडिया फाउंडेशन में डायरेक्टर हैं. और इस फाउंडेशन को कई ऐसी विदेशी कंपनियों से स्पॉन्सरशिप मिलती है, जिनका सरकार से लेनदेन है. ऐसे में हितों का टकराव हो सकता है.

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Modi government benefitted Company owned by son of NSA Ajit doval
शौर्य ने कहा कि इंडिया फांउडेशन 2009 में शुरू किया गया था. (फोटो: आजतक)
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मनीषा शर्मा
15 मई 2023 (Updated: 15 मई 2023, 02:09 AM IST)
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लल्लनटॉप का जमघट. जिसमें राजनैतिक हस्तियों से बातचीत होती है. इस बार जमघट में मेहमान थे NSA अजीत डोभाल के बेटे और इंडिया फाउंडेशन के फाउंडर शौर्य डोभाल. शौर्य उत्तराखंड BJP में गुड गवर्नेंस सेल के राज्य संयोजक भी हैं. 2017 में द वायर पोर्टल की एक खबर में आरोप लगा कि मोदी सरकार के कई मंत्री इंडिया फाउंडेशन में डायरेक्टर हैं. और इस फाउंडेशन को कई ऐसी विदेशी कंपनियों से स्पॉन्सरशिप मिलती है, जिनका सरकार से लेनदेन है. ऐसे में हितों का टकराव (कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट) हो सकता है. 

इसपर शौर्य ने कहा, 

‘ये स्टोरी सतही थी. साथ ही इस स्टोरी में उन्होंने क्या चार्ज लगाए थे, वो भी हमें समझ नहीं आए थे. द वायर की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा था "कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंट्रेस्ट" का, लेकिन रिपोर्ट में ये बात साफ नहीं होती. अगर वो इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म था तो उसमें एक उदाहरण तो होता. सरकार और हमारे हित तो एक ही हैं, ऐसे में टकराव कैसा? जब हमने काम शुरु किया, तब कौन जानता था कि सरकार बनेगी और निर्मला सीतारमण कैबिनेट मंत्री बन जाएंगी. नियम ये कहते हैं कि आपके पास लाभ का पद नहीं हो सकता. जिन मंत्रियों की बात हो रही है, उन्होंने कभी इंडिया फाउंडेशन से कोई पैसा नहीं लिया.' 

इंडिया फांउडेशन में पैसा कहां से आता है?

शौर्य ने बताया कि किसी भी थिंक टैंक की फंडिंग कॉन्फ्रेंस, पब्लिकेशन और कभी-कभी विज्ञापन से आती है.  उन्होंने कहा, 

‘हमें सरकारी विज्ञापन नहीं मिलता है. कभी-कभी हमारी कॉन्फ्रेंस में सरकार पैसा देती है, जो नया नहीं है. बाकी की फंडिंग कई और संस्थाओं, जैसे की प्राइवेट इंस्टीट्यूट्स से आती है जो पहले भी आती थी. अब भी आती है.’

विदेशी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप क्यों मिलती है?

बोइंग, DBS और कुछ विदेशी कंपनियों की स्पॉन्सरशिप के बारे में शौर्य ने बताया कि DBS एक बैंक है. बोइंग एक एविएशन कंपनी है, जिसने कॉन्फ्रेंस को स्पॉन्सर किया था. कॉन्फ्रेंस को भारतीय कंपनियों ने भी स्पॉन्सर किया था. उन्होंने कहा, 

‘द वायर को कैसे पता चला बोइंग ने फंडिग की है? क्योंकि बोइंग ने अपना विज्ञापन लगाया. अगर हमें कुछ छुपाना होता तो हम उन्हें ये थोड़ी न कहते की आप फंडिंग भी कीजिए और विज्ञापन भी. पूरी रिपोर्ट में सिर्फ संयोगों पर बात की गई है, तथ्य नहीं हैं.’

अंत में शौर्य ने ये सवाल भी उठाया की ऐसी रिपोर्ट 2017 के बाद दोबारा क्यों नहीं लिखी गई. 
 

वीडियो: NSA अजीत डोभाल के बेटे ने BJP के टिकट मिलने पर क्या दावा कर दिया?

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