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बिना ग्रैविटी के अंतरिक्ष में सूसू-पॉटी कैसे करते हैं?

गगनयान से अंतरिक्ष में जाने वाले एस्ट्रोनॉट्स को ट्रेनिंग में क्या सिखाया जाएगा.

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3 जनवरी 2020 (अपडेटेड: 3 जनवरी 2020, 02:51 PM IST)
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तस्वीर सांकेतिक है लेकिन सवाल जेनुइन है.
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नए साल की रात लोग रॉकेट उड़ाते हैं. और रॉकेट वाली स्पेस एजेंसी प्लान बनाती है.
इंडिया की स्पेस एजेंसी ISRO. 2019 में चंद्रयान 2 के चलते चर्चा में रहा. 2020 में ISRO का दो नए मिशन्स पर फोकस है - चंद्रयान 3 और गगनयान. नए साल पर खबर गगनयान से जुड़ी है. खबर है -
ISRO ने गगनयान के लिए चार एस्ट्रोनॉट्स को सिलेक्ट कर लिया है.
गगनयान के कैप्सूल का ग्राफिक रीप्रेज़ेन्टेशन. (सोर्स - इंडिया टुडे)
गगनयान के कैप्सूल का ग्राफिक रीप्रेज़ेन्टेशन. (सोर्स - इंडिया टुडे)
पहले गगनयान मिशन के बारे में जान लीजिए.

राकेश शर्मा के बाद कौन?

गगनयान इंडिया का पहला मैन्ड स्पेस मिशन होगा. इंसान को स्पेस में ले जाने वाला इंडिया का पहला मिशन. गगनयान में बैठकर तीन एस्ट्रोनॉट्स जाएंगे और सात दिन अंतरिक्ष की सैर कर लौट आएंगे.
अगर ये मिशन सफल होता है तो भारत स्पेस में इंसान भेजने वाला चौथा देश बन जाएगा. इससे पहले रूस, अमेरिका और चीन ये कारनामा कर चुके हैं.
आप पूछेंगे भारत लोगों को स्पेस में लेकर नहीं गया तो राकेश शर्मा वहां कैसे पहुंच गए? वो रूस के स्पेसक्राफ्ट सोयूज़ T-11 से स्पेस में गए थे. 1984 में.
इसरो की प्रदर्शनी में मौजूद इंडिया का पहला स्पेस सूट. (सोर्स - इंडिया टुडे)

इसरो की प्रदर्शनी में मौजूद इंडिया का पहला स्पेस सूट. (सोर्स - इंडिया टुडे)
इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे कि स्पेस में एस्ट्रोनॉट्स क्या-क्या करते हैं?

ज़िंदा रहने के लिए तेरी कसम

पृथ्वी के वायुमंडल में हमें बहुत सी सहूलियतें मिली हुई हैं. मसलन - ग्रैविटी, हवा, हवा का दवाब आदि. ये सहूलियतें वायुमंडल से बाहर निकलते ही खत्म हो जाती हैं. और छोटे से छोटा काम मुश्किल हो जाता है. सारी दिक्कतों से निबटने का जुगाड़ स्पेसक्राफ्ट में ही होता है.
ये जुगाड़ पता लगाने के लिए हमारी तरफ से खोजबीन चालू हुई. और हमें JAXA की बेवसाइट का लिंक मिला. JAXA मतलब जापान की एयरोस्पेस एजेंसी. JAXA ने अपनी बेवसाइट पर स्पेस में खाने, सोने, नहाने, धोने वगैरह के बारे में बताया है. ये बातें हम एक-एक करके आपको बताएंगे.
1. खाना-पीना
स्पेस में खाना लगभग वैसा ही होता है जैसा पृथ्वी पर होता है. बस वो खाना ऐसा होता है कि भारी न हो और ज़्यादा जगह न ले. सारा खाना प्लास्टिक पैकेट्स में बंद होता है.
कुछ टाइप के खानों को सीधे ही खाया जा सकता है. जैसे कि ब्रेड, फल और ड्राय-फ्रूट्स. कुछ को खाने के लिए उनमें गर्म या ठंडा पानी मिलाना होता है. कुछ को ओवन से गर्म कर लेते हैं.
सादी थाली, डीलक्स थाली और स्पेशल थाली के बाद अब स्पेस थाली भी मिलेगी. (सोर्स - JAXA)
सादी थाली, डीलक्स थाली और स्पेशल थाली के बाद अब स्पेस थाली भी मिलेगी. (सोर्स - JAXA)

ये सावधानी रखनी होती है कि लिक्विड वाली चीज़ों को स्ट्रॉ से पिया जाए. स्पेस में ग्रैविटी नहीं होती. इसलिए सीधे मुंह लगाकर पीने से लिक्विड इधर-उधर फैल सकता है और मशीनों को खराब कर सकता है.
2. कपड़े
एस्ट्रोनॉट शब्द सुनते ही दिमाग में स्पेससूट की फोटो उतर आती है. लेकिन स्पेसक्राफ्ट के अंदर नॉर्मली कोई एस्ट्रोनॉट स्पेससूट नहीं पहनता. क्योंकि स्पेसक्राफ्ट के अंदर की हवा और तापमान को मेन्टेन किया जाता है.
(सोर्स - JAXA)
(सोर्स - JAXA)

हालांकि रॉकेट लॉन्च होते समय और वापस आते समय वो स्पेससूट पहने रहते हैं. क्योंकि तब एकदम से सारी चीज़ें बदलती हैं. और सब स्टेबल होने में समय लगता है.
स्पेस में कपड़े धोने का कोई सीन नहीं होता. इसलिए एस्ट्रोनॉट्स अपने साथ एक्स्ट्रा कपड़े ले जाते हैं. और उन्हें बदलते रहते हैं.
3. नहाना
स्पेस में नहाने के लिए पानी का इस्तेमाल करना गड़बड़ कर देता है. वहां ज़ीरो ग्रैविटी होती है. पता चला, किसी ने पानी डाला और पानी कंधे के नीचे ही नहीं पहुंचा. उल्टा इधर-उधर बगर जाएगा. और स्पेसक्राफ्ट के अंदर की मशीने खराब कर देगा.
शैंपू लगाकर दिखाते हुए एस्ट्रोनॉट.(सोर्स - JAXA)
शैंपू लगाकर दिखाते हुए एस्ट्रोनॉट.(सोर्स - JAXA)

स्पेसक्राफ्ट में कोई शावर नहीं होता. न ही कोई सिंक होती है. मुंह और हाथ-पैर साफ करने के लिए वेट टॉवेल्स का इस्तेमाल किया जाता है. वेट टॉवेल्स मतलब लिक्विड वाली साबुन से भीगे तौलिए. बाल साफ करने के लिए वॉटर-लेस शैंपू का इस्तेमाल किया जाता है. इस शैंपू में न झाग निकलता है. न ही पानी की ज़रूरत होती है.
4. सूसू-पॉटी
पृथ्वी पर ग्रैविटी सूसू और पॉटी में हमारी काफी मदद करती है. वेस्ट मटेरियल को नीचे खींचने और उसे एक जगह टिकाए रखने के लिए ग्रैविटी ज़रूरी होती है. स्पेस में ग्रैविटी की गैर-मौजूदगी में वैक्यूम का सहारा लिया जाता है.
स्पेसक्राफ्ट में महिला और पुरुष दोनों के लिए एक ही टॉयलेट होती है. इस टॉयलेट में लगभग वैक्यूम क्लीनर जैसी मशीनें होती हैं. सूसू करने के लिए एक वैक्यूम क्लीनर जैसा पाइप होता है. वो पाइप सारा यूरीन खींच लेता है.
इसका होल बहुत छोटा होता है. (सोर्स - JAXA)
इसका होल बहुत छोटा होता है. (सोर्स - JAXA)

पॉटी के लिए एक छोटी सी लगभग वेस्टर्न स्टाइल की शीट होती है. इस टॉयलेट के गड्ढे में भी वही वैक्यूम वाला सिस्टम होता है. और सारा मल कुछ बैग्स में इकट्ठा होता है. इस टॉयलेट पर बैठते समय एस्ट्रोनॉट्स अपने शरीर को एक बेल्ट से बांध लेते हैं. ताकि पॉटी करते वक्त उनका शरीर इधर-उधर न भाग जाए.
5. सोना
पृथ्वी पर जैसे ही हम बिस्तर पर लेटते हैं ग्रैविटी के कारण पूरे शरीर का वज़न बिस्तर पर पड़ता है. और हम रिलैक्स होकर सो जाते हैं. लेकिन स्पेस में कोई ऐसे ही कहीं भी सो जाए, तो हवा में तैरते हुए कहीं और पहुंच जाएगा.
तकिया पता नहीं क्यों रखा है. (सोर्स - JAXA)
तकिया पता नहीं क्यों रखा है. (सोर्स - JAXA)

स्पेसक्राफ्ट में स्लीपर बस जैसे स्लीपिंग कंपार्टमेंट होते हैं. एस्ट्रोनॉट इस कंपार्टमेंट में सोते वक्त अपने शरीर को हल्के से बांध लेते हैं. स्पेसक्राफ्ट के अंदर मशीनों की आवाज़ आ रही होती है. इसलिए जिन्हें ज़रूरत होती है वो ईयरप्लग और आईमास्क भी लगा लेते हैं.
6. एक्सरसाइज़
स्पेस में एक्सरसाइज़ करना बहुत ज़रूरी होता है. धरती पर ग्रैविटी के कारण फ्री में हमारे बहुत सारे हिस्सों की एक्सरसाइज़ हो जाती है. जैसे कि भारी शरीर उठाने में हमारे पैरों की एक्सरसाइज़ हो जाती है. ऊपर की तरफ खून पहुंचाने के लिए हमारे दिल को एक्सट्रा मेहनत करनी पड़ती है.
प्रेशर का खेल होता है इस मशीन में. (सोर्स - JAXA)
प्रेशर का खेल होता है इस मशीन में. (सोर्स - JAXA)

स्पेस में ये सब नहीं होता. इसलिए इन हिस्सों को दुरुस्त रखने के लिए अलग से एक्सरसाइज़ करनी पड़ती है. एक्सरसाइज़ करते समय भी खुद को बांधकर रखना होता है.


गगनयान ISRO के ह्यूमन मिशन्स की पहली सीढ़ी है. जिसे 2022 तक लॉन्च करने का प्लान है. गगनयान के लिए चुने गए चार एस्ट्रोनॉट्स की ट्रेनिंग रूस में होगी. इस ट्रेनिंग के दौरान इन्हें इन्हीं सब चीज़ों की प्रैक्टिस कराई जाएगी. फाइनल लॉन्चिंग के लिए इन चार में से तीन को ही चुना जाएगा. जैसे क्रिकेट में खेलते 11 खिलाड़ी हैं लेकिन टीम 15-16 प्लेयर्स की बनती है. वैसे ही.
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वीडियो - वो वैज्ञानिक जिस पर स्पेस से क्राइम करने का इल्जाम लगा है

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