इराक एक ऐसा देश बन चुका है, जहां के आतंकवादियों के बारे में तो हर जगह के लोगजानते हैं, पर ये नहीं जानते कि सद्दाम के मरने के बाद वहां सरकार भी है. पहले नूरीअल मलिकी के नेतृत्व में. अब हैदर अल अबादी के. इस सरकार ने ISIS के खिलाफ सबसेबड़ी कार्रवाई शुरू की है. मोसुल शहर में. जो इराक का दूसरा सबसे बड़ा शहर है. तेलके कुएं हैं यहां. इसकी आबादी है 15 लाख. यहां पर ISIS के 5 हजार लड़ाके हैं. खबर आरही है कि ये लोग सिविलियन लोगों को इराकी सेना के सामने खड़ा कर लड़ रहे हैं. लगभगहजार लोग शहर छोड़कर पास के सीरिया देश में भाग गये हैं. इस शहर को जीतना इराक कीसरकार के लिये बहुत जरूरी है क्योंकि 2014 में इसी शहर से ISIS के मुखिया अबू बकरअल बगदादी ने इस्लामिक स्टेट बनाने का ऐलान किया था.BBCयूएन के मुताबिक लगभग दो लाख लोग रिफ्यूजी बनेंगे. इनके लिये इंतजाम किये जा रहेहैं. सरकार बाकी लोगों को कह रही है कि आप घर में ही रहिये लड़ाई होने तक. इराकीसेना शहर के साउथ से हमला कर रही है. और इनकी सहायक कुर्दिश सेना ईस्ट से. अभी येलोग शहर से 40 किलोमीटर दूर हैं. अंदाजा है कि मोसुल शहर में घुसने में दो हफ्तेलगेंगे. शहर को फ्री कराने में दो महीने.BBCजून 2014 में इराकी सेना इस शहर से भाग गई थी. जब ISIS के लड़ाके घुसे. उस वक्तसेना को बड़ा चिढ़ाया गया था. I.R.A.Q. का मतलब बताया जा रहा था कि I Ran AwayQuickly. मैं जल्दी से भाग गया. पर ऐसा नहीं था कि सेना बगदादी से डर के ही भाग गईथी. मोसुल में सुन्नी आबादी है. जबकि बगदाद में शिया अधिकारी हैं. तो ये अलग लफड़ाथा. बगदादी को इसी वजह से यहां सपोर्ट था. फिर नेता तो नेता ही होते हैं.प्रधानमंत्री लोग भी सबका साथ, सबका विकास नहीं कर पाये थे. सुन्नी अपने आपको ठगाहुआ महसूस कर रहे थे. उसके बाद आतंकवादियों ने मार-काट मचा दी थी. सुन्नी भी शहरछोड़ के भागने लगे थे. जो रुक गये, बड़ी मुश्किल में थे.मोसुल का मतलब है लिंक. जो एक जगह को दूसरी जगह से जोड़ता है. हजार साल पहले येअपने कॉटन के लिये फेमस था. जिसे मुस्लिन कहते थे. बाद में ये शहर चंगेज खान केनाती हलाकू खान के चंगुल में आया था. फिर ओटोमन साम्राज्य में भी आय़ा. उसके बादब्रिटिश राज में इराक देश बनने के साथ उसमें चला आया. तब तक ये तेल, कॉटन, सीमेंटके लिये फेमस हो चुका था. और ये इस्लामिक भी नहीं था. इसमें कई समुदाय रहते थे.कुर्द, तुर्कमेन, अस्सीरियन और शिया-सुन्नी तो थे ही.सद्दाम के वक्त ही स्थिति वैसी ही रही. पर अमेरिका के हमले के बाद खराब हो गई. इसशहर में अल-कायदा, कुर्द लड़ाके, सद्दाम की पार्टी के सारे अमेरिका के खिलाफ लड़रहे थे. उस वक्त सारे देशभक्त बने पड़े थे. पर ISIS के आने के बाद स्थिति फिर बदलगई. कुछ दिन तो किसी को समझ ही नहीं आया कि क्या हो रहा है. क्योंकि ये ग्रुपबिल्कुल ही अलग था. ये लोग उस इस्लाम की बात कर रहे थे जो इनको भी नहीं पता था.जॉर्डन के एक गुंडे जरकावी के शुरू किये हुये इस ग्रुप ने इस्लामी राज की नई इबारतलिखनी शुरू की. जिसमें नियम हमेशा चेंज होते रहते था.रिफ्यूजी BBCजून 2014 में इन लोगों ने मोसुल पर कब्जा कर लिया. इनका डर इतना था कि 800आतंकवादियों के सामने 20-25 हजार की सेना हथियार छोड़ के भाग गई. फिर यहीं पर ISISने शरिया के नाम पर राज करने का ऐलान किया और अपना नाम बदल कर इस्लामिक स्टेट रखलिया. मोसुल की फेमस मस्जिद में बगदादी कई सालों के बाद पहली बार लोगों के सामनेआया.फेमस हब्वा मस्जिद जो थोड़ी झुकी हुई हैफिर औरतों पर पाबंदी लगनी शुरू हुई. सिगरेट पीना बंद कराया गया. चोरी के इल्जाम मेंहाथ काटे जाने लगे. लोगों के घरों में घुस नियम-कानून बनने लगे. मोसुल के हजार सालपुराने कल्चर को तोड़ा जाने लगा. हेरिटेड बिल्डिंगें तोड़ी जाने लगीं.दो साल बाद अब इराकी सेना ने कलेजा दिखाया है. पर पता चल रहा है कि आतंकवादियों नेभी पूरा इंतजाम किया है. सुरंगें खोदी हैं. माइंस बिछाई हैं. कार बम तैयार किये गयेहैं. सिविलियन लोगों को हथियार की तरह इस्तेमाल किये जाने का प्लान है. पर 25 हजारकी इराकी सेना कमर कस के तैयार है. खबर है कि बगदादी इस शहर में घिरा हुआ है. देखेंखबर क्या आती है.-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ें:जब जेहादी पॉर्न फिल्म देखते हैं तो क्या होता है?बधाई! जेहादी जॉन के नरक में पहुंचने की खुशखबरी कंफर्मइजराइल की किलिंग मशीन मोसाद के 3 खूंखार कारनामेविश्व की सबसे फौलादी टीचर जिसने म्यूनिख़ के क़ातिलों को चुन-चुन कर माराक्या सच में इजराइल पूरी दुनिया से इस्लाम को मिटाना चाहता है?क्या करता है इजराइल, जिससे तुलना की PM मोदी ने सेना की?ISIS वाले कश्मीर, बाबरी, गुजरात और मुजफ्फरनगर का बदला लेने आ रहे हैं