गांव से सात किलोमीटर दूर नेशनल हाईवे 56 है. उस हाईवे पर बसा है एक कस्बा. उसकस्बे में घरों से ज्यादा दुकानें हैं. क्योंकि रोड के किनारे है. दुकानों में सबसेज्यादा दुकाने हैं मोबाइल में गाने भरने की. एक बार लखनऊ से आती बस उस हाईवे पररुकी. अपन झोला टांगे उतरे. रिचार्ज कराना था. एक दुकान में घुस गए. दुकान पर पहलेसे भीड़ थी. लोग मेमोरी में गाने भरा रहे थे. एक लड़का प्राइमरी स्कूल की गंदी सीड्रेस पहने कुछ ज्यादा ही उछल रहा था. कह रहा था "ऐटम बम है तेरी जवानी" जरूर डालदेना. गाना भर गया. फिर चाइनीज फोन में डालकर सुना भी. ये कव्वाली गाई थी तसलीमआरिफ और टीना परवीन ने. बच्चे बूढ़े और जवान सब इसे एक रस में सुनते थे.तसलीम-आरिफ बदायूं के हैं. उनका इंटरव्यू पढ़ ही चुके हो. फिर हमने सोचा कि बिनाटीना से बात किए बात बन नहीं रही है. लाइव प्रोग्राम में वो समां बांधती हैं किसुनने वाले जमे रह जाते हैं. लखनऊ की हैं. आवाज में जादू है. अदाएं कव्वालियों कोपूरी तरह सूट करने वाली. लखनऊ-कानपुर-फैजाबाद-रायबरेली-बाराबंकी का ये हाल है किलोगों को पता चले, कव्वाली मुकाबला टीना परवीन से है तो लोग ऐदल-पैदल भागकर पहुंचजाते हैं.Image: Youtubeऐसे हुनर और शोहरत की मालकिन टीना से हमने बात की तो ये मसाला निकल के आया.सवाल- टीना जी आपने गाना कब शुरू किया? टीना- 12 साल की उम्र में. सवाल- गाने कीतालीम ली किसी से? टीना- पापा से. पापा गाते थे और गाने की वजह से बहुत मकबूल थे.वो आकाशवाणी लखनऊ में गाने जाते थे. देश के कई शहरों में गए. मैं उनके साथ अक्सरशोज़ में जाती थी. उनको देखते हुए गाना सीखने की इच्छा हुई तो उनसे ही सीखना शुरूकिया. घर में बहुत पंगे हुए. मेरे वालिद ने मेरे लिए बगावत कर दी. घर वाले कहते थेये हमारा खानदानी रिवाज नहीं है. खुद तो गाते ही हैं, बेटी भी गाएगी तो खानदान कीनाक कट जाएगी लेकिन पापा ने सिखाया. सवाल- पढ़ाई किस फील्ड में की है? डिग्रीवगैरह? टीना- हमने पढ़ाई सिर्फ हाईस्कूल तक की है. लखनऊ के ही महिला कॉलेज से. उसकेबाद गाने में मन लग गया तो पढ़ाई में मन नहीं लगता था. (ये बात सुनकर हमको सीक्रेटसुपरस्टार फिल्म की याद आ गई. हालांकि टीना के पापा इंशिया के पापा से उलट थे.)सवाल- तसलीम-आरिफ के साथ मुकाबला कव्वालियों का दौर कब शुरू हुआ? टीना- उस वक्तगुलशन कुमार साहब जिंदा थे. जब टी सीरीज से बुलावा आया. वहां कहा गया कि मुकाबलाकव्वाली रिकॉर्ड करनी है. बस वहीं से शुरुआत हो गई. तसलीम-आरिफ के साथ हमारे तमामकैसेट आए. ऐटम बम है तेरी जवानी, शैतान मेरी लैला, मेरा कार्ड रख ले. ऐटम बम.... तोकब आकर बिक गया पता ही नहीं चला. कामयाबी मिली तो हमने साथ में लाइव शोज़ भी करनेशुरू किए.सवाल- लाइव शो से जुड़ी कोई बुरी याद है क्या आपकी? जैसे कहीं शो फ्लॉप हो गया हो.या आयोजक पइसा डकार गया हो. टीना- पैसे वैसे वाला तो अमूमन नहीं होता लेकिन एक बारबहुत बुरा हादसा हुआ था. घर में मम्मी एक्सपायर हो गईं थीं और हम उस वक्त शो करनेगए थे. (आप समझ सकते हैं कि किसी का सबसे करीबी गुजर गया हो और उसे कहीं परफार्मकरना हो. बिना झिझके. कलाकारों के साथ अक्सर ये दिक्कत पेश आती है. उनकी कला परउनकी पारिवारिक या पर्सनल प्रॉब्लम्स असर करें, ये वो अफोर्ड नहीं कर सकते.) ऐसे हीपापा की डेथ हुई तब भी हम शो करने गए हुए थे. सवाल- आजकल लाइव कव्वाली शोज़ केअलावा और क्या कर रही हैं? टीना- अभी एक नए प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. एक सूफीरॉक बैंड बनाने की कोशिश चल रही है. इसमें वेस्टर्न स्टाइल में इन कव्वालियों कोगाया जाएगा. दुनिया बदल रही है. आजकल की जनरेशन फास्ट है. उसके हिसाब से भी तो कुछहोना चाहिए. इसलिए अभी ये एक्सपेरिमेंट कर रहे हैं.अब एक शायर, एक कवि इरशाद कामिल का इंटरव्यू देखते जाइए.