सोमवार रात को कश्मीर से खबर इस रूप में आई कि सुरक्षाबलों को आतंकियों के खिलाफबड़ी कामयाबी मिली है. एनकाउंटर में आतंकी मारे गए हैं. कश्मीर से ऐसी खबरें आतीरहती हैं, इसलिए किसी का ज्यादा ध्यान नहीं गया. लेकिन फिर मंगलवार को तीन परिवारोंसे रोते-बिलखते वीडियो सोशल मीडिया पर आने शुरू हुए. कोई बच्ची अपने पिता की लाशमांग रही थी, कोई महिला अपने पति के लिए बिलख रही थी. आरोप लगा कि पुलिस ने आतंकीबताकर बेकसूरों को मार डाला. तो असल में हुआ क्या. क्या पूरी घटना है. पुलिस क्याकह रही है, चश्मदीद या परिजन क्या कह रहे हैं . दोनों वर्जन बताते हैं. पहले पुलिसके हिस्से की कहानी. जम्मू कश्मीर पुलिस के मुताबिक सोमवार यानी 15 नवंबर की दोपहरउन्हें आतंकियों के छिपे होने की खबर मिली. कहां- श्रीनगर के हैदरपुरा इलाके मेंबाइपास पर बने एक शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में. इसके बाद पुलिस, सीआरपीएफ और आर्मी कीटीम वहां पहुंची. बिल्डिंग का घेराव किया. बिल्डिंग के टॉप फ्लोर पर आतंकी छिपेहोने की जानकारी थी. सुरक्षाबलों ने बिल्डिंग के मालिक अल्ताफ अहमद डार को बुलाया.अल्ताफ ने बिल्डिंग का टॉप फ्लोर मुदास्सिर गुल नाम के आदमी को किराए पर दे रखा था.उसको भी बुलाया गया. और दोनों को सुरक्षाबलों ने टॉप फ्लोर के कमरे खुलवाने के लिएभेजा. इन दोनों ने दरवाज़े को नॉक किया लेकिन अंदर से किसी खोला नहीं. थोड़ी देरबाद इन दोनों को दोबारा दरवाजा खुलवाने के लिए भेजा गया. इस बार दरवाज़ा खुला, औरकमरे के अंदर से दो आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी. सिक्योरिटी फॉर्सेज के जवानोंने जवाबी कार्रवाई की. पुलिस का कहना है कि आतंकियों और सुरक्षाबलों के क्रॉसफायरमें अल्ताफ और मुदास्सिर फंस गए. पुलिस ने अल्ताफ और मुदास्सिर गुल को रेस्क्यूकरने की कोशिश की, लेकिन ये मुमकिन नहीं हो सका. तो इस गनफाइट में कुल चार लोग मारेगए. बिल्डिंग का मालिक अल्ताफ अहमद डार. बिल्डिंग के टॉप फ्लोर को किराए पर लेकरबिज़नेस करने वाला मुदास्सिर गुल. जो कि डेंटिस्ट भी था और बकौल पुलिस बिल्डिंग मेंअनऑथोराइज्ड कॉल सेंटर चला रहा था. बाकी दो लोगों को पुलिस ने आतंकी बताया. जिसमेंएक हैदर उर्फ बिलाल को पाकिस्तानी बताया जा रहा है. और दूसरा आमिर लतीफ मागरे. जोजम्मू इलाके के रामबन का रहने वाला था. पुलिस का दावा ये आतंकियों से तीन पिस्टलमिली, 6 मैग्जीन. कई मोबाइल फोन और कम्प्यूटर्स मिले हैं. पुलिस का शूट उस फ्लैट काएक वीडियो भी आया. जिसमें कोई विस्फोटक सामग्री जैसा तो नहीं दिखा. लेकिन वीडियोबनाने वाला बार बार कह रहा है कि ये हाइडआउट है, हाइडआउट है. पुलिस ने एनकाउंटर केबाद चारों शवों को श्रीनगर से करीब 70 किलोमीटर दूर हंदवाड़ा इलाके में ले जाकरदफना दिया. अब कश्मीर में ये कॉमन प्रैक्टिस है कि सुरक्षाबल आतंकियों के शवपरिजनों को नहीं देते हैं, खुद ही दफना देते हैं. तर्क ये है कि इससे लॉ एंड ऑर्डरकी दिक्कतें आती हैं. लेकिन, इस मामले में तो पुलिस ने आतंकियों के अलावा क्रॉसफायरिंग में मारे गए अल्ताफ और मुदास्सिर के शव भी उनके घर वालों को नहीं दिए. इसकेपीछे पुलिस ने तर्क ये दिया की वो OGW थे. OGW यानी ओवर ग्राउंड वर्कर्स. आतंकियोंकी लॉजिस्टिक्स या इंफोर्मेशन या किसी भी तरह से मदद करने वालों को OGW कहा जाताहै. पुलिस का कहना है कि मुदास्सिर उत्तर कश्मीर से आतंकियों को अपने वाहन में लाताथा. यानी लॉजिस्टिक्स का सपोर्ट देता था. और अल्ताफ की बिल्डिंग में आतंकियों काहाइडआउट था इसलिए उसे भी OGW मान लिया गया. आईजी कश्मीर ने कहा के मारे गए आतंकियोंने ही कुछ दिन पहले पुलिस पर भी हमला किया था. प्रेस कॉन्फ्रेंस में आईजी विजयकुमार से पूछा गया कि कैसे मान लें कि अल्ताफ और मुदास्सिर आतंकियों की गोली से हीमरे हैं. आईजी ने जवाब दिया अल्ताफ़ की मौत क्रॉस फयरिंग में हुई है. मैंने ये नहींकहा कि अल्ताफ़ को मिलिटेंट ने ही मारा है. अगर उसकी बॉडी से पिस्टल का कोई राउंडलगा है. तो उसे 100% मिलिटेंट ने ही मारा है. ये पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आजायगा. तो ये तो पुलिस के हिस्से की कहानी हो गई. चश्मदीदों ने क्या कहा. कईअखबारों में चश्मदीदों का वर्जन छपा है. इसके मुताबिक सिक्योरिटी फोर्स के लोग,सिविल ड्रेस में आए और सभी दुकानों के शटर बंद करने के लिए कहा. फिर करीब 30 लोगोंको बिल्डिंग से 50 मीटर दूर एक शोरूम में इकट्ठा किया. उनके फोन ले लिए. और उसकेबाद बिल्डिंग की घेराबंदी हुई. चश्मदीदों के मुताबिक अल्ताफ और मुदस्सिर कोसिक्योरिटी फॉर्सेज वाले बिल्डिंग में लेकर गए. 20 मिनट बाद उन्हें दोबार लेकर गए.इस बार गोलियां की आवाज़ सुनाई दी और वो वापस नहीं आए. अब आते हैं परिवार के वर्जनपर. बिल्डिंग के मालिक अल्ताफ अहमद के परिवार का कहना है कि अमुमन वो 6 बजे तक घर आजाते थे. उस दिन नहीं आए तो फोन किया. फोन बंद मिला. और फिर खबर आई एनकाउंटर की. डॉमुदास्सिर के परिवार का भी कहना है कि उनका आतंकियों से कोई लेना देना नहीं था. इनकथित OGW के अलावा जिस आमिर लतीफ मागरे को पुलिस ने आतंकी बताया, उसके परिवार का भीबयान आया. आमिर के पिता ने कहा कि उन्होंने तो खुद पत्थर से आतंकी को मारा था, वोकैसे आंतकी हो सकते हैं. इस कथित आतंकी के गांववालों का भी बयान आया. कहा कि 2004से इसके परिवार को पुलिस ने सुरक्षा दे रखी थी. ये आतंकी था तो सुरक्षा क्यों दीथी. एनकाउंटर्स के बाद रामबन के इलाकों में तनाव के चलते धारा 144 लगाई गई है.श्रीनगर में भी आज मारे गए परिवारों ने प्रदर्शन किया. न्याय की मांग की. पीडीपीचीफ महबूबा मुफ्ती भी प्रदर्शनों में शामिल हुई. कश्मीर के सभी बड़े नेता जांच कीमांग कर रहे हैं. जबकि मारे गए लोगों के परिवार शव की मांग कर रहे हैं. वैसे येकितनी अफसोसनाक बात है कि परिवारों को जांच का भरोसा नहीं है, इंसाफ के नाम पर बसइतनी उम्मीद लगाते हैं कि उन्हें बस शव मिल जाए. पिछले दिनों गृह मंत्री अमित शाहकश्मीर के दौरे पर जाकर आए थे. कहा था कि वो पाकिस्तान से बात नहीं करेंगे कश्मीरके युवाओं से बात करेंगे. मोदी सरकार कश्मीरियों में भरोसा बढ़ाने की बात करती है.सेना की तरफ से भी कई वेलफेयर प्रोग्राम चलते हैं. इन सब पर पानी फिर जाता है जबकिसी निर्दोष को मारने के आरोप लगते हैं. हम नहीं जानते थे कि मारे गए चारों लोगआतंकी घटनाओं में शामिल थे या नहीं है. लेकिन इस एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हैं.सरकार औऱ सुरक्षाबलों को अपना इकबाल बुलंद रखने के लिए घटना की जांच करानी चाहिए.अगर पुलिस ने लोगों को ह्यूमन शील्ड की तरफ भी इस्तेमाल किया है, तो ये भी अपराधहै. मामले की पूरी जांच होने चाहिए, तो लोगों का भरोसा बना रहे.