जिस खिलाड़ी से 20 दिन पहले हारी थीं, उससे पीवी सिंधु ने हिसाब बराबर कर लिया
'दिल तो जीता है' कहकर संतोष करने वालों, ये भी देख लो.
Advertisement

फोटो - thelallantop
Quick AI Highlights
Click here to view more
27 अगस्त 2017. जापान की नोज़ोमी ओकूहारा ने पीवी सिंधु को वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप फाइनल में हराया:

ओकूहारा (सोर्स: रॉयटर्स)
2016 रियो ओलंपिक्स के फाइनल में पीवी सिंधू और स्पेन की कैरोलीना मरीन के बीच भिड़ंत हुई थी. हमारी ये बैडमिंटन खिलाड़ी मैच हारकर भी जीत गई थी. 1 घंटे 23 मिनट का ये मुकाबला काफी था दुनिया को ये बताने के लिए कि इंडिया में सिर्फ क्रिकेट ही नहीं खेला जाता. अपनी गजब की फाइट-बैक स्पिरिट से सिंधू ने इस खेल में खुद को वहां पहुंचा दिया, जहां अब तक कोई इंडियन नहीं पहुंच पाया है. खास बात ये है कि सिंधू के टैलेंट, करियर ग्राफ और टेंपरामेंट को देखकर यही लगता है कि अभी तो ये बस शुरुआत है.
अनुशासन से समझौता नहीं करती हैं सिंधू. साभार- कैरावन
कुछ साल पहले युवराज सिंह के पिता योगराज से पूछा गया- युवी की शादी किससे हो रही है? योगराज बोले मैं चाहता हूं कि युवी मारिया शारापोवा (रशिया की टेनिस स्टार) से शादी करे. मैं चाहता हूं कि युवी की अगली जनरेशन फिजिकली इतनी जायंट हो कि वो किसी भी गेम में फिटनेस के लेवल पर मात न खाए. योगराज का ये तर्क थोड़ा अटपटा लगा था. फिटनेस तो मेहनत से पाई जा सकती है. मगर अब पीवी सिंधू के केस में योगराज की वो बात सही मालूम पड़ती है.
5 फीट 11 इंच की हाइट वाली पीवी सिंधू दुनिया में ज्यादातर महिला बैडमिंटन प्लेयर्स से लंबी हैं. 22 साल की सिंधू समय के साथ फिटनेस और स्टेमिना के मामले में भी तेजी से ग्रो कर रही हैं. उनकी फिटनेस के पीछे कोच पी गोपीचंद से पहले पिता पीवी रमन्ना और मां विजयलक्ष्मी हैं. दोनों नेशनल लेवल के वॉलीबॉल प्लेयर रहे हैं. रमन्ना तो 1986 की एशियन गेम्स में कांस्य पदक भी जीते थे. लंबी कद-काठी के साथ-साथ खेलकूद को प्रोत्साहित करते पैरेंट्स सिंधू के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहे हैं. उस पर सिंधू का अनुशासन भरा लाइफ स्टाइल, जिस पर खुद कोच पी गोपीचंद कई बार कह चुके हैं कि सिंधू ने जिस रफ्तार से अपना करियर ग्राफ बढ़ाया है, उसके पीछे उसका गेम के प्रति गजब का अप्रोच और कभी हार न मानने की जिद है.
साइना नेहवाल से एक कदम आगे निकल कर सिल्वर मेडल जीता था सिंधू ने.
2016 ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली सिंधू को दुनिया के चुनिंदा टॉप बैडमिंटन प्लेयर्स में गिना जाने लगा है. इस बात को सिंधू ने धुरंधरों को हराकर साबित किया है. इनमें ताइवान की नंबर एक खिलाड़ी ताइ जू-इंग, स्पेन की कैरोलिना मरीन और चीन की ली जूरुइ को हराना शामिल है. दुनिया की बेहतरीन बैडमिंटन प्लेयर बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाती सिंधू ने समय के साथ सारी स्किल्स सीख ली हैं. इसके लिए वो क्रेडिट कोच पी गोपीचंद को देती हैं.
साल 2008 से इंडिया में बैडमिंटन कोचिंग करने वाले गोपी ने देश में इस खेल को जिस तेजी से बढ़ाया है, उसी का नतीजा है कि साइना और सिंधू समेत हमारे 6 पुरुष खिलाड़ी दुनिया के टॉप-50 में आ चुके हैं. ओलंपिक सिल्वर मेडल जीतने के बाद सिंधू के पीछे पैसा और पब्लिसिटी भी खूब आया है. इंडिया में अब तक ये शोहरत क्रिकेटरों को ही नसीब होती रही है. सिंधू ने इस ट्रेंड को तोड़ा है. ओलंपिक मेडल जीतने के अगले ही महीने सिंधू ने स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी बैसेलीन वेंचर्स के साथ करीब 50 करोड़ की डील की जो अगले तीन साल तक सिंधू के लिए काम करेगी. कंपनी ने कैरावन मैग्जीन को बताया कि क्रिकेट के बाहर सिंधू सबसे बड़ा चेहरा हैं. पिछले साल के आखिर तक सिंधू करीब 7.5 करोड़ के विज्ञापन की डील कर चुकी हैं.
कोच पी गोपीचंद अपनी अकैडमी चलाते हैं
अब जब सिंधू को हर तरफ से सपोर्ट है, तो उम्मीदों के अंबार भी हैं. जिनपर ये खिलाड़ी लगातार खरी उतरती दिख रही है. अोलंपिक सिल्वर मेडल के बाद सिंधू से 2020 के टोक्यो ओलंपिक्स में गोल्ड की उम्मीद है. जिस कैरोलीना मरीन से सिंधू ओलंपिक फाइनल हारीं थी (19-21, 21-12, 21-15), उसी को 7 महीने बाद इंडिया ओपन के फाइनल में शिकस्त (21-19, 21-16) दी. इसी से साबित हो गया कि पीवी सिंधू किस टेंपरामेंट की खिलाड़ी हैं. वो खिलाड़ी जो हार से हारता नहीं, अपनी कमियों को सुधार जीत की तैयारी में जुट जाता है.
इस बारे में गोपी के साथ बतौर नेशनल कोच जुड़े इंडोनेशिया के मूल्यो हैंदोयो ने कहा था, "जो प्लेयर 21 साल की उम्र में टॉप-10 में हो, उससे अगले दो साल में नंबर एक होने की उम्मीद जायज है." पीवी सिंधू अभी वर्ल्ड रैंकिंग्स में चौथे स्थान पर हैं. सिंधू जब अपने करियर और फॉर्म के शिखर पर हैं और इससे पहले कि अगली जनरेशन से कोई और सिंधू को आकर चुनौती दे, इस खिलाड़ी से उम्मीद है कि वो अपने करियर के सारे कीर्तिमान रच ले.

बैडमिंटन के प्रति इंटरेस्ट बढ़ा है देश में.
इंडिया में आज बैडमिंटन जिस फॉर्म में है, उस पर भी अंग्रेजों का असर दिखता है. ब्रिटिश सैनिक भारत में अपने ठहराव के दौरान जिमखानों में बैडमिंटन खेलते थे. साल 1873 में पूना में मिलिट्री कैंटोनमेंट में पहली बार इसके नियम लिखे गए. शुरुआती साल में खेल के उस रूप को 'पूना' कहा जाता था. मगर जैसे-जैसे ये खेल प्रतियोगिता के रूप में विकसित हुआ तो डेनमार्क, मलेशिया और इंडोनेशिया में ये खूब पॉपुलर हुआ. बाद में अमेरिका और जापान भी बैडमिंटन को गंभीरता से खेलने लगे.

पिता रमन्ना के साथ सिंधू
#1. 8 साल की उम्र से हैदराबाद में रैकेट थाम लिया था. पूरा नाम पुसरला वेंकट सिंधू है. साइना नेहवाल की तरह हैदराबाद से हैं. उन्होंने महबूब अली से शुरुआती गुर सीखे और फिर पुलेला गोपीचंद की नामी अकेडमी से उनके खेल में जान आई. उस वक्त सिंधू के करियर पर एक प्रोफाइल लिखते हुए अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने लिखा था- ‘रोज 56 किलोमीटर ट्रैवल करके ये लड़की टाइम पर कोचिंग कैंप पहुंचती है. यह अच्छी बैडमिंटन खिलाड़ी बनने की उसकी इच्छा, मेहनत और कमिटमेंट की झलक है.’
#2. गोपीचंद के मुताबिक, सिंधू के खेल की ताकत है, उसका एटीट्यूड और कभी हार न मानने की स्पिरिट. जानकार उनकी ताकत मानते हैं, उनकी लंबाई, अटैकिंग शॉट्स और संयम न खोने की आदत को. इस ओलंपिक में सारे मैच उन्होंने बिना किसी दबाव के खेले हैं.
#3. रियो ओलंपिक्स में साइना नेहवाल का आखिरी मैच याद कीजिए. पहला सेट वो हार चुकी थीं, दूसरे में मामला करीबी चल रहा था. लेकिन आखिरी पलों में साइना की बॉडी लैंग्वेज से उन पर 121 करोड़ लोगों की उम्मीदों का बोझ महसूस हो रहा था. सिंधू के खेल की सबसे खास बात अब तक यही रही है कि वो दबाव मुक्त होकर खेली हैं.
#4. सिंधू अपना खेल सुधारने के लिए ट्रेनिंग में जबरदस्त मेहनत करती हैं. उनके करीबी बताते हैं कि पिछले 6 साल से वह सुबह 4.15 बजे उठ जाती हैं. जब ट्रेनिंग सेशन चरम पर होता है तो वो हफ्ते में 6 दिन 10-12 घंटे प्रैक्टिस करती हैं.
#5. 2015 में प्रीमियर बैडमिंटन लीग की नीलामी में उन्हें चेन्नई की फ्रेंचाइजी चेन्नई स्मैशर्स ने करीब 63 लाख रुपयों में खरीदा. मलेशियन दिग्गज ली चोंग वेई और भारत की साइना नेहवाल के बाद वो इस लीग की वो तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी थीं.
#6. पीवी सिंधू को बिरयानी बहुत पसंद है. उनका शहर भी उम्दा बिरयानी के लिए मशहूर है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मैं हर टाइम बिरयानी नहीं खा सकती (फिटनेस डाइट की वजह से). अपनी डाइट बिगाड़े बिना जब भी मौका मिलता है बिरयानी पेट भरके खाती हूं.’
21-19 20-22 22-2017 सितंबर 2017, पीवी सिंधु ने नोज़ोमी ओकूहारा को कोरिया ओपेन में हराकर हिसाब बराबर किया:
22-20 11-21 21-18एक घंटे 24 मिनट चलने वाले इस मैच में जीतकर सिंधु ने ओकूहारा पर ब्रेक लगा दिया है. ओकूहारा लगातार 14 मैच जीत चुकी थीं.

ओकूहारा (सोर्स: रॉयटर्स)
2016 रियो ओलंपिक्स के फाइनल में पीवी सिंधू और स्पेन की कैरोलीना मरीन के बीच भिड़ंत हुई थी. हमारी ये बैडमिंटन खिलाड़ी मैच हारकर भी जीत गई थी. 1 घंटे 23 मिनट का ये मुकाबला काफी था दुनिया को ये बताने के लिए कि इंडिया में सिर्फ क्रिकेट ही नहीं खेला जाता. अपनी गजब की फाइट-बैक स्पिरिट से सिंधू ने इस खेल में खुद को वहां पहुंचा दिया, जहां अब तक कोई इंडियन नहीं पहुंच पाया है. खास बात ये है कि सिंधू के टैलेंट, करियर ग्राफ और टेंपरामेंट को देखकर यही लगता है कि अभी तो ये बस शुरुआत है.
सिंधू की सक्सेस का ये है राज

अनुशासन से समझौता नहीं करती हैं सिंधू. साभार- कैरावन
कुछ साल पहले युवराज सिंह के पिता योगराज से पूछा गया- युवी की शादी किससे हो रही है? योगराज बोले मैं चाहता हूं कि युवी मारिया शारापोवा (रशिया की टेनिस स्टार) से शादी करे. मैं चाहता हूं कि युवी की अगली जनरेशन फिजिकली इतनी जायंट हो कि वो किसी भी गेम में फिटनेस के लेवल पर मात न खाए. योगराज का ये तर्क थोड़ा अटपटा लगा था. फिटनेस तो मेहनत से पाई जा सकती है. मगर अब पीवी सिंधू के केस में योगराज की वो बात सही मालूम पड़ती है.
5 फीट 11 इंच की हाइट वाली पीवी सिंधू दुनिया में ज्यादातर महिला बैडमिंटन प्लेयर्स से लंबी हैं. 22 साल की सिंधू समय के साथ फिटनेस और स्टेमिना के मामले में भी तेजी से ग्रो कर रही हैं. उनकी फिटनेस के पीछे कोच पी गोपीचंद से पहले पिता पीवी रमन्ना और मां विजयलक्ष्मी हैं. दोनों नेशनल लेवल के वॉलीबॉल प्लेयर रहे हैं. रमन्ना तो 1986 की एशियन गेम्स में कांस्य पदक भी जीते थे. लंबी कद-काठी के साथ-साथ खेलकूद को प्रोत्साहित करते पैरेंट्स सिंधू के लिए किसी वरदान से कम नहीं रहे हैं. उस पर सिंधू का अनुशासन भरा लाइफ स्टाइल, जिस पर खुद कोच पी गोपीचंद कई बार कह चुके हैं कि सिंधू ने जिस रफ्तार से अपना करियर ग्राफ बढ़ाया है, उसके पीछे उसका गेम के प्रति गजब का अप्रोच और कभी हार न मानने की जिद है.
आगे-आगे सक्सेस, पीछे-पीछे पैसा

साइना नेहवाल से एक कदम आगे निकल कर सिल्वर मेडल जीता था सिंधू ने.
2016 ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीतने वाली सिंधू को दुनिया के चुनिंदा टॉप बैडमिंटन प्लेयर्स में गिना जाने लगा है. इस बात को सिंधू ने धुरंधरों को हराकर साबित किया है. इनमें ताइवान की नंबर एक खिलाड़ी ताइ जू-इंग, स्पेन की कैरोलिना मरीन और चीन की ली जूरुइ को हराना शामिल है. दुनिया की बेहतरीन बैडमिंटन प्लेयर बनने की ओर तेजी से कदम बढ़ाती सिंधू ने समय के साथ सारी स्किल्स सीख ली हैं. इसके लिए वो क्रेडिट कोच पी गोपीचंद को देती हैं.
साल 2008 से इंडिया में बैडमिंटन कोचिंग करने वाले गोपी ने देश में इस खेल को जिस तेजी से बढ़ाया है, उसी का नतीजा है कि साइना और सिंधू समेत हमारे 6 पुरुष खिलाड़ी दुनिया के टॉप-50 में आ चुके हैं. ओलंपिक सिल्वर मेडल जीतने के बाद सिंधू के पीछे पैसा और पब्लिसिटी भी खूब आया है. इंडिया में अब तक ये शोहरत क्रिकेटरों को ही नसीब होती रही है. सिंधू ने इस ट्रेंड को तोड़ा है. ओलंपिक मेडल जीतने के अगले ही महीने सिंधू ने स्पोर्ट्स मैनेजमेंट कंपनी बैसेलीन वेंचर्स के साथ करीब 50 करोड़ की डील की जो अगले तीन साल तक सिंधू के लिए काम करेगी. कंपनी ने कैरावन मैग्जीन को बताया कि क्रिकेट के बाहर सिंधू सबसे बड़ा चेहरा हैं. पिछले साल के आखिर तक सिंधू करीब 7.5 करोड़ के विज्ञापन की डील कर चुकी हैं.
उम्मीदों के भी अंबार

कोच पी गोपीचंद अपनी अकैडमी चलाते हैं
अब जब सिंधू को हर तरफ से सपोर्ट है, तो उम्मीदों के अंबार भी हैं. जिनपर ये खिलाड़ी लगातार खरी उतरती दिख रही है. अोलंपिक सिल्वर मेडल के बाद सिंधू से 2020 के टोक्यो ओलंपिक्स में गोल्ड की उम्मीद है. जिस कैरोलीना मरीन से सिंधू ओलंपिक फाइनल हारीं थी (19-21, 21-12, 21-15), उसी को 7 महीने बाद इंडिया ओपन के फाइनल में शिकस्त (21-19, 21-16) दी. इसी से साबित हो गया कि पीवी सिंधू किस टेंपरामेंट की खिलाड़ी हैं. वो खिलाड़ी जो हार से हारता नहीं, अपनी कमियों को सुधार जीत की तैयारी में जुट जाता है.
इस बारे में गोपी के साथ बतौर नेशनल कोच जुड़े इंडोनेशिया के मूल्यो हैंदोयो ने कहा था, "जो प्लेयर 21 साल की उम्र में टॉप-10 में हो, उससे अगले दो साल में नंबर एक होने की उम्मीद जायज है." पीवी सिंधू अभी वर्ल्ड रैंकिंग्स में चौथे स्थान पर हैं. सिंधू जब अपने करियर और फॉर्म के शिखर पर हैं और इससे पहले कि अगली जनरेशन से कोई और सिंधू को आकर चुनौती दे, इस खिलाड़ी से उम्मीद है कि वो अपने करियर के सारे कीर्तिमान रच ले.

बैडमिंटन के प्रति इंटरेस्ट बढ़ा है देश में.
इंडिया में आज बैडमिंटन जिस फॉर्म में है, उस पर भी अंग्रेजों का असर दिखता है. ब्रिटिश सैनिक भारत में अपने ठहराव के दौरान जिमखानों में बैडमिंटन खेलते थे. साल 1873 में पूना में मिलिट्री कैंटोनमेंट में पहली बार इसके नियम लिखे गए. शुरुआती साल में खेल के उस रूप को 'पूना' कहा जाता था. मगर जैसे-जैसे ये खेल प्रतियोगिता के रूप में विकसित हुआ तो डेनमार्क, मलेशिया और इंडोनेशिया में ये खूब पॉपुलर हुआ. बाद में अमेरिका और जापान भी बैडमिंटन को गंभीरता से खेलने लगे.
पीवी सिंधू के बारे में कुछ बातें-

पिता रमन्ना के साथ सिंधू
#1. 8 साल की उम्र से हैदराबाद में रैकेट थाम लिया था. पूरा नाम पुसरला वेंकट सिंधू है. साइना नेहवाल की तरह हैदराबाद से हैं. उन्होंने महबूब अली से शुरुआती गुर सीखे और फिर पुलेला गोपीचंद की नामी अकेडमी से उनके खेल में जान आई. उस वक्त सिंधू के करियर पर एक प्रोफाइल लिखते हुए अंग्रेजी अखबार ‘द हिंदू’ ने लिखा था- ‘रोज 56 किलोमीटर ट्रैवल करके ये लड़की टाइम पर कोचिंग कैंप पहुंचती है. यह अच्छी बैडमिंटन खिलाड़ी बनने की उसकी इच्छा, मेहनत और कमिटमेंट की झलक है.’
#2. गोपीचंद के मुताबिक, सिंधू के खेल की ताकत है, उसका एटीट्यूड और कभी हार न मानने की स्पिरिट. जानकार उनकी ताकत मानते हैं, उनकी लंबाई, अटैकिंग शॉट्स और संयम न खोने की आदत को. इस ओलंपिक में सारे मैच उन्होंने बिना किसी दबाव के खेले हैं.
#3. रियो ओलंपिक्स में साइना नेहवाल का आखिरी मैच याद कीजिए. पहला सेट वो हार चुकी थीं, दूसरे में मामला करीबी चल रहा था. लेकिन आखिरी पलों में साइना की बॉडी लैंग्वेज से उन पर 121 करोड़ लोगों की उम्मीदों का बोझ महसूस हो रहा था. सिंधू के खेल की सबसे खास बात अब तक यही रही है कि वो दबाव मुक्त होकर खेली हैं.
#4. सिंधू अपना खेल सुधारने के लिए ट्रेनिंग में जबरदस्त मेहनत करती हैं. उनके करीबी बताते हैं कि पिछले 6 साल से वह सुबह 4.15 बजे उठ जाती हैं. जब ट्रेनिंग सेशन चरम पर होता है तो वो हफ्ते में 6 दिन 10-12 घंटे प्रैक्टिस करती हैं.
#5. 2015 में प्रीमियर बैडमिंटन लीग की नीलामी में उन्हें चेन्नई की फ्रेंचाइजी चेन्नई स्मैशर्स ने करीब 63 लाख रुपयों में खरीदा. मलेशियन दिग्गज ली चोंग वेई और भारत की साइना नेहवाल के बाद वो इस लीग की वो तीसरी सबसे महंगी खिलाड़ी थीं.
#6. पीवी सिंधू को बिरयानी बहुत पसंद है. उनका शहर भी उम्दा बिरयानी के लिए मशहूर है. एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, ‘मैं हर टाइम बिरयानी नहीं खा सकती (फिटनेस डाइट की वजह से). अपनी डाइट बिगाड़े बिना जब भी मौका मिलता है बिरयानी पेट भरके खाती हूं.’

