पता नहीं वो दिन कब आएगा जब भारत वर्ल्ड कप फुटबॉल खेलने जाएगा. पर भारतीय फुटबॉलफेडरेशन के अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल कह रहे हैं कि भारत 2022 फुटबॉल वर्ल्ड मेंक्वालिफाई करने के लिए पूरा ज़ोर लगाएगा. इंडियन फुटबॉल फॉरम 2016 के मौके परप्रफुल्ल पटेल ने कहा, ‘ हम 2022 वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई करने की उम्मीद रखतेहैं. हमारी टीम को पूरा समर्थन मिलेगा और इस मकसद के लिए जो भी ज़रूरी क़दम होगा हमवो उठाएंगे.’ 2018 रूस वर्ल्ड कप क्वालिफिकेशन से भारत पहले ही बाहर हो चुका है.2022 का वर्ल्ड कप कतर में होगा.ये साल भारतीय फुटबॉल के लिए अच्छा रहा है. कुछ दिनों पहले भारत के क्लब बैंगलुरूएफसी ने एशिया के दूसरे सबसे बड़े टूर्नामेंट एएफसी कप के फाइनल तक का सफर तय कियाथा. इस पर टिप्पणी करते हुए प्रफुल्ल पटेल ने कहा. ‘बैंगलुरू का एएफसी कप मेंएतिहासिक प्रदर्शन और हमारी अंडर-16 टीम का सितंबर में अंडर-16 एएफसी चैंपियनशिप,गोवा में सऊदी अरब और यूएई जैसी बड़ी एशियन टीमों के खिलाफ शानदार खेल इस बात कोदिखाता है कि भारतीय फुटबॉल ने एक बार फिर पैर जमाने शुरू कर दिए हैं.’पुरानी फोटोकिसी ज़माने में भारत एशिया की नंबर एक टीम होता था और ओलंपिक में सेमीफाइनल तक कासफर भी तय किया था. 60 के दशक तक भारत एशियन गेम्स में बहुत बड़ी टीम थी. एशियनगेम्स में गोल्ड मेडल भी आया है. उसके बाद से भारत की फुटबॉल पिछड़ गई.बैंगलुरू एफसी ने एएफसी कप का फाइनल दोहा, कतर में ही खेला था और इराक के एयर फोर्सक्लब से 0-1 से हार गए थे, लेकिन वहां भारतीय टीम को दर्शकों का खूब समर्थन मिलाथा. प्रफुल्ल पटेल एशियन फुटबॉल महासंघ के भी उपाध्यक्ष हैं. पटेल ने कहा,’हम मानतेहैं कि कतर एशियाई फुटबॉल परिवार में हमारा साथी है और हाल ही में एएफसी कप केफाइनल में हमने ये देखा भी था.’भारत की टीम हाल-फिलहाल में अच्छा कर रही है. कोच स्टीफन कोन्स्टैंनटीन के दोबाराआने के बाद 170वें पायदान से 137वें पायदान पर है. पिछले 7 साल में पहली बार भारतकी टीम टॉप-140 में है. लेकिन सबसे बड़ी समस्या है कि भारत बहुत कम इंटरनेशनल मैचखेलता है जिसका मतलब कम रैंकिंग पोइंट्स और रैंकिंग में नीचे रहने वाली टीमों कोक्वालिफिकेशन के लिए मुश्किल ग्रुप मिलता है. भारत कोई 6-7 महीने में 1 मैच खेलताहै. किसी ज़माने में अर्जेंटीना भी भारत आकर खेली थी लेकिन अब कई सालों में कोईएक-आध इंटरनेशनल टूर्नामेंट होता है.अगले साल अंडर-17 वर्ल्ड कप के साथ भारत पहली बार कोई फिफा टूर्नामेंट का आयोजनकरवाने जा रहा है. इस मौके को भारतीय फुटबॉल के लिए एक निर्णायक मोड़ के तौर परदेखा जा रहा है.फुटबॉल फेडरेशन ने हाल ही में अंडर-17 वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए 'मिशन 11मिलियन' नाम से एक प्रोजेक्ट शुरू किया है जिसका मकसद 11 लाख शहरी बच्चों को फुटबॉलखेलने के लिए प्रेरित करना है.पिछली बार एशिया में 2002 में जापान-कोरिया में वर्ल्ड कप आयोजित करवाया गया था. उसवर्ल्ड कप में एशियन टीमों में जापान ने क्वार्टर फाइनल और कोरिया ने सेमीफाइनल तकका सफर तय किया था. एशिया का सोया हुआ हाथी तो तब जाग गया था. भारत अभी भी सो रहाहै. भारत दुनिया में नहीं तो कम से कम एशिया की फुटबॉल में अपनी दस्तक देने लगा है.लेकिन ये तब जागेगा जब सेलेक्टर्स के सामने टीम इंडिया चुनने वक्त 50-60 खिलाड़ियोंके नाम की जगह 500-600 टॉप खिलाड़ी होंगे. शायद अंडर-17 वर्ल्ड कप से खिलाड़ियों कीएक खेप निकल आए जो अगले 4-5 सालों में भारतीय फुटबॉल का सीन बदल दे.